पुष्कर की सादगी आवाम को कर रही कायल

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इक्कीस सालों में अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने तो सत्ता पर काबिज होने के बाद अपने आपको राज्य का शहंशाह समझ लिया था और उनके साथ सलाहकारों की ऐसी फौज साथ में जुडी रही जो शहंशाह को इस भ्रमजाल में फंसाते रहे कि शहंशाह का हर फैसला पत्थर की लकीर होता है लेकिन राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी से जब मुख्यमंत्री की कुर्सी ली गई तो उन्होंने अपने दर्द को बयां करते हुए यह संदेश दिया था कि अगर वह सूचना विभाग के कुछ अफसरों के बताये रास्ते पर न चलते तो शायद उनकी गद्दी न जाती। ऐसे ही और कुछ पूर्व मुख्यमंत्री भी हिटलर अंदाज में राजपाठ चलाते रहे और उनका राजपाठ कब उनके हाथों से फिसल गया यह उन्हें भी पता नहीं चला? अब राज्य की कमान युवा राजनेता पुष्कर सिंह धामी के हाथो में है और उनकी किचन टीम के चंद अफसरों ने उन्हें संदेश दे रखा है कि वह सत्ता चलाने के लिए राजा की भूमिका में नहीं बल्कि मुख्य सेवक की भूमिका राजपाठ चलायें। किचन टीम की सलाह पर एक साल से सत्ता चला रहे पुष्कर सिंह धामी पर एक भी दाग नहीं लग पाया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कभी अहंकार पाला हो। सीएम पुष्कर सिंह धामी को इस बात का इल्म हो चुका था कि सत्ता अहंकार से नहीं बल्कि प्यार से चलाई जाती है जिससे आवाम के दिलों में बसा जा सके और यही कारण है कि एक साल से पुष्कर सिंह धामी सादगी के साथ सत्ता चलाते हुए नजर आ रहे हैं और उनकी सादगी जिस तरह से सडक से लेकर मंच तक दिखाई देती आ रही है उसी का परिणाम है कि एक अल्प कार्यकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की जनता के महानायक बन गये हैं।
उततराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को इस बात का वर्षों से आभास है कि जिस पूर्व मुख्यमंत्री ने भी अहंकार से सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये उस पूर्व मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई। चार साल तक सत्ता चलाने वाले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जिस अहंकार के साथ सत्ता चलाई और उनकी किचन टीम के सलाहकारों ने उन्हें जिस तरह से मीडिया का दमन करने के लिए आगे किया उसी का परिणाम रहा कि वह राज्य के अन्दर एक तानाशाह राजनेता के रूप में उभर कर सामने आये और उनके हाथों से मुख्यमंत्री की कुर्सी चली गई। पुष्कर सिंह धामी को एक साल पूर्व जब सत्ता मिली थी तो किसी को यह आभास भी नहीं था कि मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी आज तक के सबसे बेहतर मुख्यमंत्री के रूप में उभर कर आगे आ जायेगे। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपनी किचन टीम में जिस तरह से चंद ईमानदार अफसरों को शामिल किया उन्होंने ही उन्हें साफ संदेश दे दिया था कि वह सत्ता चलाने के लिए राजा के रूप में नहीं बल्कि मुख्य सेवक के रूप में धरातल पर काम करें तो उससे वह जनता के दिलों में राज करेंगेे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी स्वच्छ किचन टीम के बताये रास्ते पर जिस तरह से आगे बढना शुरू किया उसी का परिणाम है कि वह मात्र एक साल के भीतर राज्यवासियों का दिल जीतने में कामयाब हो गये। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता चलाने के लिए अहंकार को एक बक्से में बंद कर दिया और सादगी के साथ उन्होंने सत्ता चलाने का रास्ता अपनाया और इस रास्ते पर चलते हुए उन्होंने कभी सडक पर खडी ठेली पर गोल गप्पे खाये तो कहीं उन्होंने अपना काफिला रूकवाकर भुट्टे खाने का आनंद लिया तो कभी उन्होंने सडक पर चाय के खोखे पर बैठकर वहां चाय पकौडी का आनंद लिया।
पुष्कर सिंह धामी की सादगी यहीं नहीं थमी और वह जब अपनी विधानसभा चम्पावत पहुंचे तो उन्होने सडक के किनारे लगी एक सब्जी की दुकान पर अपने साथियों के साथ जाकर वहां से सब्जी खरीदी और सब्जी बेचने वाले और वहां खडे कुछ लोगों के साथ उन्होंने एक सेवक के रूप में दिल खोलकर फोटो खिचवाई तो यह नजारा देखकर सडक पर सब्जी बेच रहा व्यापारी और वहां खडे लोग भी पुष्कर ंिसह धामी की सादगी के कायल हो गये। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी का एक दयालु रूप उस समय सामने आया जब देहरादून के अक्षय पात्र योजना के शुरू होने के कार्यक्रम में एक व्यक्ति अपने नन्हें बच्चे को लेकर वहां पहुंचा तो उस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नजर पड गई और उन्होंने उस मासूम को अपनी गोदी में उठाकर जिस तरह से लाड के साथ प्यार करते हुए उसके साथ खेलने का बच्चे वाला मन दिखाया तो उस दृश्य को देखकर हर कोई पुष्कर ंिसह धामी की इस सादगी पर फिदा हो गया और यह कहने से नहीं चूका कि जहां ऐसा मुख्यमंत्री दयालुभाव रखता है वहां की जनता हमेशा खुशहाल रहती है।

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