अग्निवीरों पर राजनीति करता विपक्ष

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देहरादून(संवाददाता)। केन्द्र ने अग्निवीरों के लिए देशभर में अग्निपथ योजना को हरी झण्डी दी तो उससे देशभर के अन्दर माहौल खराब हो गया और कुछ राज्यों में अग्निवीरों ने जिस तरह से कानून को अपने हाथों में लिया उससे देश की तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने आगे आकर ऐलान किया था कि अग्निपथ योजना किसी भी कीमत पर वापस नहीं ली जायेगी और जो अग्निवीर पत्थरबाजी व कानून हाथ में लेता हुआ दिखाई दिया तो उसे अग्निवीर नहीं बनाया जायेगा। वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब राज्य के अग्निवीरों से शांति की अपील की तो राज्य के लाखों अग्निवीरों ने पुष्कर सिंह धामी में आस्था दिखाई और उसी का परिणाम है कि राज्य में हर तरफ अमन-चैन बना हुआ है लेकिन विपक्ष अब अग्निपथ पर राजनीति करने में जुटा हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब राज्य में अग्निवीर जो शुरूआती दौर में आक्रामक रूख अपनाये हुये थे वह अगर अब अग्निपथ योजना को समझकर उस पर खामोशी साध रहे हैं तो विपक्ष किसके लिए इस योजना का विरोध करने के लिए सडकों पर आंदोलन कर रही है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अग्निपथ योजना के आरम्भ होने पर राज्य के युवाओं को संदेश दिया था कि उन्हें जब अग्निवीर बनाया जायेगा तो उससे उनका एक बडा सम्मान बनेगा और वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पुलिस व एसडीआरएफ में भी समायोजित किया जायेगा। पुष्कर सिंह धामी ने जब अग्निवीरों को लेकर अग्निपथ योजना को युवाओं के लिए एक बेहतर अफसर बताया तो राज्य के कुछ जिलों में युवाओं ने अग्निपथ योजना का विरोध किया लेकिन उनका विरोध सडकों पर पथरबाजी और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाने का नहीं दिखा। पुष्कर सिंह धामी ने आगे आकर इस योजना को लेकर जब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खूब प्रशंसा की और कहा कि अग्निपथ योजना उत्तराखण्ड के लाखों युवाओं के लिए एक बेहतर अवसर है तो उससे राज्य के लाखों युवाओं ने पुष्कर सिंह धामी में अपनी बडी आस्था दिखाई और उसी का परिणाम है कि राज्य के अन्दर धामी की रणनीति से चारो तरफ अमन चैन नजर आ रहा है। हालांकि अग्निपथ योजना पर विपक्ष राजनीति करने के लिए क्यों मैदान में उतरा हुआ है यह समझ से परे है क्योंकि जब अग्निवीरों ने ही अग्निपथ योजना को सही दिशा में बढता हुआ फैसला बताया तो फिर राजनेताओं को इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए आखिर क्यों आगे आना पड रहा है यह समझ से परे है?

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