उम्मीदों के धामी

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अधिकारियों को अल्टीमेटमः आम जनता को बार-बार सीएम के पास न आना पडे़
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री से राज्यवासियों को एक बडी उम्मीद जग चुकी है इसलिए राज्य में एक ही आवाज गूंज रही है कि उम्मीदों के धामी उत्तराखण्ड की दशा और दिशा दोनो बदलकर रख देंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दिल्ली से लौटकर जैसे ही देहरादून पहुंचे तो उन्होने आज सुबह जनता दरबार में मिलने आये लोगों के पास जाकर उनकी पीडा को सुना और वहां आये कुछ विकलांगों को देखकर मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया और उसी के चलते उन्होंने अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया कि आम जनता को बार-बार सीएम के पास न आना पडे़ इसलिए आम जनता की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया जाये। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि तहसील व जिला स्तर पर ही जनता को न्याय दिलवाया जाये और आम लोगों को अपनी समस्याओं के लिए देहरादून की दौड न लगानी पडे। पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गये हैं जो अपने दरबार में आये हर व्यक्ति के पास जाकर उसकी पीडा को सुनते हैं और उसका हल करने के लिए वह तत्काल अफसरांे को आदेश देते हैं जिससे आवाम को अब राज्य के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से एक बडी उम्मीद जग चुकी है और पुष्कर सिंह धामी भी आवाम की उम्मीदों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडे हुये दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों की समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने जन समस्याओं के उचित समाधान के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी समस्याओं को संबंधित विभागों को भेजा जाय एवं उन पर हुई कार्यवाही से भी अवगत कराया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जन समस्याओं का त्वरित निराकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यह सुनिश्चित किया जाए कि जन समस्याओं का शीघ्रता से समाधान हो। आम जनता को अपनी समस्याओं के निराकरण के लिये बार-बार मुख्यमंत्री तक न आना पड़े, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास एवं सबके विश्वास की भावना के साथ सभी की समस्याओं के समाधान के प्रति संकल्पबद्ध है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब अपने जनता दरबार में एक व्यक्ति को गोद में बच्चा लाते हुए देखा और उनकी नजर दो विकलांग युवकों पर पडी तो वह सीधे उनके पास पहुंचे और उनके पत्र लेकर जब उसमें लिखी दास्तां को पढा तो उन्होंने कुछ अफसरों को साफ अल्टीमेटम दिया कि जिलों में तैनात अफसर लोगों की समस्याओं को सुनकर उसका वहीं निस्तारण करें जिसके चलते आम आदमी दूर दराज से मुख्यमंत्री आवास न आये क्योंकि दूर-दराज से भी अगर अपनी समस्या लेकर आयेंगे तो उसका संदेश गलत जायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के ऐसे राजनेता बन गये हैं जिससे राज्य की जनता को उनसे बडी उम्मीदें बन गई हैं और पुष्कर सिंह धामी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए कोई कसर नहीं छोड रहे हैं और उनके दरबार में आने वाले हर पीडित का दर्द वह अपना समझकर उन्हें न्याय देने के लिए वह तत्काल आगे आते हुए दिखाई दे रहे हैं जिससे राज्यवासियों को एक आस दिखाई देने लगी है कि अब राज्य में उनका दर्द महसूस करने वाला मुख्यमंत्री उनके बीच खडा है।

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