उत्तराखण्ड में दिखेगा सुशासन

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा सदस्य के रूप में जब शपथ ली तो उन्होंने 1986 में फिल्मी पर्दे पर आई हिन्दी फिल्म ‘अंकुशÓ का वह गीत जरूर अपने भीतर गुनगुनाया होगा कि ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना, हमें चले नेक रस्ते पे हमसे भूलकर भी कोई भूल हो नÓ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्य पर चलने की जिस तरह से शपथ ली है वह शपथ राजनीति में एक बहुत बडी चुनौती माना जाता है क्योंकि उत्तराखण्ड के इतिहास में इक्कीस सालों से राज्य के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सत्य की राह पर चलने के लिए कभी अपने कदम आगे नहीं उठाये और चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने राज्यपाल के सामने ली उस शपथ को भी झूठ के द्वार पर लाकर खडा कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि वह सत्ता चलाने के दौरान द्वेष भावना से काम नहीं करेंगे और जो काम उनके सामने आयेंगे उसे वह निष्ठा से पूरा करेंगे लेकिन आवाम के सामने ली गई यह शपथ अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों ने रौंद कर रख दी थी लेकिन अब उत्तराखण्ड में एक नई इबारत लिखने आये राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्य पर चलने की जिस तरह से शपथ ली है उससे राज्य की जनता के मन में एक आशा की किरण दिखाई दे रही है और उन्हें इस बात का भी इल्म है कि मुख्यमंत्री जब सत्य की राह पर आगे बढेंगे तो उनके कुछ अपने भी उन्हें अपने निशाने पर लेकर उन्हें सत्य के मार्ग में विधन डालने का खेल, खेल सकते हैं? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्य की राह पर चलने के लिए अपना विजन उस समय साफ कर दिया जब उन्होंने अपनी किचन टीम में ईमानदार अफसरों को शामिल किया था जिनकी छवि उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में एक ईमानदार अफसरों के रूप में देखी जाती है।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पारदर्शी और स्वच्छ सत्ता चलाने की शैली से राज्य की जनता के दिलों में अपनी इतनी बडी जगह बना ली जितनी इक्कीस साल में कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री नहीं बना पाया था यह छवि इसलिए भी एक बडे तेज के रूप में दिखाई दे रही है क्योंकि दस माह के कार्यकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक बार भी अहंकार की राजनीति करते हुए नहीं देखा गया जबकि भाजपा के चंद पूर्व मुख्यमंत्री सत्ता को अपनी जायदाद समझने लगे थे और जब भी कोई उनकी सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटालों पर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए आगे आता था तो एक दो पूर्व मुख्यमंत्री सत्ता के घमंड में उस व्यक्ति को डराने का हर प्रपंच रचने से पीछे नहीं हटते थे? उत्तराखण्ड में वर्षों से राज्य के अन्दर लोकायुक्त बनाने की इसलिए मांग उठती रही क्योंकि अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और घोटालों का काला कारोबार इस कदर पनपने लगा था कि राज्य की जनता अपने आपको अपने ही राज्य में डर कर जीने के लिए मजबूर हो रही थी? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री की शपथ लेते हुए अपना विजन साफ किया था कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जंग होगी और किसी भी भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज को बक्शा नहीं जायेगा और उसी राह पर वह आगे बढते चले गये जिससे राज्य की जनता ने उन्हें अपने प्रदेश का भाग्य विधाता मानकर उनके हाथों में सत्ता सौंप दी थी और अब चम्पावत में उपचुनाव जीतने के बाद विधानसभा के सदस्य के रूप में उन्होंने जब अपनी शपथ ली तो उनके माथे पर एक तेज देखने को मिला और कहीं न कहीं वह शपथ लेने के दौरान हिन्दी फिल्म अंकुश का वह गीत मन में जरूर गुनगुना गये जिसके बोल थे कि ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना, हमें चले नेक रस्ते पे हमसे भूलकर भी कोई भूल हो नÓ। पुष्कर सिंह धामी ने सत्य पर चलने की शपथ इसलिए भी ली है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपना सखा मान रखा है और समूचे संसार को इस बात का इल्म है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पिछले आठ साल से देश में कितने बडे विजन के तहत काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को उत्तराखण्ड में भी धरातल पर उतारने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने सत्य पर चलने की शपथ लेकर सत्ता को चलाने का अपना इरादा साफ कर दिया है।

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