उत्तराखण्ड मंे चल रही बहस धामी के चेहरे से मिलेगी सत्ता!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हमेशा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने वाले राजनेताओं के मन में बस एक ही भौकाल रहता है कि वह प्रदेश के राजा हैं और वह प्रजा को अपनी राजशाही से डरा कर रखने में ही विश्वास रखते रहेे हैं कभी भी चंद पूर्व मुख्यमंत्रियों ने आवाम के बीच जाकर उनका दर्द सुनने की जहमत नहीं उठाई और उन्हें सबसे बडा रोग यह लगा कि अगर किसी ने भी पूर्व मुख्यमंत्री को उनकी सत्ता में हो रहे सच्चाई का आईना दिखाने की कोशिश की तो उसे नेस्तानबूत करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री के कुछ लोग हमेशा अगली पक्ति में खडे होकर उसके खिलाफ साजिशों का तानाबाना बुनकर उन्हें अपना भौकाल दिखाने का खेल खेलते रहते थे यही कारण है कि हमेशा पांच साल बाद राज्य के अन्दर सत्ता के अन्दर परिवर्तन देखने को मिला। भाजपा की डबल इंजन की सरकार में भी चार साल तक सत्ता चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के शासनकाल मंे हुये भ्रष्टाचार व घोटालों पर जब उन्हें सच्चाई का आईना दिखाने का काम हुआ तो अपने आपको उत्तराखण्ड का राजा समझकर पूर्व मुख्यमंत्री ने राजशाही अंदाज में उन आवाजों को कुचलने का काम किया जिसने उन्हें राज्य में हो रहे सच से रूबरू कराने के लिए अपने कदम आगे बढाये थे। वहीं उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने छह माह के कार्यकाल में जिस सौम्यता और नम्रता से सत्ता चलाई उसी का परिणाम रहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से दो-दो हाथ करने के लिए ताकत के साथ मैदान में उतरी और राज्य के अन्दर जिस तरह से नई सरकार को लेकर बहस चल रही है उसमें आवाम की सोच भाजपा को लेकर आश्वस्त है कि पुष्कर सिंह धामी के चेहरे से भाजपा को फिर सत्ता मिलेगी और शायद इस बार उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार सत्ता परिवर्तन का मिथक टूट जायेगा?
उत्तराखंड राज्य में मतदान और मतगणना के बीच चार दिन से अधिक समय नही है,फिलहाल राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है तो सरकार के पास करने को कुछ नहीं है सिवाय मुलाकातों के और सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इसका फायदा उठाते हुए इन दिनों अपने पूर्ववर्तियों व वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं,क्योंकि भाजपा के पास भी कई पूर्व मुख्यमंत्री की जमात है। पुष्कर सिह धामी पिछले कुछ दिनों से त्रिवेंद्र सिंह रावत, रमेश पोखरियाल निशंक और तीरथ सिंह रावत से मिल चुके है। जिससे राजनीति के पुरोधा धामी की नम्रता मान रहे हैं तथा कह रहे है कि नतीजे आने से पहले धामी सधी हुई फील्डिंग बिछाकर अपने प्रतिद्वंदियों पर नकेल कसते जा रहे है। पुष्कर सिह धामी केन्द्रीय नेतृत्व के भी आँखों के तारे है। अब तो राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले दबे स्वर में कहते दिखाई दे रहे हैं कि धामी ने कब मोदी के आँखो से सूरमा चुरा लिया स्वयं मोदी को भी मालूम नही है। धामी आज राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ साथ राजनाथ सिंह, धर्मेन्द्र प्रधान, प्रह्लाद जोशी के साथ साथ अन्य नेताओं के साथ अच्छी टूनिग है,और धामी भी इसे बखूबी भुना भी रहे हैं। राज्य के पाँचों सांसदो के साथ भी कदम ताल कर उनसे राज्य के विकास में सहयोग माँग कर अपने विरोधियों की बोलती बंद कर रहे है। राज्य में धामी 11वें मुख्यमंत्री हैं, इन से पहले आठ भाजपा सरकारों में बने। भाजपा 11 और कांग्रेस 10 साल सत्ता में रही, लेकिन कांग्रेस इस मामले में भाजपा से कहीं पीछे है। कांग्रेस के हिस्से तीन ही मुख्यमंत्री आये हैं। इनमें से विजय बहुगुणा अब भाजपा में हैं, जबकि नारायण दत्त तिवारी रहे नहीं। हरीश रावत फिर मुख्यमंत्री बनने की कतार में सबसे पहले स्थान पर खडे हैं। दस मार्च को जब परिणाम आ जायेगा तो इसकी धमक दिल्ली दरबार में अवश्य ही जायेगी,यदि किन्ही कारणों से भाजपा इस मर्तबा सरकार नही बना पायी तो इसकी गाज पाँचो सांसदो पर ही गिरेगी,खैर ये तो 2024 का मामला है। वैसे राज्य में धामी के चेहरे से भाजपा की सत्ता में ताजपोशी होने जा रही है।

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