उत्तराखण्ड में पुष्कर ने किया ‘चमत्कार’

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने मात्र छह माह के भीतर ही अपने राजनीतिक जादू से कांग्रेस को चुनावी रणभूमि में नचाकर रख दिया? पुष्कर ंिसंह धामी भले ही कांग्रेस व भाजपा के कुछ दिग्गज नेताओं की आंखों में चुभते रहे लेकिन उन्होंने अपने सभी विरोधियों की आंखों से सूरमा इतनी चालाकी से चुरा लिया कि दोनो राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं को पुष्कर सिंह धामी कहीं न कहीं राजनीति के जादूगर नजर आ रहे हैं? अगर राज्य में भाजपा फिर सत्ता में आई तो भाजपा के अन्दर मुख्यमंत्री की खोज नहीं होगी क्योंकि इस जीत में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सखा पुष्कर सिंह धामी को सत्ता में एक बार फिर राजपाठ दिलाने के लिए चुनाव के आखिरी समय में तीन बडी रैलियां कर लाखों उत्तराखण्डवासियों के मन में एक बार फिर पुष्कर ंिसंह धामी को मुख्यमंत्री बनाये जाने के लिए उनका मन भाजपा की ओर कहीं न कहीं आकृषित कर दिया था? शायद यही कारण है कि पुष्कर सिंह धामी समूचे उत्तराखण्ड में विश्वास के साथ दावा कर रहे हैं कि भाजपा इस बार साठ के पार ही नजर आयेगी।
उत्तराखण्ड में चार साल तक भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत सत्ता चलाते रहे और उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार, घोटाले व अफसरशाही के बेलगाम होने का खूब शोर मचता रहा लेकिन कांग्रेस ने त्रिवेन्द्र राज में कभी भी इन मुद्दों पर भाजपा सरकार को घेरने के लिए सड़कों पर अपने कदम आगे नहीं बढाये क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म था कि अगर त्रिवेन्द्र रावत के राज में विधानसभा चुनाव हुये तो उनकी विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत को कोई नहीं रोक पायेगा। त्रिवेन्द्र रावत राज में त्रिवेन्द्र रावत व हरीश रावत की जुगलबंदी कांग्रेस व भाजपा के दिग्गज नेताओं को कभी भी समझ नहीं आई और न ही भाजपा हाईकमान यह समझ पाया कि दोनो रावतों के बीच आखिर कौन सा ऐसा गठबंधन चल रहा है जिसके चलते विपक्ष में रहते हुए भी हरीश रावत त्रिवेन्द्र सत्ता पर कोई उंगली नहीं उठा रहे हैं। भाजपा हाईकमान को जब उत्तराखण्ड में चल रही भाजपा सियासत से आवाम की नाराजगी का उन्हें जब इल्म हुआ तो चंद माह में ही दो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत को सत्ता से महरूम कर दिया गया और उसके बाद पुष्कर सिंह धामी को छह माह के लिए सत्ता सौंपकर उन्हें राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार लाने का जिम्मा सौंपा। भाजपा हाईकमान के सपनों पर खरा उतरने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने रात-दिन एक कर दिया और राज्य के अन्दर जो भाजपा के खिलाफ माहौल चल रहा था उस माहौल को पुष्कर सिंह धामी ने अपनी चाणक्य नीति के चलते कांग्रेस के चंद बडे-बडे दिग्गज नेताओं को अपने राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसाकर उन्हें अपनी विधानसभा सीटों से बाहर आने का मौका तक नहीं दिया और विधानसभा चुनाव में समूची कांग्रेस को चुनावी रणभूमि में नचा कर रख दिया और यह चुनाव भाजपा व कांग्रेस के बीच फंसा हुये मैच की तरह नजर आ रहा है लेकिन इसके बावजूद हरीश रावत व पुष्कर सिंह धामी राज्य में अपनी सरकार बनाने का दम भर रहे हैं। युद्ध हो या चुनाव बिना रणनीति के जीता नही जा सकता है। इसकी बानगी देखने को मिली है उत्तराखंड राज्य विधानसभा चुनावों में,जहाँ अपने को राजनीति के चाणक्य मानने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जो लालकुआँ विधानसभा से लड रहे थे,उन्हें राजनीति के नौसिखिया युवा पुष्कर सिह धामी ने उनके ही बुने जाल में फंसा कर उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नही दिया। धामी भलीभाँति जानते थे कि यदि हरदा को ढीला छोडा तो ये समीकरण को गढबढा सकते है। युवा है तो जीतने की ललक भी हिल्लौरे मारती है। राज्य में चुनावी परिणाम आने में अभी एक पखवाड़े से ज्यादा समय शेष बचा हुआ है, लेकिन युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी की बढती लोकप्रियता के चलते कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत बौखलाहट मे दिखाई दे रहे हैं। कारण स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है भाजपा ने पार्टी के तेज तर्रार नेताओ के पैरलर बी टीम को आगे बढाया जिसका परिणाम यह हुआ कि युवा विधायक पुष्कर सिह धामी को राज्य की बागडोर संभालने का मौका भाजपा के रणनीति कारो ने दिया, जबकि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत मै की भावना से चलते आज तक राज्य में किसी अपने अधीनस्थ नेता पर भरोसा तक नही कर पाये हैं। हरदा ने अपने निजी स्वार्थों के चलते कांग्रेस के दिग्गज नेताओ को आगे बढने नही दिया और समय से पहले ही कांग्रेस में फूट पडती गयी। जैसे विदित है कि साढे चार सालों मे में त्रिवेंद्र रावत सरकार ने कुछ भी नही किया तथा जनता के बीच असंतोष के स्वर तेज हो रहे थे तो बागडोर गढवाल सांसद तीरथ सिंह रावत को दी लेकिन उन्हें भी सत्ता के चाटुकारो ने चलने नही दिया,तीसरे मुखिया के रूप में युवा पुष्कर सिह धामी आये तो वे मास्टर स्ट्रोक खेलते खेलते विपक्षी दल कांग्रेस को चारो खाने चित्त कर बैठे, जिसकी बौखलाहट वर्तमान में हरदा के चेहरे पर साफ झलकती दिखाई दे रही है। राज्य में पाँचवी बार विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी माना कि युवा धामी का तोड़ हमारे पास नही है। जनता कह रही है धामी है तो विकास है। इस बार का जो लक्ष्य भाजपा ने साठ का दिया उस लक्ष्य को पाने के लिए युवा के ही भरोसे पर हासिल किया जा रहा है। धामी के विश्वास को भी जनता ने सिर आँखों से माना है ओर प्रचंड मत पार्टी के उम्मीदवारों को दिया है।

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