उत्तराखंड में संपन्न हुए मतदान के बाद सत्ताधारी भाजपा में जिस प्रकार से भीतरघात को लेकर भूचाल मचा है। उससे दिल्ली में बैठी भाजपा हाईकमान भी सकते में हैं। अपने नेताओं को सख्त हिदायत भेजी है कि सार्वजनिक रूप से कोई भी ऐसा बयान ना दें जिससे पार्टी को संकटों से जूझना पड़े। दरअसल सत्ताधारी भाजपा में मुख्यमंत्री बनने की होड़ इस कदर में मची है कि अपने अपने खेमों के विधायकों से दिग्गज नेता भीतरघात के बयान दिलवा रहे है भाजपा के कुछ पार्टी अधिकारी ऐसा षड्यंत्र रच रहे हैं? जिससे सत्ता से दो-चार कदम दूर रहते हुए कोई नेता उन कदमों को ना हासिल कर ले। इसलिए पहले ही भीतरघात के नाम पर यह बड़ी बड़ी खाई खोद दी जा रही है?
संवाददाता
देहरादून। भाजपा के कुछ दिग्गज नेता जानते हैं की अगर युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पूरे पांच साल मिल गए तो उनका राजनीतिक भविष्य अभी से समाप्त हो जाएगा। वह नेता अपने रिटायरमेंट से पहले अपने परिवारक विरासत को आगे बढ़ाना चाहने के लिए अपने को मजबूत करना चाहते हैं? भाजपा में ऐसे नेताओं की लंबी लिस्ट है। कांग्रेस के कई तो नेता अपने बच्चों को आगे बढ़ाने में जितने सफल हुए हैं उतने भारतीय जनता पार्टी में ईके-दुके ही नेता हैं। ऐसे में इन बयानों से समझा जा सकता है कि भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? इसके पीछे एक ओर दूसरा कारण है कि जो भी उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनेगा वह सीधे मोदी से संवाद स्थापित कर सकेगा। जिसका लाभ उसको निजी स्वार्थ के रूप में सिद्ध होता रहेगा। भाजपा के कुछ ऐसे नेता भी हैं जो लंबे समय से राज्य का मुखिया बनने का तो ख्वाब देखते हैं लेकिन अपनी सरलता के कारण तिगड़म बाज नेताओं के आगे फेल हो जाते हैं। वैसे भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्री पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सबसे ज्यादा बुलबुलआहट भी इन्हीं में हैं और लगातार खेमों में बैठे विधायको से पहले ही अलग-अलग सेटिंगबाजी में लग गए हैं। ऐसी चर्चाएं भाजपा के गलियारों में सुनने को मिल रही हैं?
आश्चर्य की बात यह है कि अभी रिजल्ट आने में दो हफ्ते से भी ज्यादा का समय है ओर उसके बाद भी नेता मंत्री पद की सेटिंग गेटिंग में लग गये। अभी से संघ के नेताओं और दिल्ली दरबार की परिक्रमा भी शुरू कर दी है उस सबसे अलग भाजपा व संघ परिवारों से जुड़ा सामान्य कार्यकर्ता भी अपने नेताओं की ऐसी हरकतों से असहज महसूस कर रहा है जबकि अपने को अनुशासित पार्टी बताने वाली भाजपा में ऐसे षड्यंत्रो से पूर्व में भी नुकसान होते आते हैं? इसका वर्तमान से ज्यादा प्रत्यक्ष उदाहरण कोई हो नहीं सकता कि जबकी टिकट वितरण के समय कांग्रेस पिछले पायदान पर खड़ी हुई दिख रही थी।
चुनाव होने के बाद कांग्रेस सत्ता की दहलीज पर पहुंच रही है। इसमें कोई दो राय नहीं 2०22 में उत्तराखंड की सत्ता से दोनों प्रमुख दल लगभग चार-पाचं कदम दूर ही खड़े दिख रहे हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए जिस प्रकार की चर्चाएं हैं वो भी भाजपा को नुकसान की ओर ले जाती दिखाई दे रही है। भाजपा के कुछ दिग्गजों की कुलबुलाहट युवा उत्तराखंड के मिशन को या कहें मोदी के सपने को खत्म न कर दे? चुनाव से पूर्व पिछले 5 माह में युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस मृत भाजपा को बड़ी सांस देकर जिंदा किया है उसके बाद भी अगर ऐसे तिकड़म बाज नेताओं के हाथ में राज्य की कमान भाजपा देती है तो सुनिश्चित ही भाजपा को लोकसभा चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है? इसके साथ-साथ हरिद्वार में होने वाले जिला पंचायत चुनाव व अगले वर्ष होने वाले नगर निकाय के चुनाव में भी भाजपा इन थके हारे नेताओं के कारण अपना नुकसान न उठाना पड़ जाए।
