चुनाव में धाकड बल्लेबाजी करते रहे सीएम

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में पांच साल तक डबल इंजन की सरकार सत्ता में रही और साढे चार साल का कार्यकाल दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का हिटलरशाही और हवाबाजी के अलावा कुछ नहीं दिखा तो भाजपा हाईकमान ने मात्र छह माह के लिए युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री की कमान सौंपकर उनके सिर पर कांटो भरा ताज पहनाकर उन्हें एक बार फिर राज्य में कमल खिलाने का मिशन सौंपा था। भाजपा हाईकमान के आदेश को धरातल पर उतारने के लिए पुष्कर सिंह धामी छह माह तक सुपरमैन की भूमिका में दिखाई दिये और उन्होंने चुनाव का बिगुल बजते ही अपनी सीट को दांव पर लगाकर उसे आवाम के भरोसे छोडकर पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए वह एक जिले से दूसरे जिले में दौड लगाने के लिए सुपरमैन बने रहे। हैरानी वाली बात है कि हाथ में फैक्चर होने के बावजूद भी जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी ने एक पल भी आराम करने से गुरेज किया और उन्होंने चुनाव के अन्दर जिस तरह से भाजपा के इकबाल को बुलंद कर कांग्रेस को बडी टक्कर दी उसके लिए राज्यभर में पुष्कर सिंह धामी को एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में देखा जा रहा है हालांकि पुष्कर ंिसह धामी के साथ जिस तरह से सरकारी तंत्र के कुछ अफसरों व पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें चुनावी रणभूमि में धोखा देने का चक्रव्यूह रचा उसकी गूंज अब राज्य के गलियारों में धीरे-धीरे उठनी शुरू हो गई हैं?
उल्लेखनीय है कि 2०12 में हुये विधानसभा चुनाव से मात्र सात-आठ माह पूर्व भाजपा हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी को सत्ता में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें चुनाव मैदान में उतारा था और राज्य में भाजपा सरकार बनाने का टास्क दिया था। भुवन चंद खण्डूरी ने राज्य में फिर भाजपा की सत्ता लाने के लिए ऐडी-चोटी का जोर लगाया लेकिन अपनों की ही नजरों में चुभने वाले भुवन चंद खण्डूरी को कोटद्वार विधानसभा में भीतरघात के चलते हरवा दिया गया लेकिन खण्डूरी अपनी पार्टी को सत्ता के काफी करीब लाने में कामयाब हो गये थे उसके बाद यह बहस चली थी कि अगर पार्टी के कुछ नेता भीतरघात न करते तो राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार बनती।
वहीं राज्य में 2०17 से पांच साल डबल इंजन की सरकार सत्ता में रही लेकिन राज्य के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों त्रिवेन्द्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत ने राज्य में सत्ता चलाने का पैमाना राजशाही अंदाज में किया तो दोनो को भाजपा हाईकमान ने सत्ता से बाहर किया और खटीमा से युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को अल्प कार्यकाल के लिए सत्ता सौंपी। पुष्कर सिंह धामी ने मात्र छह माह के भीतर राज्य का हर जिला कई बार नापा और वह एक जिले से दूसरे जिले में हर दूसरे दिन सुपरमैन बनकर छलांग लगाते रहे और विधानसभा चुनाव में अपनी सीट पर मंडराये खतरे को भांपकर भी उन्होंने उसे आवाम के हवाले किया और राज्य की 69 सीटों पर वह हर दिन चुनाव प्रचार करने के लिए आगे आये।
उनके इस हौसले से भाजपा के ही कुछ बडे नेता बेचैन रहे और उनमें यह खलबली भी मची रही कि अगर पुष्कर सिंह धामी राज्य में सत्ता लाने में कामयाब हो गये तो उनकी राजनीति पर ग्रहण लग जायेगा और शायद यही कारण है कि धामी के बढते कदमों को रोकने के लिए भाजपा के अन्दर भीतरघात का बडा खेल खेल दिया गया हालंकि धामी को विश्वास है कि राज्य में एक बार फिर कमल खिलेगा।

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