अपनों की आंखों में खटक रहे पुष्करा चाह रहे चंद दिग्गज

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देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड में जबसे पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बनाया गया तबसे भाजपा के ही कुछ बडे नेताओं के पेट में मरोडे पडते रहे और उनके मन में यह चिंता बनती रही कि अगर पुष्कर सिंह धामी इसी तरह से राज्य में धाकड बल्लेबाजी करते रहे तो उनकी राजनीति पर ग्रहण लग जायेगा। इसी के चलते विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के ही एक पूर्व मुख्यमंत्री समेत कुछ राजनेता इस जुगत में लगे हुये हैं कि अगर चुनाव परिणाम के बाद भाजपा को सरकार बनाने के लिए कुछ सीटों की जरूरत पडी तो वह जोडतोड की राजनीति से सरकार बना लेंगे लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वह ही आसीन होंगे?
उत्तराखंड की सत्ता में पुन: बने रहने की दावों के बीच भारतीय जनता पार्टी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी पर भाजपा के ही कई दिग्गजों ने नजरें गड़ा दी हैं। भाजपा के नेताओं को लगता है कि राज्य की जनता ने एक बार पुन: भाजपा को सत्ता में बने रहने का आशीर्वाद दे दिया है। अपने-अपने दावों के चलते हुए मुख्य भाजपा एवं कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल दलों में जिस प्रकार अभी से सिर फुटव्वल शुरू हो गई है। वह सत्ता के गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बात करें भारतीय जनता पार्टी की सरकार की जिसने पांच साल में तीन मुख्यमंत्री तो बदले लेकिन अंतिम दौर में युवा चेहरे, दो बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी को मुख्यमंत्री बना कर सभी को चौंकाया, ओर अंतिम दौर में धामी की परफॉर्मेंस को आधार मानकर उसके चेहरे पर चुनाव लड़ा। निश्चित तौर पर अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बने रहने में कामयाब होती है तो उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि श्रेय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह को जाता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के तमाम दिग्गजों ने उस समय तो हाईकमान के फैसले को चुनावी मौसम के चलते स्वीकार कर लिया था। लेकिन भाजपा सत्ता में बनी रहती है तो भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को स्वीकारने के मूड में नहीं है? चर्चा तो यहां तक है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र में उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए भी कुछ दिग्गजों ने हथकंडों का प्रयोग किया था? जिसके कारण मुख्यमंत्री के लिए सेफ सीट खटीमा भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पिछले दो बार से इसी विधानसभा से जीत कर आए और इस बार भी तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी विधानसभा से चुनाव लड़ा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि खटीमा के परिणाम भाजपा के विपरीत भी हो सकते हैं क्योंकि कांग्रेस की मजबूत पकड़ और आम आदमी पार्टी का चुनाव लडऩा एवं भाजपा के द्वारा भीतरी घात करना धामी के माथे पर लकीरें डाल रहे हैं? इन सबके बावजूद एक पक्ष वह भी है जो मानता है कि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बने रहने में कामयाब रहेगी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पुन: चुनाव जीत रहे हैं इसके कारण भाजपा के कई दिग्गज अभी से अपने अपने समीकरणों से मुख्यमंत्री कुर्सी कब जाने के लिए दिल्ली दौड़ शुरू कर चुके हैं एक पूर्व मुख्यमंत्री ने तो विधायक को की लामबंदी भी शुरू कर दी है वही एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री ने उन प्रत्याशियों से भी संपर्क किया है जो अन्य दलों के या निर्दलीय जीत रहे हैं इसके अलावा एक सांसद भी दिल्ली दरबार में मजबूत पकड़ बनाए रखे हैं जिससे कि पूरे पांच साल की मुख्यमंत्री की कुर्सी उनको मिल सके ऐसी कई संभावनाओं के बीच उत्तराखंड की राजनीति में कई सवाल खड़े हो रहे हैं राज्य की जनता ने अगर भाजपा को सत्ता में बने रहने का आशीर्वाद दिया है तो उसमें सबसे बड़ी कामयाबी का श्रेय मिलने का हकदार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी है जिस प्रकार से पिछले साढे चार वर्षों में भाजपा पूरी तरह डूब चुकी थी। एक-एक कार्यकर्ता हताशा और निराशा का शिकार हो चुका था। माहौल लगातार विपरीत था। ऐसा लगता था कि भारतीय जनता पार्टी के 1० -12 विधायक पुन: विधानसभा पहुंचने की स्थिति में हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छह महीने के कार्यकाल में अपनी काबिलियत का लोहा राज्य के साथ-साथ देश की युवा राजनीति में भी स्थापित किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कुर्सी को लेकर भाजपा के जो दिग्गज नजरें गड़ाए हैं वह जानते हैं कि अगर भाजपा सत्ता में बनी रहती है और उसकी कुर्सी पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ही पुन: ताजपोशी होती है तो उनका राजनीतिक भविष्य पूरी तरीके से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि एक ओर 45 वर्षीय युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और दूसरी ओर उम्र दराज भाजपा के दिग्गज जो मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए हुए हैं।
हालांकि यह भी सबको इल्म है कि पुष्कर ंिसह धामी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सखा हैं और अगर वह चुनाव जीते और पार्टी भी जीत के पायदान पर आगे बढी तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पुष्कर ंिसह धामी को ही मिलेगी लेकिन इसके बावजूद भी कुछ दिग्गज नेताओं की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर गढ़ गई है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी कई खेमों में बटी दिख रही हैं? जबकि कांग्रेस सीधे-सीधे हरीश रावत एवं प्रीतम सिंह खेमे में फटी हुई है लेकिन कांग्रेसमें अभी हालात सामान्य हैं और कांग्रेस 1० मार्च का इंतजार कर रही है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों का उतावलापन आश्चर्यचकित तरीके का है। हालात इस प्रकार के हैं की उत्तर प्रदेश के बचे हुए चुनाव में भी प्रचार के लिए कोई नेता जाने को तैयार नहीं है। उन्हें लगता है कि उत्तराखंड छोड़ते ही कुर्सी का मौका उनके हाथ से निकल जाएगा। ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सबसे पहले दिल्ली पहुंचकर अपनी किलेबंदी को मजबूत करने में लग गए हैं।

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