प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव में सत्ता की चाबी या तो दुबारा भाजपा के पास आयेगी या फिर पांच साल सत्ता की चाबी कांग्रेस संभालेगी इसको लेकर राज्यवासियों ने पार्टी प्रत्याशियों की जीत-हार को लेकर गुणा-भाग का खेल खेलना शुरू कर रखा है और इस चुनाव में मतदाताओं की खामोशी ने चुनाव लडने वाले हर दिग्गज व आम प्रत्याशी का बीपी बढा रखा है? आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री का चेहरा बने कर्नल अजय कोठियाल का राजनीतिक भविष्य भी ईवीएम में कैद हो गया है और देखने वाली बात यह होगी कि क्या 3ड्ड3द्मह्य=द्मद्ध की जनता उन्हें आशीर्वाद के रूप में अपना मत देने के लिए आगे आये या फिर इलाके की जनता ने उन्हें राजनीति के पहले पायदान पर भी स्वीकार नहीं किया? बहस चल रही है कि आखिरकार क्या इस बार का मतदाता कंफ्यूज था कि उसे कहां मतदान करना है या उसने पहले से ही तय कर रखा था कि चुनाव में उसे किस राजनीतिक दल को अपना मत देना है। विधानसभा चुनाव में जहां सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक प्रतिष्ठा दाव पर लगी हुई है वहीं सम्भवत: आखिरी विधानसभा चुनाव में कूदे कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की जीत व हार पर भी सबकी नजरें लगी हुई हैं। भले ही कांग्रेस व भाजपा राज्य में अपनी सरकार आने के दावे कर रही हो लेकिन इन दावो का सच दस मार्च को ईवीएम से ही निकलेगा और वह ही तय करेगी कि पांच साल सत्ता की चाबी किस राजनीतिक दल के हाथों में रहेगी?
उत्तराखण्ड का बीस साल से इतिहास रहा है कि हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता रहा है लेकिन भाजपा ने इस बार दावा किया था कि बीस साल से चले आ रहे मिथक को वह तोड़ देंगी। चुनाव में प्रचार के लिए आये देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर भाजपा के सभी राष्ट्रीय नेताओं ने राज्य की जनता से यही अपील की कि बीस साल से सत्ता परिवर्तन को लेकर चले आ रहे मिथक को वह इस बार तोडकर एक बार फिर भाजपा की सत्ता में वापसी करवायें। वहीं कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी व राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तराखण्ड में हुई अपनी सभी रैलियों में एक ही हुंकार लगाई कि बेरोजगारी, महंगाई को ध्यान में रखते हुए राज्यवासी कांग्रेस की सरकार सत्ता में लायें। राहुल गांधी ने यहां तक दम भरा था कि राज्य में कांग्रेस की सरकार लायें तो वह राज्य की खुद निगरानी करेंगे। विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस ने एक दूसरे को जमकर निशाने पर लिया और बीते रोज उत्तराखण्ड की सभी सत्तर विधानसभा सीटों पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हो गया लेकिन राज्यवासियों ने यह मतदान किस राजनीतिक दल के पक्ष में किया है यह एक बडा रहस्य बना हुआ है क्योंकि इस बार का मतदाता खामोशी से मतदान करने के लिए मतदान स्थलों पर पहुंचा और काफी संख्या में मतदाताओं ने मतदान स्थल की ओर अपने कदम आगे बढाने से भी गुरेज किया। उत्तराखण्ड के गढवाल व कुमांऊ में जिस अंदाज से मतदान हुआ है वह भाजपा व कांग्रेस के सभी प्रत्याशियों की धडकनें बढ़ा गया। मतदाताओं की खामोशी से इस बात का अंदाजा नहीं लग पा रहा है कि उन्होंने किस राजनीतिक दल पर अपनी आस्था जताते हुए उसके पक्ष में मतदान किया है। मतदाताओं की खामोशी का ही परिणाम है कि भाजपा व कांग्रेस के किसी भी बडे से लेकर छोटे नेता को इस बात का आभास नहीं हो पा रहा है कि चुनाव में उन्हें जीत का आशीर्वाद मिलेगा या फिर जनता की नाराजगी के चलते उन्हें इस बार हार का सामना करना पडेगा? भाजपा व कांग्रेस के सभी बडे-छोटे प्रत्याशियों का भाग्य दस मार्च तक ईवीएम में कैद हो चुका है और मतदाताओं की खामोशी के चलते चुनाव लडने वाले अधिकांश प्रत्याशियों का दस मार्च तक बीपी बढना तय माना जा रहा है? वहीं चुनाव लडने वाला हर प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ अपनी जीत-हार को लेकर गुणा-भाग में जुटा हुआ है लेकिन उनका गुणा-भाग दस मार्च को सही साबित होगा या नहीं यह देखने वाली बात है?
