देहरादून। उत्तरखण्ड विधानसभा चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के बीच टिकट बंटवारे को लेकर काफी जद्दोजहद नजर आई। आखिरी समय तक यह नहीं पता चल पा रहा था कि आखिर किस सीट से किसकों टिकट मिलेगा। भाजपा द्वारा जिस सीट पर अंतिम मोहर लगी वह सीट थी डोईवाला विधानसभा और इस सीट पर जिसके नाम पर मोहर लगी उसने सामान्य लोगों के साथ-साथ भाजपा के कैडर को भी हैरान कर दिया। चर्चाएं उठने लगी कि भले ही सूबे के पूर्व मुखिया ने खुद चुनाव न लडऩे का फैेसला लेकर अपने चहेतों के लिए ‘ड्रीम रूटÓ बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसका प्रमाण डोईवाला सीट से बृज भूषण गैरोला को टिकट मिलने से साफ लग जाता है। बीते साढ़े चार साल में विपक्ष, सत्ता पक्ष की तुलना में भले ही कमजोर नजर आया हो लेकिन पूर्व मुखिया टीएसआर के कारनामों को लेकर विपक्ष सदैव हमलावर नजर आया। यही नहीं विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कई ऐसे प्रमाण भी मीडिया के सामने प्रस्तुत करे जो पूर्व मुखिया को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी नजर आए? माना जा रहा है कि इन्हीं कारनामों की वजह से मौजूदा समय में डोईवाला विधानसभा सीट अब संदिग्ध होती नजर आ रही है? इस सीट पर कई उम्मीदवारों ने अपने भविष्य के लिए दांव खेला है लेकिन सफलता किसके कदम चूमेगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। पूर्व मुखिया के अनुयायी माने जाने वाले व्यक्ति को भाजपा ने मैदान में उतार तो दिया है लेकिन यह कहना मुश्किल है कि पूर्व मुखिया के कारनामों के बावजूद भाजपा प्रत्याशी जीत हासिल कर सके? जानकारों का मत तो यहां तक है कि कहीं सबसे अंतिम में डोईवाला सीट पर अपने पत्ते खोलने का पैंतरा भाजपा को भारी पड़ सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस सीट का ऊंट किस करवट बैठता है।
बता दें कि डोईवाला में भाजपा विधायक प्रत्याशी बृज भूषण गैरोला के चुनाव कार्यालय का विधि विधान से पूजा अर्चना कर चुनाव कार्यालय का उद्घाटन तो कुछ इस प्रकार से किया गया कि मानो जीत लगभग तय ही हो लेकिन अपने शासन में सदैव विवादों में रहने वाले व्यक्ति को बतौर मुख्य अतिथि बनाना यह तो बता ही गया कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संभवत: अपना राजनीतिक बलिदान यूं ही नहीं दिया। इस दौरान अपनी कथित उपलब्धियों के पुल बांधते हुए उन्होंने कहा कि डोईवाला क्षेत्र में भाजपा की सरकार द्वारा विशेष रूप से विकास कार्य किए गए जिनमें सैकडों किलोमीटर सड़कों का जाल बनाना हो और विशेष शिक्षण संस्थानों को डोईवाला में लाना आदि है।
हमेशा से देश के प्रधानमंत्री की प्रसिद्धी को कंधा बनाकर उसपर बंदूक चलाने की प्रथा को उन्होनें यहां भी खत्म नहीं किया और कहने लगे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों में ही देश सुरक्षित है इसलिए उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में एक-एक सीट को जितवा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों को मजबूत करना है। वहीं भाजपा विधायक प्रत्याशी बृजभूषण गैरोला ने भी उनके सुर से सुर मिलाते हुए कहा कि जो विकास कार्य त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वारा किए गए हैं उनको और आगे बढ़ाने का काम उनके द्वारा किया जाएगा। अब इस वक्तव्य को लेकर सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा कौन सा विकास टीएसआर ने डोईवाला में या फिर राज्य में कर दिया जिसको लेकर उनके अनुयायी इतना गुणगान कर रहे है? हैरान करने वाली बात तो यह है कि अगर टीएसआर इतने बड़े विकास पुरूष थे तो भाजपा हाईकमान ने डबल इंजन सरकार के अपने चार साल पूरे होने से ठीक पहले उन्हें सीएम पद से हटाया ही क्यों?
