अब विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगें त्रिवेन्द्र

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देहरादून(संवाददाता)। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय अध्य्क्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कहा कि अब वह चुनाव नहीं लडना चाहते है। ऐसे में सवाल खडे हो रहे है कि क्या त्रिवेन्द्र ंिसंह रावत को इस बात का भय बन गया कि अगर वह चुनाव लडे तो उन्हें कहीं हार का सामना न करना पडे? सोशल मीडिया पर तैर रहे उनके पत्र से यह सवाल भी खडे हो रहे है कि अगर त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने चार साल तक अपने राज में समूचे उत्तराखंड का विकास किया तो फिर आज उन्होंने आखिरी समय में चुनाव लडने से क्यों अपने कदम पीछे खींच लिये?
यहां प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कहा है कि अब चुनाव नही लडऩा चाहते है और उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताया है।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे कई बार कई अहम मौके दिये और त्रिवेंद्र सिंह रावत की मांग मौजूदा सीएम के नेतृत्व में दोबारा सरकार बनेगी ओर इसी प्रयास को में साकार करना चाहता हूँ। उन्होंने पत्र में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भरपूर सहयोग व आशीर्वाद मिला और प्रदेशवासियों का भी आशीर्वाद मिला और विशेषकर डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के वासियों का ऋण तो कभी चुकाया ही नहीं जा सकता है और क्षेत्रवासियों को भी धन्यवाद दिया और कहा कि डोईवाला विधानसभा वासियों का आशीर्वाद आगे भी पार्टी को मिलता रहेगा ऐसा मेरा विश्वास है।
पत्र में उन्होंने कहा कि वह भाजपा कार्यकर्ता ओर राष्ट्रीय सचिव, झारखंड प्रभारी, उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव 2०14 में सह प्रभारी की जिम्मेदारी निभाई है और महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ, हिमाचल प्रदेश में चुनाव अभियानों में काम किया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि वर्तमान में उत्तराखंड राज्य में विधानसभा चुनाव हो रहे है और युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पुन: सरकार बने उसके लिए पूरा समय लगाना चाहते है और उनके चुनाव न लडने के अनुरोध को स्वीकार किया जाये ताक मैे अपने संपूर्ण प्रयास सरकार बनाने के लिए लगा सकूं। वहीं दूसरी ओर त्रिवेंद्र के इस पत्र के कई सियासी मायने निकाले जा रहे है कि आखिरकार अंतिम समय में त्रिवेन्द्र सिंह रावत चुनाव लडऩे से पीछे क्यों हट रहे है।

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