गढ़वाल विश्वविद्यालय की शिक्षा पर खतरा: एसएफआई

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड राज्य कमेटी के अध्यक्ष नितिन मलेठा ने कहा है कि गढ़वाल विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं को ऑनलाइन संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कक्षाओं से गढ़वाल विश्वविद्यालय की शिक्षा पर खतरा है। बीते दो वर्षों से लॉकडाउन की मार झेल रहे गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र एक बार फिर से कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से लेने को मजबूर हैं।
यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि गढ़वाल विश्वविद्यालय में अनेकों काबिल प्रोफेसरों से भरा हुआ है और इस बात में कोई शक की गुंजाइश नहीं है कि तमाम प्रोफेसर और फैकल्टी ऑनलाइन माध्यम से भी अपना शत प्रतिशत योगदान देंगे पर चिंताजनक बात यह है कि क्या ऑनलाइन माध्यम से ज्ञान का प्रसार उस असर के साथ हो पाएगा जिस असर के साथ ऑॅफलाइन मोड में होता था। उन्होंने कहा कि साथ ही हिमालयी राज्य उत्तराखण्ड की विभिन्न प्रकार की विषमतायें हैं, जिसमें नेटवर्क और मौसम की मार से सबका क्लास को ले पाना असंभव है। बीते वर्ष 8० फीसदी छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाएं अटेंड नहीं की है और बाकि 2० फीसदी छात्र जो कक्षा अटेंड कर पाए वे नेट पैक की कीमत, घर के काम और इंटरनेट के भटकाव के कारण सिर्फ हाजिरी देने के लिए एप्प खोलकर बैठे रहे। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा सिर्फ नाम मात्र की शिक्षा और इसका प्रयोजन मात्र हाजिरी लगाना रह गया है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट डेटा पैक के बढ़े हुए दाम छात्रों पर बोझ बनकर टूट पड़े हैं, छात्र कॉल करने के लिए पैक नहीं जुटा पा रहे हैं, और कई बार नेटवर्क और इंटरनेट पैक के अभाव में व्हाट्सएप्प के मैसेज के लिए भी वाई फाई हॉटस्पॉट का सहारा लेना पड़ रहा है, ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए बिल्कुल भी प्रासंगिक नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 84 दिन के नेट पैक की कीमत 8०० रुपये से ऊपर जा पहुंची है, 28 दिन का नेट पैक कीमत में 3०० के पार हो चुका है। उन्होंने कहा कि महीना खत्म होने से पहले डेटा पैक खत्म हो रहे हैं। ऑनलाइन शिक्षा के लिए 1.5 हइ भी पर्याप्त नहीं रहता और हर रोज एक्स्ट्रा पैक डलवाने की जरूरत पड़ जाती है। उत्तराखण्ड का हर छात्र आर्थिक रूप इतना मजबूत नहीं है कि इतना खर्च वहन कर सके। उत्तराखण्ड के भीतर का हर छात्र इस बोझ से झूज रहा है। ऐसे में छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा में झोंकना उनको शिक्षा से विमुख करना है।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा के लिए कोविड को कारण बताया जा रहा है पर क्या कोविड सिर्फ छात्रों के लिए है। उन्होंने कहा कि क्या कोविड राजनैतिक रैलीयों में जाने वाले लोगों को संक्रमित नहीं करता या फिर भीड़ भाड़ से भरी सभाओं और बेधड़क चलते बजारों में जाने वाले लोगों संक्रमित नहीं करता है। उन्होंने कहा कि क्या कोविड नितान्त चलते शराब के ठेकों और शादी ब्याहों में पहुँचे लोगों को संक्रमित नहीं करता और जब सब कुछ चल रहा है तो जबरन सिर्फ ऑफलाइन कक्षाओं को बंद करना बिल्कुल सही नहीं है। उन्होंने कहा कि एसओपी का पालन करते हुए गढ़वाल विश्वविद्यालय में ऑफलाइन कक्षाएं बिल्कुल चलाई जा सकती हैं। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया उत्तराखण्ड राज्य कमेटी यह मांग है कि कोविड महामारी से बचाव के सारे तरीके अपनाते हुए तथा एसओपी का पालन करते हुए ऑफलाइन कक्षाओं को अविलंब शुरू किया जाए।

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