सेनापति बन अकेले मैदान में उतरे पुष्कर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में पुष्कर सिंह धामी को छह माह के लिए भाजपा हाईकमान ने सत्ता क्या सौंपी भाजपा के बडे-बडे दिग्गज भी पुष्कर को पर्दे के पीछे से निशाने पर लेने का चक्रव्यूह रचने लगे? हैरानी वाली बात है कि उत्तराखण्ड में कहने को भाजपा के पांच सांसद हैं लेकिन वह पुष्कर के साथ चुनावी रणभूमि में उनके कवच बनते हुए अभी तक तो खुले रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं जिसके चलते पुष्कर सिंह धामी खुद सेनापति बनकर चुनावी रणभूमि में अकेले कांग्रेस व आम आदमी पार्टी को ललकारते हुए नजर आ रहे हैं? गजब की बात है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तो पुष्कर सिंह धामी को वचन दे चुके हैं कि वह उत्तराखण्ड के विधानसभा चुनाव में उनके सारथी बनकर रहेंगे लेकिन भाजपा के सभी पांचो सांसद हरीश रावत द्वारा मुख्यमंत्री पर लगाये जा रहे आरोपों की झडी पर क्यों पलटवार करने के लिए आगे आने का साहस नहीं दिखा रहे यह कई सवालों को जन्म दे रहा है और यह बात भी साफ हो रही है कि भाजपा में पुष्कर सिंह धामी के बढते वजूद ने पार्टी के चंद बडे-बडे दिग्गज नेताओं के मुख्यमंत्री बनने के सपनों पर ग्रहण लगा रखा है?
उत्तराखण्ड में पांच साल तक डबल इंजन की सरकार सत्ता में रही और इस दौरान भाजपा हाईकमान को अपने दो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना पडा क्योंकि उनके शाासनकाल से राज्यवासियों के मन में डबल इंजन की सरकार को लेकर एक बडी नाराजगी चली आ रही थी उसी नाराजगी को पाटने के लिए खटीमा से युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को भाजपा हाईकमान ने राज्य की सत्ता सौंपकर उन्हें विधानसभा चुनाव में फिर से राज्य में कमल खिलाने का विजन सौंपा। मात्र छह माह में कैसे राज्यवासियों के मन को बदलेंगे यह विचार जरूर पुष्कर सिंह धामी के मन में सत्ता की कुर्सी पर बैठने के दौरान आया होगा लेकिन उन्होंने एक योद्धा की तरह इस चुनौती को स्वीकार करके मात्र छह माह के भीतर ही जिस तरह से देश के प्रधानमंत्री से लेकर केन्द्रीय नेताओं का दिल अपनी स्वच्छ राजनीति से जीता उसने उन बडे-बडे भाजपा नेताओं में एक बडी बेचैनी पैदा कर दी जो राज्य बनने के बाद से ही उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनने का सपना देखते आ रहे हैं। पुष्कर सिंह धामी ने राजनीतिक पिच पर जिस तरह से एक सेनापति की तरह राज्य में विपक्ष से युद्ध करना शुरू किया उससे कांग्रेस व आम आदमी पार्टी पुष्कर सिंह धामी के बढते कदमों से बेचैन हो उठी और वह लगातार पुष्कर सिंह धामी पर आरोपों की बौछार करने में लगी हुई है लेकिन पुष्कर सिंह धामी भी राजनीतिक पिच पर एक बडे सेनापति की तरह विपक्ष को अकेले ही मोर्चे पर ढेर करने में जुटे हुये हैं।

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