सीएम साहबः अकूत सम्पत्तियों वाले नेता-अफसरों को बेनकाब करने पर ही बनेगा आदर्श राज्य
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में सत्ता संभालने वाली हर सरकार राज्यवासियों के सामने भौंपू बजाती आ रही है कि भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बक्शा नहीं जायेगा लेकिन सरकारों के यह भौंपू सिर्फ एक शिगुफे से ज्यादा कुछ नजर नहीं आया। उत्तराखण्ड में साढे चार साल तक डबल इंजन की सरकार जीरो टॉलरेंस पर सरकार चलाने की पिपनी बजाती रही लेकिन उसके राज्य में जिस तरह से खुलकर कुछ अफसरांे व नेताओं ने भ्रष्टाचार की मलाई चाट-चाटकर अपना खजाना भरा उस पर कभी भी राज्य की विजिलेंस की नजर आखिर क्यों नहीं गई यह हैरान करने वाली बात है? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने राज्य को आदर्श राज्य बनाने का स्लोगन दिया है लेकिन आवाम का साफ कहना है कि जब तक सीएम साहब अकूत सम्पत्तियों वाले भ्रष्ट नेताओं व अफसरों को बेनकाब कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचाओगे तब तक उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने का सपना सिर्फ खुली आंख से सपने देखने जैसा ही होगा?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पांच माह से राज्य के अन्दर स्वच्छता के साथ सरकार चला रहे हैं लेकिन आज भी राज्य के अन्दर दर्जनों अफसर व कुछ नेता भ्रष्टाचार के दलदल में खूब गोते लगा रहे हैं और वह सरकार की छवि को धूमिल करने का तांडव मचाये हुये हैं? उत्तराखण्ड से भ्रष्टाचार के दानव का अंत करने का सपना तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देख रहे हैं लेकिन अभी भी पर्दे के पीछे से भ्रष्ट नेताओं व अफसरों का गठजोड़ खुलेआम भ्रष्टाचार की मलाई चाटने में जुटे हुये हैं? गजब की बात तो यह है कि स्वच्छ प्रशासन व ईमानदारी से सरकार चला रहे पुष्कर सिंह धामी को अभी भी सत्ता में शामिल चंद राजनेता धोखा देने का प्रपंच रच रहे हैं और उसी के चलते वह जिस तरह से मिठाई के डिब्बे लेकर भ्रष्टाचार का खेल बडे नाटकीय ढंग से खेल रहे हैं वह उत्तराखण्ड के लिए एक विष से ज्यादा कुछ नहीं हैै?
भ्रष्ट अफसरों को कब बर्खास्त करेगी सरकार?
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार की परिभाषा हैरान करने वाली है। सवाल उठता है कि जब कोई अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में वर्षों जेल की सलाखांे के पीछे कैद रहा तो उसे बहाल करने के बजाए सरकार के सिस्टम ने उसे बर्खास्त करने की दिशा में अपने कदम क्यों आगे नहीं बढाये? अगर भ्रष्टाचार की सजा जेल और उसके बाद फिर अफसर की बहाली है तो भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी लडाई एक नाटक से ज्यादा कुछ नहीं?
