सख्त भू कानून लागू करने के लिए निकाला सांस्कृतिक जुलूस

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नगर संवाददाता
देहरादून। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उत्तराखंड महिला मंच अपना 28वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है और इस अवसर पर महिला मंच के द्वारा भू कानून संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सभी घटक शक्तियों व व्यक्तियों के साथ सहयोग से एक उत्तराखण्डी अस्मिता ,पहचान, सम्मान व संस्कृति बचाने के लिए और इसके लिए उत्तराखंड की जमीनें उत्तराखंड वासियों के हाथों बची रह सकें व सख्त भू कानून लागू करने के लिए सांस्कृतिक जुलूस निकाला गया और इस अवसर पर महिलायें पारम्परिक वेशभूषा में पहुंची और इस दौरान जमकर नृत्य किया।
यहां महिला मंच एवं भू कानून संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले महिलायें पारम्परिक वेशभूषा में गांधी पार्क के बाहर पहुंची और उत्तराखण्डी अस्मिता ,पहचान, सम्मान व संस्कृति बचाने के लिए और इसके लिए उत्तराखंड की जमीनें उत्तराखंड वासियों के हाथों बची रह सकें, इसे केंद्रित करते हुए यह सांस्कृतिक जुलूस गांधी पार्क से शुरू हो कर विभिन्न मार्गों से होते हुए शहीद स्थल पर समाप्त हुआ। इस अवसर पर महिलायें पारम्परिक वेशभूषा में नृत्य करती हुई चल रही थी और जो एक आकर्षण का केन्द्र रहा।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राज्य में हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सशक्त भू कानून बनाये जाने व मूल निवास की आवश्यकता है लेकिन शीतकालीन सत्र में सरकार ने सख्त भू कानून लागू करने के लिए किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया है जो चिंताजनक है। इस अवसर पर महिला मंच की प्रदेश संयोजक कमला पंत ने कहा है कि राज्य में एक सख्त भू कानून की आवश्यकता है लेकिन अभी तक राज्य सरकार इस ओर ठोस पहल नहीं कर पाई है जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बाहरी प्रदेशों के लोगों ने यहां पर आकर अपनी संपत्ति जोड़ ली है और राज्यवासियों को किसी भी प्रकार का कोई लाभ नहीं मिल पाया है। इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि आज राज्य को एक सख्त भू कानून की आवश्यकता है और जब तक धारा 371 को यहां पर लागू नहीं किया जाता तब तक जमीनों की खरीद फरोख्त चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार से राज्य आन्दोलनकारियो के 1० प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पर मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी से सिफारिश करने का निवेदन किया साथ ही उत्तराखण्ड राजभवन ने पिछले छह वर्षो से लम्बित एक्ट है और इस ओर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही आज तक नहीं हो पाई है और आंदोलनकारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है जिससे आंदोलनकारियों में रोष बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के शासनकाल में भू-कानून अध्यादेश को समाप्त करने, सशक्त भू कानून व मूल निवास पर मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी से कार्य करने पर सिफारिश की बात की लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। जो चिंता का विषय है। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। इस अवसर पर कमला पंत, निर्मला बिष्ट, प्रदीप कुकरेती सहित अनेकों महिलायें आदि शामिल रहे।

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