उम्मीदवारों की सूची में भी बाजी मारंेगे धामी

0
133

प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को फ्री-हैंड कर रखा है और इसी के चलते पुष्कर ंिसह धामी राज्य में भर्तियों से लेकर बडी-बडी विकास योजनाओं को हरी झंडी देकर आवाम को संदेश दे रहे हैं कि राज्यवासियों के सपनों को पूरा करने के लिए डबल इंजन सरकार तेजी के साथ विकास को आगे बढा रही है। विधानसभा चुनाव की आचार-संहिता लगने में मात्र कुछ दिन शेष रह गये हैं जिसको देखते हुए उम्मीद दिखाई दे रही है कि पुष्कर सिंह धामी अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी कर कांग्रेस से पहले बाजी मारेंगे। पुष्कर सिंह धामी प्रत्याशियों की सूची इसलिए जल्द घोषित करना चाहते हैं जिससे कि चुनाव लडने की लालसा रखने वाले पार्टी नेता अगर बगावत की राह पर चलने के लिए आगे आये तो भाजपा कुनबा उनकी नाराजगी दूर कर उन्हें पार्टी प्रत्याशी के लिए विधानसभा चुनाव में काम करने के लिए मना सके। पुष्कर सिंह धामी विधानसभा चुनाव को गम्भीरता के साथ लडने के लिए रोड-मेप तैयार कर चुके हैं और भाजपा कार्यकर्ताओं में जिस तरह से वह आये दिन बडा जोश भरने के मिशन में आगे बढते हुए दिखाई दे रहे हैं उसी का परिणाम है कि भाजपा की हर रैली में पार्टी कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड रहा है और उन्हीं के सहारे पुष्कर एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार लाने का जज्बा दिखा रहे हैं।
उत्तराखण्ड में साढे चार साल तक भाजपा के दो पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व तीरथ सिंह रावत ने राजपाठ संभाला लेकिन उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सपनों का उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में कभी कोई बडी पहल नहीं की और राज्य में चार साल तक सत्ता चलाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत हिटलर अंदाज में सत्ता चलाते रहे और उनकी सत्ता पर जिसने भी उंगली उठाने के लिए अपने कदम आगे बढाये उसे त्रिवेन्द्र रावत के इशारे पर काम करने वाले चंद पुलिस अफसरों ने उनके खिलाफ फर्जी मुकदमें कायम कर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर खुला संदेश दे रखा था कि राज्य के अन्दर अगर किसी ने भी त्रिवेन्द्र रावत के शासनकाल में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटालों के खिलाफ आवाज उठाई तो उन पर कानूनी शिंकजा कस दिया जायेगा। त्रिवेन्द्र शासनकाल को देखकर तो राज्यवासियों को यह आभास होता था कि उत्तराखण्ड में लोकतंत्र नाम की कोई चीज है भी या नहीं? त्रिवेन्द्र रावत के इशारे पर राजधानी के पूर्व पुलिस कप्तान अरूण मोहन जोशी ने जिस हिटलरशाही रूप में जिला चलाया और सरकार के इशारे पर फर्जी राजद्रोह जैसे मुकदमें लिखने में भी उन्होंने कोई देरी नहीं लगाई उसी का परिणाम है कि राज्यवासियों के मन में डबल इंजन सरकार को लेकर बडी नाराजगी पनप गई थी जिसे भांपकर भाजपा हाईकमान ने त्रिवेन्द्र रावत को हटाकर तीरथ सिंह रावत को सत्ता सौंपी लेकिन उन्होंने भी अपनी वाणी से जिस तरह से पार्टी की जगहसाई देशभर में कराई उससे भाजपा हाईकमान को इल्म हो गया था कि तीरथ सिंह रावत भी राजनीति में फिस्ड्डी हैं और इसी के चलते खटीमा से युवा विधायक पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री बनाकर सभी बडे भाजपा नेताओं को हैरानी में डाल दिया था। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सत्ता चलाने का आशीर्वाद लेकर पुष्कर सिंह धामी ने जिस सौम्य अंदाज से सरकार चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये उसने विपक्ष की नींद उडाकर रख दी और जो कांग्रेस साढे चार साल तक डबल इंजन सरकार में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटालों पर चुप्पी साधकर रखती थी वह अचानक पुष्कर सिंह धामी को घेरने के लिए आगे आ गई। हैरानी वाली बात है कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तो पुष्कर सिंह धामी की राजनीतिक पारी से इतने बेचैन है कि वह उन पर कोई भी अनाप-शनाप आरोप लगाने में देरी नहीं कर रहे हैं जबकि हकीकत में उनके पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे वह पुष्कर ंिसह धामी पर प्रमाण के साथ आरोप लगाने का साहस दिखा पायें। पुष्कर सिंह धामी कांग्रेस नेताओं के आरोपों को हवा में उडाते हुए पार्टी कार्यकर्ता व नेताओं में विधानसभा चुनाव को लेकर एक बडा जोश भरकर उन्हें 2०22 में एक बार फिर राज्य के अन्दर डबल इंजन की सरकार लाने का वचन ले रहे हैं और तो और छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं को भी जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी अपने सीने से लगाकर उसका हौसला बुलंद कर रहे हैं उसी का नतीजा है कि पुष्कर सिंह धामी ने 2०22 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की ओर से उतरने वाले उम्मीदवारों की सूची को कांग्रेस से पहले जारी करने का सारा खाका तैयार कर लिया है और वह एक बार फिर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की जल्द से जल्द सूची जारी कर कांग्रेस पर एक बडा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए आगे आ सकते हैं।

LEAVE A REPLY