देहरादून(संवाददाता)। नर्सिंग अभ्यर्थियों ने सरकार द्वारा परीक्षाएं न कराने के विरोध में विधानसभा कूच किया और नारेबाजी के बीच प्रदर्शन किया और इस दौरान पुलिस ने सभी को रिस्पना पुल के पास बैरीकैडिंग लगाकर रोक लिया और इस बीच पुलिस व अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये।
इस अवसर पर प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व पूर्व दर्जाधारी राज्यमंत्री मनीष कुमार व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नवीन जोशी ने किया और प्रदर्शनकारियों ने सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और परीक्षा जल्दी कराने की मांग को लेकर विधानसभा कूच किया और इस दौरान पुलिस ने सभी को रिस्पना पुल के पास बैरीकैडिंग लगाकर रोक लिया और इस बीच पुलिस व अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई और बाद में सभी वहीं धरने पर बैठ गये। इस अवसर पर अभ्यर्थियों ने कहा कि एक वर्ष पूर्व उत्तराखण्ड में नर्सिंग अधिकारी के 2621 पदों के लिए आवदेन मांगे गये थे, जिसमें लगभग 1० हजार से 12 हजार अभ्यर्थिा द्वारा परीक्षा शुल्क 8०० रुपये जमा कर नर्सिंग परीक्षा हेतु आवेदन किया गया था। यह नर्सिंग भर्ती संशोधित नियमावली 2०19-2० के द्वारा लिखित परीक्षा के आधार पर पूर्ण कराया जाना निर्धारित हुआ था। उनका कहना है कि उक्त नियमावली में लिखित सभी प्रकार की शर्तें जिसमें लिखित परीक्षा के पाठ्यक्रम में जनरल नर्सिंग डिप्लोमा स्तर प्रश्न तथा सामान्य ज्ञान, सामान्य हिन्दी, राज्य व राजधानी आदि के बारे में विवरण दिया गया था। उनका कहना है कि सामान्य जाति के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक लाना निर्धारित था। उनका कहना है कि इस भर्ती की लिखित परीक्षा के लिए तीन बार प्रवेश पत्र भी जारी किये गये थे, लेकिन बार-बार अपरिहार्य कारण बताकर सरकार द्वारा लिखित परीक्षा स्थगित की गई, किंतु कुछ नर्सिंग अभ्यर्थियों द्वारा निजी हित के लिये स्वास्थ्य मंत्री जी पर पर दबाव बनाकर नियमावली में संसोधन कर लिखित परीक्षा के स्थान पर वरिष्ठता के आधार से चयन की प्रक्रिया को अपनाने हेतु दबाव बनाया गया जिसके फलस्वरूप माननीय स्वास्थ्य मंत्री द्वार इस भर्ती प्रक्रिया को वरिष्ठता के आधार पर किये जाने के निर्देश जारी किये गये हैं।
उनका कहना है कि नियमावली पूर्ण रूप से साफ-सुथरी व सुसंगत तरीके से नर्सिंग अभ्यर्थियों के भविष्य तथा उत्तराखण्ड राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था तथा भौगौलिक परिस्थिति को मध्यनजर रखते हुये अन्य राज्यों व केन्द्र सरकार की नर्सिंग नियमावली का अध्ययन कर बनायी गई गयी है। सम्पूर्ण देश में नर्सिंग अधिकारी व स्टाफ नर्स का चयन लिखित परीक्षा के आधार पर ही होता है। उनका कहना है कि सम्पूर्ण प्रदेश के नर्सिंग अभ्यर्थी जो पिछडे वर्ग, अनुसूचित जाति, जनजाति आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग तथा अन्य उपवर्ग के अभ्यर्थी जिन्होंने 2०16 से 2०21 के मध्य नर्सिंग डिग्री व डिप्लोमा पास की तथा निजी तथा गैर सरकारी संस्था स्टाफ नर्स की सेवा के साथ-साथ पिछले दो तीन वर्षों से लिखित परीक्षा की तैयारी भी कर र कोविड-19 के समय भी इनके द्वारा सेवा दी गई और अब यदि अंतिम समय में नियमावाली सशोधित की गई। इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया और कार्यवाही करने की मांग की गई। इस अवसर पर विशंभर दयाल,हिमानी, अंकुर तिवारी, रजत कोहली, हिमांशु, सीमा , सुधा, गौतम सहित अनेकों नर्सिंग के अभ्यर्थी शामिल रहे।
