सखा पुष्कर को पीएम मोदी ने दिया गिफ्ट

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किरण शर्मा
देहरादून। पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सम्भवत: अपना राजनीतिक गुरु मान लिया है और यही कारण है कि वह उनके बताये पदचिन्हों पर चलते हुए राज्य में दुबारा भाजपा को प्रचंड बहुमत की सरकार दिलाने के मिशन में रात-दिन पहाड से लेकर मैदान का सफर तय कर रहे हैं और हर दुखियारे का दुख हरने के लिए वह आगे आते जा रहे हैं जिससे कांग्रेस के अन्दर एक बडी बेचैनी है और वह यह समझ ही नहीं पा रहे कि आखिरकार पुष्कर ंिसह धामी की काठ कैसे की जाये जिससे कि 2०22 के विधानसभा चुनाव में उन्हें घेरने के लिए वह आवाम के बीच जा सके। चार माह के दौरान पुष्कर ंिसह धामी ने जिस तरह से स्वच्छ प्रशासन के तहत सत्ता चलाने के लिए अपने विजन को राज्य की जनता के सामने रखा है उससे राज्य की जनता भी अब उनकी कायल होने लगी है और यही कारण है कि चाय की दुकान से लेकर हर छोटे बडे इलाके में पुष्कर ंिसंह धामी के सत्ता चलाने के अंदाज को सराहा जा रहा है। उत्तराखण्ड के अन्दर सत्ता चला रहे पुष्कर सिंह धामी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना सखा बना रखा है और अपने सखा को 2०22 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उनकी ताजपोशी के लिए मोदी ने आज गुरुपर्व पर अपने अजीज बन चुके सखा पुष्कर सिंह धामी को गिफ्ट के रूप में कृषि बिल वापस लेकर जिस तरह से उन्हें एक नई ऊर्जा देने का काम किया है उससे अब तराई व मैदानी क्षेत्रों में भाजपा के हौसले बुलंद होते हुए जरूर दिखाई देंगे जिससे विपक्ष की नींद उडी हुई दिखाई दे रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों कृषि कानून बिलों को वापस लेने का ऐलान किया तो उससे पुष्कर सिंह धामी को एक बडी ऊर्जा मिल गई क्योंकि कृषि कानून को लेकर किसानों ने बडी नाराजगी देखने को मिल रही थी और तराई व मैदानी जनपदों में किसानों के उग्र आंदोलन को देखते हुए पुष्कर सिंह धामी के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थी जिसके चलते वह बार-बार मैदानी व तराई क्षेत्रों में दौरे कर रहे थे। अब यह बिल वापस होने से पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड के अन्दर एक नई ऊर्जा के साथ चुनावी अभियान को आगे बढायेंगे और उनके इस मिशन से वह एक पॉवरफुल नेता के रूप में भी राज्यवासियों को दिखाई देंगे इसमें कोई शंका नजर नहीं आती। उत्तराखण्ड में तीसरी बार भाजपा हाईकमान ने सत्ता परिवर्तन किया और मात्र माह के लिए उसने राज्य के युवा विधायक पुष्कर ंिसह धामी पर एक बडा दाव खेलते हुए उन्हें राज्य की कमान सौंपकर 2०22 में एक बार फिर भाजपा की सत्ता वापसी लाने का उन्हें टास्क सौंपा। भाजपा हाईकामन व देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुरूमंत्र को धारण कर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धुंआधार राजनीतिक पारी की शुरूआत की और उनकी शुरूआत उस 2०-2० मैच की तरह दिखाई दी जिसमें हर बॉल पर बल्लेबाज को बडे रन बनाने होते हैं। मात्र चार माह के भीतर पुष्कर ंिसह धामी ने राज्यवासियों का दिल जीतकर उनके मन में भाजपा को लेकर चली आ रही नाराजगी को खत्म करने का जो मिशन चलाया उसमें वह सफल होते दिखाई दिये और राज्य की जनता इसलिए भी पुष्कर सिंह धामी पर अपना विश्वास बना बैठी कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुष्कर सिंह धामी की सत्ता चलाने की स्टाइल को देखते हुए उन्हें अपना मित्र कहकर उनकी पीठ पर अपना हाथ यह कहकर रखा कि वह उनके साथ हैं। पुष्कर सिंह धामी को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का खुला आर्शीवाद उनके लिए एक बडा अभयदान बन गया और यही कारण है कि वह खुलकर फैसले कर रहे हैं और राज्यवासियों के दिलों में दिखाई दे रहे दर्द को जिस तरह से मिटाने के मिशन में हर दिन आगे बढते जा रहे हैं वह कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है? पुष्कर सिंह धामी की सफलता का असली राज उनके साथ तीन ईमानदार अधिकारियों का होना माना जा रहा है जो कि भ्रष्टाचार, घोटाले व अन्याय के खिलाफ हमेशा अपनी आवाज बुलंद करने से कभी पीछे नहीं हटते और इसी का परिणाम है कि जनपदों में अब स्वच्छ प्रशासन देखने को मिल रहा है और जो अफसर हमेशा यह सोच बनाकर रखते थे कि वह जनपदों में रहने वाले लोगों के भाग्यविधाता हैं और उन पर किसी की कोई नजर नहीं रहती। पुष्कर ंिसह धामी को जबसे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का साथ मिला है तो उससे पुष्कर सिंह धामी अब उत्तराखण्ड में हर बडा फैसला लेने में तिनकाभर भी देर नहीं कर रहे और मात्र चार माह के भीतर उन्होंने राज्यहित में लिये बडे-बडे फैसले ने यह साबित कर दिया है कि वह नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करने के लिए उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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