देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। उत्तराखण्ड अब बाइसवें साल में प्रवेश कर गया लेकिन आज तक खनन माफियाओं पर किसी भी सरकार ने नकेल लगाने के लिए कोई बडी पहल नहीं की? सवाल उठ रहा है कि आखिरकार अवैध खनन करने वालों के खिलाफ जिलों की पुलिस चोरी के मुकदमें दर्ज करने के लिए क्यों आगे नहीं आती? हमेशा यह बहस चलती है कि सरकार की नदियों का सीना आखिर कब तक माफिया सिंडिकेट चीरते रहेंगे? खनन व क्रेशर के पट्टे देने से सरकार को राजस्व मिलता है और उससे हजारों लोगों को काम भी मिल जाता है जिससे उनके परिवार का पालन पोषण होता है इसलिए खनन के पट्टे व क्रेशरों पर उंगली उठाना कांग्रेस पर ही सवालिया निशान लगा रहा है कि क्या उनके राज में किसी को सरकार ने खनन व क्रेशर के पट्टे नहीं दिये थे? अब अगर भाजपा सरकार ने किसी को खनन या क्रेशर का पट्टा दिया भी हो तो उसमें कांग्रेस को इतना हो-हल्ला मचाने की क्या जरूरत आन पडी है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की सभी के शासनकाल में खनन माफियाओं का सिंडिकेट सिस्टम पर हावी रहा है जिससे सवाल खडे होते रहे हैं कि आखिरकार सिस्टम ऐसे खनन माफियाओं के सिंडिकेट से क्यों डरा और सहमा रहता है जो आये दिन राज्य की नदियों का सीना चीरने के लिए आगे आते हैं? भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के शासनकाल में उनके ही कुछ करीबियों पर राज्य की कुछ नदियों से अवैध खनन करने के खुले आरोप लगे और तो और एक रिश्तेदार का खनन को लेकर स्टिंग भी हुआ था और इस स्टिंग से उत्तराखण्ड में बडा भूचाल मचा था क्योंकि स्टिंग में साफ दिखाई दे रहा था कि किस तरह से त्रिवेन्द्र रावत का एक रिश्तेदार खनन को लेकर अपनी पावर का बखान कर रहा था।
उत्तराखण्ड में अब पुष्कर ंिसह धामी की सरकार है और उन्होंने माफियाओं पर नकेल लगाने के लिए ऐलान भी कर रखा है लेकिन कुछ जिलों का सरकारी सिस्टम खनन माफियाओं पर कार्यवाही करने के लिए आगे आने का इरादा ही नहीं दिखाता जिसके चलते खनन माफिया खुलकर नदियों का सीना चीर रहे हैं ऐसे मे ंमुख्यमंत्री को साफ संदेश देना चाहिए कि जो भी राज्य की नदियों में अवैध खनन करता हुआ पाया जाये उसके खिलाफ खनन चोरी के मुकदमें दर्ज किये जायें जिससे कि खनन माफियाओं के सिंडिकेट को आभास हो कि अब पुष्कर राज में उनका माफियापन नहीं चलेगा।
