सरकार तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा करेगी शांत!

0
141

सम्भावनाः देवस्थानम बोर्ड भंग नही होगा ‘संसोधन’
धारा बाइस में किया गया परिवर्तन मिलेगा रोजगार
गैरसैण में होने वाले सत्र में संसोधित बिल लाने की तैयारी
चंद्र प्रकाश बुड़ाकोटी
देहरादून। त्रिवेन्द्र शासनकाल में बनाये गये देवस्थानम बोर्ड ने सरकार की नींद उडा रखी है और जिस तरह से तीर्थ पुरोहित बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर पिछले दो साल से आन्दोलन कर रहे हैं और वह अपनी नाराजगी खुलकर दिखाने लगे तो उससे पुष्कर सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को लेकर एक बडा मंथन करना शुरू किया और इस बोर्ड को लेकर भविष्य में क्या रणनीति बनाई जाये इसको लेकर पुष्कर धामी गम्भीर दिखाई दिये और चर्चा है कि गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र में देवस्थानम बोर्ड में नये संशोधन कर तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा शंात करने की मुहिम में आगे बढते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह भी सम्भावना है कि बोर्ड में संशोधन के सहारे बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का भी खाका तैयार किया गया है इसलिए अब सबकी नजरें विधानसभा सत्र पर लगी हुई है और ऐसी भी चर्चाएं हैं कि सरकार देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के बजाए उसमें संशोधन करने का खाका तैयार कर रही है जिससे कि यह संदेश न जाये कि भाजपा के ही एक पूर्व मुख्यमंत्री ने देवस्थानम बोर्ड का गठन किया तो दूसरे मुख्यमंत्री ने उस बोर्ड को भंग कर दिया? इसलिए ऐसा रास्ता तैयार किया जा रहा है जिससे कि पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा बनाया गया बोर्ड भी भंग न हो और तीर्थ पुरोहितों के हक-हकूक की भी रक्षा हो सके।
उतराखड में देस्थानम बोर्ड को लेकर लगातार पंडा समाज का विरोध झेल रही सरकार अब बोर्ड में कुछ अपतियो पर संसोधन करने जा रही है। जिस तरह से शासन तैयारी कर रहा है उससे साफ है कि अब देवस्थानम बोर्ड भंग नही होगा सिर्फ संसोधन होगा। और गैरसैण में होने वाली बिधान सभा सत्र में इस पर मोहर लगने की पूरी तैयारी की गई है। शासन विश्वस्त सूत्रों की माने तो हाई पावर कमेठी को हटाया जा रहा है। दूसरा बोर्ड के उपाध्यक्ष के रूप में धर्मस्व एवं संस्कृति पर्यटन मंत्री की जगह अब साठ साल की उम्र से अधिक उम्र के देश के किसी भी नागरिक जो हिन्दू हो को उपाध्यक्ष बनाया जायेगा। वही धारा बाइस जिसमे सम्पति को एक्वायर का अधिकार था उसमें संशोधन करते हुए अब एक्वायर की स्थिति में भवन को श्रेणी में भिभक्त कर सरकार रोजगार देगी। यही नही जो मंदिरों के नाम गलत दर्ज हो गए थे उनको भी संसोधित कर ठीक किया गया है। दरअसल त्रिबेन्द्र सरकार के कार्यकाल में चार धाम और उसके आसपास के इकवान मंदिरों को मिलाकर चारधाम देवस्थानम अधिनियम को राजभवन की मंजूरी के बाद से ही चार धाम देवस्थानम बोर्ड अस्तित्व में आ गया था। एक्ट के विरोध में शुरुआती दिनों से ही श्री बद्रीनाथ श्रीकेदारनाथ,श्री गंगोत्री श्री यमनोत्री के पंडा पुरोहित घोर विरोध जता रहे है। कुछ दिनो पहले राज्य के पूर्व सीएम त्रिबेन्द्र सिंह रावत को पंडा पुरोहितों का केदार नाथ में गुस्से का शिकार होना पड़ा था,बिना दर्शन किये ही त्रिबेन्द्र सिंह रावत को वापिस लौटना पड़ा था। जिस प्रकार से इस एक्ट का विरोध हो रहा है और दो हजार बाइस में राज्य में बिधान सभा चुनाव है,ब्राह्मण समुदाय के गुस्से से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखकर अब बीच का रास्ता तलाशा जा रहा है। हालांकि पूर्व सीएम हरीश रावत कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल साफ कर चुके है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस बोर्ड को भंग किया जाएगा। सरकार दबाव में है।

LEAVE A REPLY