धामी की रणनीति के चलते सरकार और संगठन एक ही रथ पर सवार

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में भाजपा जब-जब सत्ता में रही तो सरकार व संगठन के बीच में आपसी तालमेल न होने के कारण पार्टी की अकसर फजीहत होती देखी गई। राज्य में साढे चार साल तक सरकार व संगठन के बीच दिखी दूरियां भाजपा हाईकमान को भी नजर आई और यही कारण है कि जब राज्य की कमान पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सौंपी गई तो उन्हें मंत्र दिया गया कि सरकार अपने संगठन के बिना किसी भी कीमत पर चुनावी रणभूमि में विजय नहीं हासिल कर सकती। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा संगठन में भी अपनी पकड मजबूत कर ली है और आरएसएस व विश्व हिन्दू परिषद के दिखाये रास्ते पर भी धामी की हमेशा स्वीकृति इस बात का परिचायक है कि पुष्कर सिंह धामी भले ही राज्य के मुख्यमंत्री हो लेकिन उन्हें इस बात का इल्म है कि अपनों के बिना उनकी सरकार हमेशा अधूरी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस प्रकार कम समय मे ही सरकार व सरकारी मुलाजिमों को नियंत्रण में ले लिया है। उसी प्रकार भाजपा संगठन में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। जिस संगठन के सहारे चुनावी नैय्या पार लगनी है उसमें धामी के कई केवट तैयार हो गए हैं। अभी तक चर्चा थी कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भले ही सरकार चलाने में सम्भल गये हो लेकिन भाजपा संगठन में उनकी पकड़ कमजोर है जो सन्देश जनता तक लेजाने का काम संगठन को करना है उसमें अभी कई खामियां नजर आ रही हैं। वही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष चूंकि त्रिवेंद्र खेमे से आते हैं ऐसे में उनको नुकसान की आशंका भी थी लेकिन भाजपा हाईकमान को भरोसे में लेने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने संगठन को भी अपने अनुसार साध लिया है। जो पदाधिकारी अभी तक सरकार के सहयोग से किनारा कर रहे थे अब वे ही पदाधिकारी सरकार के कामों व सरकार के मुखिया धामी को घर घर परिचय ले जाने का काम करने पर आ गए हैं। दरसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस प्रकार नाराज विधायकों व मंत्रियों से निजी मुलाकात कर अपना रास्ता आसान किया ठीक उसी प्रकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी निजी तौर पर संगठन के मोर्चों व जिले स्तर तक के पदाधिकारियों से सीधे संवाद स्थापित कर अच्छा समन्वय स्थापित कर रहे हैं। इस कारण ही भाजपा संगठन में बिना कोई फेरबदल किया मुख्यमंत्री का यूँ संवाद करना सभी के लिए उत्साह बढ़ाने जैसा रहा है। अभी तक क्या होता आ रहा था कि सरकार के मुख्यमंत्री हो या मंत्री वो भाजपा के संगठन को अपने पैर की जूती समझकर ही चलते थे लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस परिभाषा को बदल दिया है। मुख्यमंत्री कब किस युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष को फोन कर खैरखबर पूछ लें कुछ पता नही। मुख्यमंत्री का एक फोन मोर्चे के जिलाध्यक्ष के लिए उसके काम की किसी बड़ी प्रशंसा से कम नही होता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास विद्यार्थी परिषद, युवा मोर्चा व भाजपा संगठन का लम्बा अनुभव है इसीलिये मुख्यमंत्री अपने अनुभव की पूरी ताकत झौंकने में लगे हैं। मुख्यमंत्री की इस पहल से विपक्ष भी सकते में हैं और भाजपा के कार्यकर्ताओं की आवाज अधिकारियों तक सही प्रकार से पहुंचने से क्षेत्र की समस्याओं का निवारण तुरन्त हो जा रहा है। इसलिए साफ असर दिख रहा है कि अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मजबूत पकड़ सरकार के साथ साथ संगठन पर भी हो गयी है।

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