किरन शर्मा
देहरादून। उत्तराखण्ड में जिस दिन युवा व मधुरभाषी विधायक पुष्कर ंिसह धामी को उत्तराखण्ड की सत्ता सौंपी गई तो दूरभाष पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुष्कर सिंह धामी को सिर्फ इतना संदेश दिया था कि जिस गद्दी पर तुम आसीन हुये हो वह किस्मत से मिलती है। प्रधानमंत्री के इन शब्दों को पुष्कर सिंह धामी ने भगवान के बोल समझकर उन्हें अपने सीने में ग्रहण कर लिया और उन्होंने चार माह के अन्दर सत्ता चलाने का जो अंदाज राज्य की जनता के सामने पेश किया है उसने भाजपा के बडे-बडे दिग्गजों के पैरो तले जमीन खिसका दी है और वह इस जुगत में लगे हुये है ंकि किसी तरह से पुष्कर ंिसह धामी को विधानसभा चुनाव में जीतने न दें लेकिन ऐसे भीतरघाती भाजपा नेताओं को अब इस बात का इल्म हो गया है कि जिसका सारथी देश का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बन चुके हैं उनके साथ अगर उन्होंने भीतरघात या कोई भी साजिश करने का प्रपंच रचा तो प्रधानमंत्री की रडार पर वह नेता आ जायेंगे और उनके खिलाफ कितनी बडी कार्यवाही अमल में लाई जायेगी इसका अदंाजा भी उन्हें नहीं होगा। अब तो राज्य की जनता से लेकर भाजपा व विपक्ष यह समझ चुका है कि पुष्कर ंिसंह धामी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी रणभूमि में वर्षों तक सत्ता दिलाने का जो मन बनाया है वह 2०22 में शत प्रतिशत पूरा होगा क्योंकि यह बात शीशे की तरह साफ हो चुकी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सारथी जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बन चुके हैं तो फिर पुष्कर की सत्ता छीनना कांग्रेस के बस की बात नहीं है और पुष्कर सिंह धामी को जब पांच साल और सत्ता चलाने के मिलेंगे तो राज्य में भ्रष्टाचार, अपराधियों पर नकेल समेत राज्य का जिस तेजी के साथ विकास होगा उसकी परिकल्पना भी किसी राज्यवासी ने आज तक नहीं की होगी।
उत्तराखण्ड में भाजपा के आधा दर्जन से अधिक दिग्गज नेताओं के मन में वर्षों से मुख्यमंत्री बनने के सपने हिचकोले मार रहे हैं और समय-समय पर ऐसे नेता भाजपा हाईकमान के दरबार में अपने आपको सर्वेश्रेष्ठ नेता दिखाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने के लिए एडी-चोटी का जोर लगाते रहे लेकिन नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश में भाजपा का स्वरूप एकदम बदल चुका है और भाजपा हाईकमान ने कभी भी दबाव की राजनीति करने वाले नेताओं के सिर नहीं उठने दिये। यही कारण है कि लम्बे अर्से से उत्तराखण्ड भाजपा का कोई भी बडा नेता पार्टी में बगावत का झंडा उठाकर खुद मुख्यमंत्री बनने की दौड में आगे दिखाई नहीं दिया क्योंकि नरेन्द्र मोदी व अमित शाह ने पार्टी नेताओं को साफ संदेश दे रखा है कि अगर किसी नेता को इस बात का भ्रम है कि वह पार्टी से हटकर निर्दलीय चुनाव जीत सकता है तो ऐसा नेता कभी भी पार्टी छोडकर जा सकता है। 2०17 में हुये विधानसभा चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यवासियों से वायदा किया था कि अगर उत्तराखण्ड में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार आई तो वह उत्तराखण्ड को खुद संवारेंगे और उनकी नजर हमेशा उत्तराखण्ड पर रहेगी इसके साथ ही किसी भी राज्यवासी को हरदा टैक्स नहीं देना पडेगा। हालांकि भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड में जिस तरह से हिटलरशाही अंदाज में सत्ता चलाई और उनके कार्यकाल में पुलिस के कुछ अफसरों से लेकर शासन के बडे अफसरों ने भ्रष्टाचार का खुला खेल खेला उसकी गूंज हमेशा देश के प्रधानमंत्री से लेकर मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह के कानों में गूंजती रही और यही कारण था कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत को चार साल के कार्यकाल से पहले ही भाजपा हाईकमान ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया और तीन माह तक सत्ता चलाने वाले तीरथ सिंह रावत भी जब राज्य के अन्दर आवाम का दिल नहीं जीत पाये तो उन्हें भी सत्ता से बाहर कर दिया गया। अब युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सत्ता है और वह राज्य में जनसेवक बनकर सत्ता चला रहे हैं और आवाम के बीच वह जिस तरह से प्रसिद्ध होते जा रहे हैं उससे भाजपा के कुछ बडे नेताओं के माथे पर अपनी भविष्य की राजनीति को लेकर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं। पार्टी के कुछ नेताओं को इस बात का इल्म है कि अगर पुष्कर सिंह धामी विधानसभा चुनाव जीते और राज्य में भाजपा की सरकार आई तो एक बार फिर नरेन्द्र मोदी पुष्कर सिंह धामी को राज्य की बागडोर सौंपेंगे ऐसे संकेत अब तक उन्हें दिख चुके हैं। पुष्कर ंिसह धामी जिस खटीमा सीट से चुनाव लडने के लिए आगे आयेंगे उस सीट पर भाजपा के कुछ बडे नेता बडा भीतरघात कर पुष्कर सिंह धामी को चुनाव हरवाने का प्रपंच भी पर्दे के पीछे से रच सकते हैं ऐसी आशंकायें प्रबल हो रही हैं और यही कारण है कि राज्य के अन्दर बहस चल रही है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को खटीमा से विधानसभा चुनाव लडने के बजाए राजधानी के कैंट या फिर रायपुर इलाके से चुनाव लडना चाहिए जहां उनकी जीत में कोई शंका नजर नहीं आयेगी। हालांकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब तक के उत्तराखण्ड दौरों के दौरान जिस तरह से पुष्कर सिंह धामी को अपना मित्र व केदारनाथ धाम में बार-बार उनकी पीठ पर अपना हाथ रखा है वह पुष्कर सिंह धामी के लिए सत्ता पाने का अभेद आर्शीवाद दिखाई दे रहा है वह यह बताने के लिए काफी है कि जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश भर में भाजपा को सत्ता पर काबिज कर सकते हैं तो फिर उत्तराखण्ड जैसे छोटे राज्य में अपने बाल सखा पुष्कर सिंह धामी को तो वह सत्ता में प्रचंड बहुमत से बढकर भी जीत दिलायेंगे इसमें कोई शंका नजर नहीं आती।
