देहरादून(संवाददाता)। भाई और बहन के अटूट रिश्ते का पर्व भैया दूज का त्यौहार राजधानी में भी हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान बहन ने भाई के माथे पर तिलक लगा कर मनचाहा वरदान मांगा और बदले में भाई ने बहन की रक्षा करने का वचन देते हुए उपहार भेंट किये। यहां राजधानी व आसपास के क्षेत्रों में हर बार की तरह इस बार भी शहर में भाई बहन का त्यौहार भैया दूज धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाईयों के घर जाकर उनके माथे पर तिलक लगा कर मनचाहा वरदान मांगा और भाई ने जीवन प्रयत्न उस वरदान की पूर्ति का वचन भी दिया।
इस दौरान बहन ने भाई को गोले के साथ ही मिष्ठान भी प्रदान की। जिसके बदले में भाई ने तोहफा देकर बहन को प्रसन्न किया और उसकी रक्षा करने का वचन दिया। यहां पर मान्यता की बात करें तो इस त्यौहार को मनाने की मान्यता यह है कि एक बार राजा बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान मांगने को कहा जिस पर राजा बलि ने कहा कि जहां जहां वह पैर रखेंगे वहां वहां का हिस्सा उनका हो जायेगा। बताया गया है कि इस पर भगवान विष्णु भी राजी हो गये जिसके बाद राजा बलि दो पग पैर रख स्वर्ग और आसमान का आध हिस्सा अपने नाम करा दिया। जैसे ही वह तीसरे पग यानि की धरती पर पैर रखने लगे तो भगवान विष्णु ने राजा बलि के सामने अपना सिर झुका दिया और जब राजा बलि ने देखा तो उनका पैर विष्णु के सिर पर था। बताया गया कि जिसके बाद भगवान विष्णु अपने आप को राजा बलि के सामने द्वारपाल के रूप में रख दिया। बताया गया कि जिस पर माता लक्ष्मी ने अगले दिन राजा बलि के महल पहुंचकर उन्हें तिलक लगाकर अपना भाई स्वीकार किया और जब राजा बलि ने माता लक्ष्मी से वरदान मांगने को कहा तो माता लक्ष्मी ने छूटते ही कहा कि वह अपने स्वामी भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाना चाहती हैं और इस पूरी लीला में राजा बलि को भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी को सौंपना पड़ा।
बताया गया है कि मान्यता है कि बस तभी इस त्यौहार का नाम भैया दूज रख दिया गया और भाई बहन द्वारा उक्त त्यौहार धूमधाम से मनाया जाने लगा। माना जाता हैं इस दिन एक भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन देने के साथ ही उसके हर वरदान को पूरा करने का प्रण भी लिया जाता हैं। जिसकी कल्पना बहन अपने स्वप्न में ही करती होगी। मान्यता है कि भैया दूज मनाने के तरीके भी अलग अलग माने जाते है।
