आगामी चुनाव में युवा चेहरा बना हाईकमान की पसंद

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सीएम धामी के प्रबंधन तंत्र ने गृहमंत्री को बनाया मुरीद
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। भारत वह देश है जहां की आबादी का अधिकतम प्रतिशत युवाओं का है। इसलिए हमेशा से यहीं कहा जाता है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। बात भी सही है क्यांेकि किसी भी स्तर पर यदि कोई युवा पूरी निष्ठा के साथ नेतृत्व करने का मन बना ले तो वह उन ऊंचाईयों को छू सकता है, जिसकी संभवतः किसी ने कल्पना भी न की हो। खुशकिस्मती का कोई समय निर्धारित नहीं होता, वह कभी भी प्राप्त हो सकती है। उदाहरण के तौर पर उत्तराखण्ड को ही ले लीजिए। जहां भाजपा शासनकाल के शुरूआती साढ़े चार सालों में बहुत कुछ ऐसा घटा जिससे भाजपा की किरकिरी समूचे देश के सामने कथित रूप से हुई, वहीं मौजूदा समय का आलम तो किसी मनोहरी दृश्य से कम नजर नहीं आता। विचारणीय प्रश्न यह है कि आखिर साढ़े चार साल बाद एकाएक भाजपा सरकार में ऐसा परिवर्तन कैसे आ गया? इस सवाल का जवाब अगर ढूंढा जाए तो जवाब मिलेगा राज्य के युवा सीएम पुष्कर सिंह धामी। सत्ता संभालने के बाद सीएम धामी ने अपनी कार्यक्षमता का परिचय देकर सभी को चकित कर दिया। राज्य को विकास की बुलंदियों पर पंहुचाने का उनका मिशन साफ नजर आ रहा है। यहीं कारण है कि वह लगातार केन्द्र सरकार से उत्तराखण्ड के विकास में काम आने वाले विचार साझा करते रहते है और केन्द्र सरकार के दिग्गज भी उनके विचारों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें अमलीजामा पहनाने के लिए कदम उठाते हुए नजर आते है। कुछ माह के भीतर ही उत्तराखण्ड में चुनाव होने वाले है। भाजपा हाईकमान अपना पूरा मन बना चुकी है कि वह यह विधानसभा चुनाव सीएम धामी के चेहरे पर ही लड़े? हालांकि इसकी कोई औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है लेकिन हाईकमान के दिग्गजों के हाव-भाव देखकर और उनके वक्तव्यों में छिपे गूढ़ रहस्य का अगर आंकलन किया जाए तो यहीं बात निकलकर आती है कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ट्रंपकार्ड है पुष्कर। उनका इस बात पर विचार गलत भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि सीएम बनने के बात से धामी ने जिस विकासपरक सोच के तहत कार्याें को अंजाम दिया है वैसा सरकार के शुरूआती साढ़े चार साल में शायद ही देखने को मिला हो। अब देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा के ट्रंपकार्ड धामी के सामने विरोधी दल कैसे अपनी बाजी खेलेंगे?
उत्तराखण्ड के प्रति देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्नेह किसी से छिपा नहीं है। वे हमेशा से उत्तराखण्ड के विकास के प्रति सजग रहते है। कुछ सप्ताह पूर्व वे उत्तराखण्ड एक छोटे से प्रवास पर आए थे। इस दौरान उन्हें कुछ योजनाओं का लोकार्पण भी किया। उत्तराखण्ड की जनता को हमेशा से यह आस रहती है कि जब भी मोदी उनके क्षेत्र में आए तो उन्हें पीएम का भाषण सुनने को मिले। यह दर्शाता है कि जितना स्नेह पीएम उत्तराखण्ड से करते है उतना ही स्नेह उत्तराखण्ड की जनता अपने प्रधानमंत्री से करती है। इस बात का प्रमाण वर्ष 2017 में भी तब देखने को मिल गया था जब पीएम मोदी के नाम भाजपा ने जनता से वोट मांगे तो यहां की जनता ने भाजपा का प्रचंड बहुमत दे डाला था। पीएम मोदी का हाल का दौरा कई मायनों मंे विशेष बन गया था। पीएम ने जब मंच से जनता को संबोधित किया तो उनके व्यक्तव्यों में धामी शासन की तारीफ ही सुनने को मिली और जब उन्होंने सीएम धामी को ‘मित्र’ कहकर संबोधित किया तो ऐसा लगा कि मानो बड़े भाई ने छोटे भाई को ‘यशस्वी भवः’ का आर्शीवाद दे दिया हो।
बीते दिनों मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार राज्य में अतिवृष्टि हुई थी। पहाड़ी जनपदों में यह अतिवृष्टि कहर की तरह बरसी। उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री धामी ने पहले हवाई दौरा किया तो उसके बाद वह आपदा प्रभावितों से मिलने स्वयं पंहुचे और उन्हें सरकार से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। उत्तराखण्ड में आई दैवीय आपदा का समाचार सुनने के बाद देश के गृहमंत्री अमित शाह भी उत्तराखण्ड पंहुचे थे। उन्होंने भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। उसके बाद जब वह मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने सीएम धामी के प्रबंधन तंत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि धामी सरकार के अलर्ट होने की वजह से नुकसान कम हुआ। वह राज्य कितना सौभागयशाली होता जिसके मुखिया की तारीफ देश के प्रधानमंत्री से लेकर देश के गृहमंत्री तक बड़ी ही प्रफुल्लता के साथ करते हो। शालीन व्यक्तित्व के स्वामी सीएम धामी ने जब राज्य की बागडोर हाथों में ली थी तब उन्होंने यह साफ कर दिया था कि कोई भी सरकारी आधिकारी-कर्मचारी अगर अपने कर्तव्यों को निर्वाह्न निष्ठा के साथ नहीं करेगा तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यहीं वजह है कि अब राज्य में से सरकारी कार्याें में कोताही बरते जाने की खबरें कम आती है। अब जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे है तो सभी राजनीतिक दल एक्टिव मोड में दिखाई दे रहे है। कोई दल ‘फ्री’ का लॉलीपॉप लेकर घूम रहे है तो कोई दल अपने अंतर्कलह के बावजूद राज्य में सत्ता पाने का हसीन ख्वाब देखने में जुटा है। एक राजनीतिक दल तो ऐसा भी है कि वह जनता के बीच में कम और धरनों में ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह सब दल मिलकर आखिर भाजपा के ट्रंपकार्ड का मुकाबला किस प्रकार कर पाएंगे?

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वो किरकिरियां अच्छी या ये तारीफें?
उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार अपने पांच साल पूरे करने जा रही है। हालांकि अभी पांच साल पूरे होने मेें कुछ समय है। इस लंबे चौड़े कार्यकाल में बहुत शुरूआत से कुछ ऐसा घटा जिसकी वजह से उत्तराखण्ड सरकार को पूरे देश में किरकिरियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया की गलियां इन किरकिरियों से उस समय से लेकर आज तक गुलजार है। बात करे ब्यानबाजियों की तो सरकार से जुड़े कई चेहरों के श्रीमुखों से तर्कहीन कथनों की विचित्र वर्षा देखने को मिली। रसायन शास्त्र और भौतिक शास्त्र अगर जीवित व्यक्ति होते तो उत्तराखण्ड सरकार के शुरूआत चेहरों के कथन सुनकर बिना किसी को कुछ कहे आत्महत्या कर लेते? ऐसा नहीं इन चेहरों के श्रीमुख से ऐसे कथन सिर्फ एक बार निकले हो, यह तो मानो एक परंपरा सी ही बन गई थी? अंततः देर से ही परंतु यह कथित परंपरा टूटी और किरकिरियों का दौर समाप्त आया। पिछले कुछ माह से उत्तराखण्ड की उत्कृष्टा के चर्चे समूचे भारत में हो रहे है। राज्य साकारात्मक दिशा की ओर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री सहित भाजपा हाईकमान के दिग्गज आज सरकार के प्रबंधन तंत्र की तारीफों के पुल बांध रहे है। यकायक आए इस बदलाव के कारणों का आंकलन करना बड़ा आसान हो और आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान यह एक गर्म चर्चा का विषय रहेगा। बहरहाल, यक्ष प्रश्न तो यही है, वो किरकिरियां अच्छी या ये तारीफें?

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