धामी की दरियादिली कर रही आवाम को ‘कायल’

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को भी शायद इस बात का इल्म नहीं होगा कि वह मात्र सौ दिन के भीतर राज्यवासियांे के दिल में राज करने लगेंगे। धामी की वाणी और बुजुर्गों के प्रति उनकी दरियादिली से आवाम उनका कायल होता जा रहा है। उत्तराखण्ड में भले ही इस बात को लेकर भोकाल मचाया जा रहा हो कि यशपाल आर्य के कांग्रेस में जाने से भाजपा का सत्ता में वापस आना नामुमकीन हो गया है लेकिन राजनीतिक पंडित मानते हैं कि उत्तराखण्ड मंे कभी भी जातिवाद के आधार पर चुनाव नहीं लडे जाते इसलिए यह कहना हास्यप्रद है कि यशपाल आर्य व उनके पुत्र के कांग्रेस में जाने से अब भाजपा की सत्ता में वापसी नहीं हो सकती? पुष्कर ंिसह धामी ने राज्य के अन्दर जिस तरह से अपने चुनावी मिशन को आगे बढाना शुरू किया है और उनके सारथी के रूप में जहां उनके साथ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तराखण्ड राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत ंिसह कोश्यारी खडे हुये हैं उससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के अन्दर 2022 के चुनाव मंे किस दल को राज्य की जनता सत्ता सौंपने के लिए अपने कदम आगे बढायेगी? बीस साल में उत्तराखण्ड के जितने भी पूर्व मुख्यमंत्री रहे उनकी किचन कैबिनेट के कुछ अफसरों पर बडे-बडे खेल करने के दाग लगे और उससे राज्य की जनता के सामने हर मुख्यमंत्री कटघरे में खडा हुआ दिखाई दिया लेकिन पुष्कर सिंह धामी की किचन कैबिनेट में ऐसे अफसरों की धाकड टीम खडी हुई है जिन पर कोई भी तिनकाभर दाग नहीं लगा सकता और इस टीम के बल पर ही पुष्कर ंिसह धामी राज्य के अन्दर स्वच्छ प्रशासन कायम करने के मिशन पर अपने कदम आगे बढाते चले जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अब तक के कार्यकाल में राज्य की जनता को यह देखने को नहीं मिला कि वह अपने आपको मुख्यमंत्री मानकर सत्ता चला रहे हों। पुष्कर सिंह धामी ने राज्यवासियों को साफ संदेश दे रखा है कि वह जन सेवक हैं और सेवा करना ही उनकी पहली प्राथमिकता है क्योंकि सत्ता तो आती जाती है इसलिए इस सत्ता पर किसी भी राजनेता को अहंकार नहीं करना चाहिए। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा कोई मुख्यमंत्री देखने को मिल रहा है जो राज्य के अन्दर सबसे मुलाकात करने के लिए हरदम आगे बढता हुआ दिखाई दे रहा है। पुष्कर सिंह धामी के मन में बुजुर्गों को लेकर जो दरियादिली अब तक देखने को मिली है उसने बुजुर्गों के मन में जीने की एक आशा की किरण जगा दी है और यही कारण है कि कोई भी बुजुर्ग मुख्यमंत्री के सामने अपना दर्द बयां कर अपनी आंखों में आंसू भरता है तो मुख्यमंत्री व उनके सामने आंसू भरकर खडा बुजुर्ग भावकुता में बह जाते हैं और मुख्यमंत्री उस बुजुर्ग के आंसू पोछते हुए उन्हें जिस तरह से अपने सीने से लगाकर उन्हें अपना मान रहे हैं उसने उत्तराखण्ड की राजनीति मंे पुष्कर ंिसह धामी ने एक नई संस्कृति को जन्म दे दिया है और राज्य की जनता पुष्कर सिंह धामी के इस अनोखे रूप को देखकर उनके कायल होती जा रही है और यह बात भी उभरने लगी है कि जो मुख्यमंत्री मात्र तीन माह के भीतर युवाओं को रोजगार देने के लिए बडा फैसला ले रहा है और हर वर्ग को इंसाफ देने व उनका हक उन्हें दिलाने के लिये बडे-बडे फैसले लेने के लिए तिनकाभर भी अपनी डगर से नहीं भटक रहा है उस राजनेता को अगर पांच साल तक दुबारा सत्ता मिलेगी तो वह राज्य की तकदीर व तस्वीर बदल कर रख देगा। पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में राज्य के अन्दर रहने वाले बुजुर्गों के आंसुओ ंको पोछने के लिए जिस तरह से अपनी जन सेवक के रूप मंे दरियादिली को उडेलने के लिए अपनी वचनबद्धता से आगे बढना शुरू किया है उसने उत्तराखण्ड के उन कांग्रेसी नेताओं को आईना दिखाना शुरू कर दिया है जो कि सत्ता में रहकर अपने आपको राज्य का भाग्यविधाता समझते थे।

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