देहरादून(संवाददाता)। विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक ने कहा है कि अपनी 14 सूत्रीय मांगों के समाधान के लिए कल छह अक्टूबर से हड़ताल की जायेगी और इसके लिए कई संगठनों ने अपना समर्थन दिया है।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शिक्षक अधिकारी कर्मचारी महासंघ के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक जोशी ने स्पष्ट समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी का उत्पीडऩ होने की दशा में महासंघ आंदोलन पर उतर जाएगा। सभा में उपस्थित अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के अध्यक्ष अरुण पांडे, शक्ति प्रसाद भट्ट द्वारा भी छह अक्टूबर से होने वाली हड़ताल का पूर्ण समर्थन किया गया। उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग डिप्लोमा इंजीनियर संघ के द्वारा मुख्यमंत्री के नाम पत्र जारी कर हड़ताल का समर्थन तथा अपने अभियंताओं की ड्यूटी लगाने का विरोध व्यक्त किया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तरांचल पेयजल निगम डिप्लोमा इंजीनियर संघ के द्वारा भी उनके अभियंताओं की ड्यूटी लगाने का विरोध किया गयाद्य उत्तरांचल इंजीनियर्स फेडरेशन के द्वारा भी इस विषय में पत्र जारी किया गया है तथा अप्रशिक्षित अभियंताओं को विद्युत विभाग में तैनात करने पर विरोध करने का निर्णय लिया गया हैद्य पदाधिकारियों द्वारा मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखंड पुष्कर सिंह धामी तथा ऊर्जा मंत्री डॉ हरक सिंह रावत से अपील की गई कि ऊर्जा कार्मिकों के साथ वर्ष 2०17 से अब तक हुए सभी समझौतों के सम्मान तथा इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2००3 के तहत बिजली कर्मचारियों की सेवा करते कमतर न किए जाने के प्रावधानों के तहत 9-14 -19 वर्ष में एसीपी की व्यवस्था तत्काल फिर से प्रारंभ की जाए।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा निगमों के प्रबंधन द्वारा गलत बयानी की जा रही है कर्मचारियों की इन 14 सूत्रीय समस्याओं में कोई भी नई मांग नहीं है यह वही सुविधाएं हैं जो पूर्वर्ती उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के समय से विद्युत अधिनियम 2००3 रिफॉर्म एक्ट 1999 तथा अन्य समझौतों के तहत लगातार पांचवें तथा छठे वेतन आयोग में भी वर्ष 2०17 तक मिलती रही हैं तथा इन को लागू करने पर मात्र लगभग 93 लाख प्रति माह का खर्चा तीनों निगमों पर आता है। इस अवसर पर इंजीनियर शैलेंद्र दुबे ने कहा कि पूरे देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी उत्तराखंड के कर्मचारियों के समर्थन में खड़े हैं तथा जिन राज्यों को प्रशासन द्वारा कर्मचारियों को ड्यूटी हेतु भेजने के पत्र भेजे गए थे उनमें उत्तर प्रदेश, हिमाचल तथा हरियाणा अन्य राज्यों की कर्मचारी फेडरेशन ने उत्तराखंड में ड्यूटी करने आने से मना कर दिया है और अरबों खरबों रुपए के पावर प्लांट संयंत्र टरबाईन एवं अन्य उपकरण जो राष्ट्र की संपत्ति है उन पर अप्रशिक्षित कार्मिकों तथा ठेकेदारों से कर्मचारी लाकर कार्य कराना उनकी जान को जोखिम में डालना है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति को रिस्क में लाने वाली स्थिति है। शैलेंद्र दुबे तथा मोर्चा संयोजक ने पुन: मुख्यमंत्री तथा डॉ हरक सिंह रावत से प्रभावी हस्तक्षेप करते हुए उत्तराखंड को बिजली की हड़ताल से बचाने की ओर बढऩे का अनुरोध किया तथा यह स्पष्ट किया बिजली कर्मचारियों का हड़ताल करना कोई मकसद नहीं है उनका ध्यान अपनी उन जायज समस्याओं के प्रति है जो वर्ष 2०17 से निरंतर लंबित रखी जा रही है मोर्चा द्वारा अपील की गई कि बिजली कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा ना ली जाए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया गया कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन यथावत जारी रहेगा और यह भी स्पष्ट किया गया किसी भी कर्मचारी का उत्पीडऩ अथवा गिरफ्तारी की स्थिति में तत्काल प्रभाव से हड़ताल प्रारंभ हो जाएगी। इस अवसर पर वार्ता में मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इलेेक्ट्री सिटी एंप्लाइज तथा ऑल इंडिया पावर इंजीनियर फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर शैलेंद्र दुबे, उत्तराखंड अधिकारी शिक्षक समन्वय समिति के अध्यक्ष अरुण पांडे, शक्ति प्रसाद भट्ट, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक महासंघ के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक जोशी द्वारा संबोधित किया गया। इस अवसर पर वार्ता में इंजीनियर शैलेंद्र दुबे तथा मोर्चा सह संयोजक राकेश शर्मा, पावर जूनियर इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद पंत, पावर इंजीनियर एसोसिएशन के महामंत्री अमित रंजन, विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज सैनी, ऊर्जा कामगार संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक बेनीवाल, विद्युत संविदा संगठन के अध्यक्ष विनोद कवि आदि उपस्थित थे।
