कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, राष्ट्रपति को ज्ञापन
देहरादून(नगर संवाददाता)। प्रतिदिन एक करोड़ वैक्सीनेशन सुनिश्चित करने व भारत के हर नागरिक को यूनिवर्सल मुफ्त वैक्सीनेशन लगवाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमण्डल ने प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिह के नेतृत्व में उत्तराखण्ड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से राजभवन में मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल कहा कि कोरोना वायरस कोविड-19 संक्रमण कालन ने लगभग हर भारतीय परिवार को अप्रत्याशित तबाही एवं असीम पीड़ा दी है। दुख की बात है कि मोदी सरकार ने कोरोना से लडऩे की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। सच्चाई यह है कि केंद्र की भाजपा सरकार कोविड-19 के अपराधिक कुप्रबंधन की दोषी है। ज्ञापन में कहा गया है कि उग्र कोविड-19 महामारी के बीच वैक्सीनेशन ही एकमात्र सुरक्षा है। मोदी सरकार की वैक्सीनेशन की रणनीति भारी भूलों की एक खतरनाक कॉकटेल है। भाजपा सरकार ने ‘वैक्सीनेशन की योजनाÓ बनाने का अपना कर्तव्य ही भुला दिया। भाजपा सरकार निंदनीय रूप से ‘वैक्सीन की खरीदÓ से बेखबर रही। केंद्र सरकार ने जानबूझकर एक ‘डिजिटल डिवाईडÓ पैदा किया, जिससे वैक्सीनेशन की प्रक्रिया धीमी हो गई। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने ‘विभिन्न कीमतों के स्लैबÓ बनाने में जानबूझकर मिलीभगत की, यानि एक ही वैक्सीन के लिए अलग अलग कीमतें तय कीं, ताकि आम आदमी से आपदा में लूट की जा सके। ज्ञापन में कहा गया है कि जहां अन्य देशों ने मई, 2०2० से वैक्सीन खरीदने के ऑर्डर देने शुरू कर दिए थे, वहीं मोदी सरकार ने भारत को इसमें विफल कर दिया। केंद्र सरकार ने वैक्सीन का पहला ऑर्डर जनवरी, 2०21 में जाकर दिया। जन पटल पर मौजूद जानकारी के अनुसार केन्द्र की मोदी सरकार व राज्य सरकारों ने 14० करोड़ की जनसंख्या के लिए आज तक केवल 39 करोड़ वैक्सीन खुराकों का ऑर्डर दिया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत सरकार के अनुसार गत माह 31 मई, 2०21 तक केवल 21.31 करोड़ वैक्सीन ही लगाई गईं। लेकिन वैक्सीन की दोनों खुराकें केवल 4.45 करोड़ भारतीयों को ही मिली हैं, जो भारत की आबादी का केवल 3.17 प्रतिशत है। पिछले 134 दिनों में, वैक्सीनेशन की औसत गति लगभग 16 लाख खुराक प्रतिदिन है। इस गति से, देश की पूरी व्यस्क जनसंख्या को वैक्सीन लगाने में तीन साल से ज्यादा समय लग जाएगा। यदि ऐसे ही चलता रहा, तो हम देश के नागरिकों को कोरोना की तीसरी लहर से कैसे बचा पाएंगे, इस सवाल का जवाब केन्द्र की मोदी सरकार को देना होगा। ज्ञापन में कहा गया कि इस विकराल महामारी के बीच हमारे देश के नागरिक कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार वैक्सीन का निर्यात करने में व्यस्त है। केंद्र की भाजपा सरकार आज तक वैक्सीन की 6.63 करोड खुराक दूसरे देशों को निर्यात कर चुकी है। यह देश के लिए सबसे बड़ा नुकसान है। ज्ञापन में कहा गया है कि केन्द्र मोदी सरकार द्वारा वैक्सीन के लिए तय की गई अलग अलग कीमतें लोगों की पीड़ा से मुनाफाखोरी का एक और उदाहरण हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड की एक खुराक की कीमत मोदी सरकार के लिए 15० रुपये, राज्य सरकारों के लिए 3०० रु. और निजी अस्पतालों के लिए 6०० रुपये है। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की एक खुराक की कीमत मोदी सरकार के लिए 15० रुपये, राज्य सरकारों के लिए 6०० रुपये. और निजी अस्पतालों के लिए 1,2०० रुपये. है। निजी अस्पताल एक खुराक के लिए 15०० रुपये तक वसूल रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि दो खुराकों की पूरी कीमत की गणना इसी के अनुसार होगी। मोदी सरकार द्वारा एक ही वैक्सीन की तीन अलग अलग कीमतें तय करना लोगों की पीड़ा से मुनाफाखोरी कमाने का नुस्खा है। इस अवसर पर कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल से कहा कि आज जरूरत है कि केंद्र सरकार वैक्सीन खरीदे और राज्यों एवं निजी अस्पतालों को निशुल्क वितरित करे, ताकि वह भारत के नागरिकों को मुफ्त लगाई जा सके। इससे कम कोई भी काम भारत एवं भारत के नागरिकों का बड़ा नुकसान है। ज्ञापन में कहा गया कि साथ ही आगामी 31 दिसंबर, 2०21 तक या उससे पहले 18 साल से अधिक आयु की पूरी व्यस्क जनसंख्या को वैक्सीन लगाने का काम पूरा करने की जरूरत है।
देश के नागरिकों का बचाव करने का यही एकमात्र रास्ता है। इसका एकमात्र उपाय है कि एक दिन में कम से कम एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जाए, न कि एक दिन में औसतन 16 लाख लोगों को। इस अवसर पर कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि आप मोदी सरकार को दिन में एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाए जाने एवं यूनिवर्सल मुफ्त वैक्सीनेशन का निर्देश देने की मांग की गई। इस अवसर पर प्रतिनिधिमण्डल में प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिह के अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकान्त धस्माना, प्रदेश महामंत्री गोदावरी थापली, महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा, पूर्व विधायक राजकुमार, प्रदेश सचिव गिरीश पुनेड़ा, सीताराम नौटियाल आदि शामिल थे।
