हरिद्वार में इंटरनेशनल एयरपोर्ट मंत्री का हसीन सपना या जुमला!

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मुख्य संवाददाता
हरिद्वार। उत्तराखण्ड में सरकार मुख्यमंत्री चला रहे हैं या फिर कोई मंत्री? हाल ही में पर्यटन मंत्री द्वारा हरिद्वार में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाये जाने का ऐलान तो किया लेकिन सरकार के मुखिया को इसकी भनक तक भी नहीं चली ऐसे में सवाल उठता है कि हरिद्वार में इंटरनेशनल एयरपोर्ट मंत्री का हसीन सपना है या फिर कोई जुमला?
उत्तराखण्ड़ की सत्ताधारी भाजपा को मुख्यमंत्री से लेकर उनके मंत्री व सांसदों तक को सत्ता का उत्साह इतना है कि जिसका जो मन होता है वो बोला जाता है। उसके बाद सरकार के प्रवक्ता लीपापोती में लगते हैं। सरकार के मंत्री नया मामला सामने आया है जिसमें अपनी परिकल्पना को जनता में साझा कर जिलाधिकारी को भी काम करने के निर्देश भी दे दिये हैं। जी हाँ उत्तराखण्ड के कैबिनेट में पर्यटन मंत्री व हरिद्वार के जिला प्रभारी आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज ने हाल ही में अपने हरिद्वार दौरे पर घोषणा की कि हरिद्वार को सरकार अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देगी। जिसके लिये मंत्री ने हरिद्वार जिलाधिकारी एस रवि शंकर को जमीन तलाशने के लिये निर्देशित भी कर दिया है। अब जब ये मामला सरकार के कानों तक पहुंचा तो सरकार सोच में पड़ गयी कि ये मामला कहा से आया है। इसी बीच पत्रकारों ने सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल से जब पूछा तो उन्होंने साफ साफ बोल दिया कि सरकार की ऐसी कोई योजना नही है। ये मंत्री की एक अपनी परिकल्पना है जिसको वो भविष्य में कैबिनेट में जब रखेंगे तब ही उस पर विचार किया जाएगा फिलहाल ऐसा कोई विचार सरकार का नही है कि हरिद्वार में कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाया जाएगा। अब पर्यटन मंत्री सही है या सरकार सही बोल रही है। सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री का बयान ज्यादा महत्वपूर्ण है अगर सरकार की ऐसी कोई योजना होती तो सरकार के संज्ञान में होती , प्रवक्ता भी यह बोल सकते थे कि मेरी संज्ञान में नही है अगर ऐसी कोई योजना बनी है या पूर्व में बनी हो लेकिन कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का स्पष्ट कहना है कि ये सतपाल महाराज जी का अपना सपना है जिसे उन्होंने देखा होगा सरकार ऐसे कोई सपना हरिद्वारवासियों को नही दिखाना चाहती है। इसका सीधा संदेश यह है कि सरकार के मंत्रियों व अपने संगठन में कोई तालमेल नही है। जिनका जो मन आता है वो मीडिया में सुर्खियां बटोरने को अपना सपना बांट देता है। इसमें एक मामला यह भी दिखाई दे रहा है कि कोई भी घोषणा मुख्यमंत्री स्वयं ही करने के पक्ष में है लेकिन उससे पहले ही किसी किसी मंत्री या बड़े नेता द्वारा कुछ बाहर आ जाता है तो उसे अपने प्रवक्ता द्वारा खंडन करा दिया जाता है। इन सब कृत्यों से पार्टी तो कमजोर हो ही रही है कार्यकर्ता भी भ्रमित है कि किस बात का प्रचार किया जाए जिससे जनता में सही संदेश जाये। वर्तमान सरकार में कांग्रेस की दूसरी टीम ही काम कर रही है इस कारण भी भाजपा की अनुशाषित शैली को धूमिल करने का कोई मौका नही छोड़ रहे हैं। भाजपा के परम्परागत कार्यकर्ता इन कृत्यों से असमंजस में हैं। मंत्रियों की लड़ाई धरातल पर दिख रही है। मुख्यमंत्री की बिना मर्जी के घोषणाएं कर दे रहे है। संगठन मुख्यमंत्री से अलग अलाप जप रहा है। जिस परम्परागत वोटर पर भाजपा दंभ भर्ती है वो भी वोटर खिसकता दिख रहा है और इस आग में घी का काम पहले ही कोरोना की दूसरी लहर कर चुकी है। उसके बाद भी भाजपा के नेता कोई गम्भीरता से चुनावी मिशन को लेने को तैयार नही है। मीडिया में घिरते नेता मीडिया के सर ही अपनी गलतियों का ठीकरा फोड़ते हैं।

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