आपस में लड़ो! चुनाव तो मोदी लड़ेंगे

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देहरादून। सत्ताधारी भाजपाइयों में चुनावी वर्ष में चुनाव लड़ने की चिंता से ज्यादा,हर काम का श्रेय लूटने की लड़ाई चल रही है। भाजपाई चुनाव की चिंता इसलिए भी नही कर रहे क्योंकि उनके पास दिग्विजयी मोदी व अमित शाह जो हैं। चुनावी वर्ष में इसी आपसी लड़ाई ने अपनो का ही तख्ता पलट कर दिया। चार साल तक जीरो टॉलरेंस का ढोल बजाने वाले त्रिवेंद्र को ही जीरो कर दिया। अब नये मुखिया अपनी जुबान से पार्टी को जीरो करने में लगे हैं। सोशल मीडिया पर टिकटोक का नया स्टार तक तिरथ सिंह को कहा जाने लगा है। लोग नये मुख्यमंत्री की अटपटी बातों और सोशल मीडिया में जमकर चटकारे लेते हैं। अब ये कहावत यहाँ चरितार्थ होती है ष्जैसा राजा-वैसी प्रजाष्,अब प्रजा का तो पता नही लेकिन राजा के मंत्री अपने मुखिया के सपने को लड़-लड़ कर पूरा करने में लगे हैं। हाल के घटनाक्रम ने सभी को चौका दिया है।
पूरे प्रदेश में व्यापारियों कब आक्रोश को न भांप पाने वाले मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों से पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक भांप गये और जैसे ही केंद्र की नयी गाइडलाइंस आयी। ‘जिसमें 5 प्रतिशत से कम कोरोना प्रभावित क्षेत्रों को अनलॉक किये जाने’ की टिप्पणी थी। उस मौके को तुरंत भुनाया या कहे ये संजोग था जब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन कौशिक मुख्यमंत्री तिरथ सिंह रावत से मुलाकात कर रहे थे तभी ये केंद्र की गाइडलाइन आयी। बन्द कमरे में मुख्यमंत्री व प्रदेशाध्यक्ष के बीच वार्ता जो भी हुई हो लेकिन बाहर जो चर्चा आयी उसमे ये आया कि व्यापारियों की मांग देखते हुये सरकार राहत भरा फैंसला ले सकती है। वही प्रदेशाध्यक्ष मदन कौशिक व प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार की मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से मुलाकात की फोटो इस प्रकार से वायरल की गयी कि मदन कौशिक की पहल पर ही सरकार व्यपारियों को राहत दे रही है। इस पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन कौशिक की वाहवाही भी शुरू हो गयी। पूरे प्रदेश में मदन कौशिक के सरकार पर प्रभाव की चर्चा तेज हो गयी। इस पूरे प्रकरण को सरकार के मंत्री हजम नही कर पाए? चारों तरफ मुख्यमंत्री व उनकी टीम की सोच पर सवाल उठने लगे। त्वरित निर्णयों पर वर्तमान मुख्यमंत्री की कार्यशैली पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ही होने के कारण चुनावी वर्ष में पूरी किरकिरी हो रही है। ऐसे ही इस मामले में जब मदन कौशिक नंबर ले गये तो सरकार की नींद खुली और सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का बयान आया कि ‘सरकार किसी के दबाव में काम नही करेगी’। भला सरकार से ये पूछे कि सरकार पर दबाव किसी ने कहा बनाया और क्या सरकार ने कोई फैंसला ले लिया है। एक औपचारिक वार्ता निकलकर सामने आयी जो अधिकृत भी नही थी। लॉक डाउन में सरकार राहत देती है या केंद्रीय गाइडलाइन पर कार्य करती है तो सरकार की ही वाहवाही होगी और पूरे प्रदेश में व्यपारियों के बढ़ते आक्रोश को भी कम किया जा सकता है। मदन कौशिक ने किया भी ये ही कि संदेश दिया कि सरकार को व्यापारी वर्ग की चिंता है। व्यापारी धैर्य रखें सरकार उनके लिये सोच रह है। इसमें सरकार एवं पार्टी दोनों का लाभ ही निहित था लेकिन भाजपा की आपसी सर फुटव्वल और श्रेय लेने की निचले स्तर की लड़ाई जनता के सामने आ चुकी है। चुनावी वर्ष की शुरुआत करते हुऐ ही केंद्रीय नेतृत्व ये ही संदेश देने आया था कि ऐसा कोई कार्य न हो जिससे जनता में गलत संदेश जाएं। इस सबके बाद भी भाजपा के मंत्री हो या दिग्गज कोई भी नेता पार्टी की किरकिरी कराने का कोई मौका नही छोड़ रहे है? ये नेता निश्चिंत है चुनाव को लेकर की मोदी के लिये अंध भक्त कार्यकर्ता व मोदी जुमलों से प्रसन्न जनता भाजपा को ही वोट देगी? भीड़ एकत्रित करने के लिए अमित शाह का चाबुक बहुत है। आरएसएस के खौफ से भाजपा कार्यकर्ता वोट मांगने उरतेगा ही तो अपने को सुर्खियों में बने रहना है तो जैसे चाहे अपनी जुबान साफ करों या किसी को भी नीचा दिखाओ सरकार हमसे है। सरकार व संगठन की ये लड़ाई कार्यकर्तओं पर ही भारी पड़ रही है। भाजपा के प्रवक्ता अपने फोन स्विच ऑफ रखने को मजबूर हो गये हैं?

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