यूपी,पंजाब,हरियाणा की शराब कैसे आ रही उत्तराखण्ड!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार कहने को तो शराब से राजस्व प्राप्त करने के लिए हमेशा अगली पक्ति में खडी हुई दिखाई देती है लेकिन कोरोना काल में सीमायें सील और उत्तराखण्ड में चारो ओर लगे कफ्र्यू में शराब की दुकानें बंद होने के बावजूद किसकी शह पर उत्तराखण्ड में यूपी, पंजाब, हरियाणा की शराब आ रही है यह सरकार पर एक बडा प्रश्नचिन्ह लगा रही है? अगर उत्तराखण्ड में शराब की तस्करी का खेल देखकर भी सरकार व उसका सिस्टम घृतराष्ट्र बना हुआ है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में शायद सरकार कहीं खो गई है?
उल्लेेखनीय है कि उत्तराखण्ड में कोरोना कफ्र्यू लगने के बाद सरकार ने अंग्रेजी व देशी शराब के ठेके बंद करा रखे हैं लेकिन इसके बावजूद भी उत्तराखण्ड के हर जनपद में शराब पीने के शौकीनों को शराब मिल रही है यह सरकार के सरकारी सिस्टम पर एक बडा प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। गजब बात तो यह है कि राजधानी में ही कहने को तो शराब ठेके बंद हैं लेकिन उसके बावजूद भी कई बार पुलिस ने कुछ ठेकों से शराब तस्करी करते हुए पकडी जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शराब तस्करी करने वालों को सरकारी सिस्टम का कोई खौफ नहीं है? राजधानी के चप्पे-चप्पे में अंग्रेजी शराब की बिक्री पर्दे के पीछे से होती आ रही है और जो शराब की बोतल सात-आठ सौ रूपये की बताई जा रही है उसकी कीमत शराब तस्कर सोलह सौ से लेकर अठारह सौ रूपये वसूल रहे हैं। सवाल यह खडे हो रहे हैं कि जब सरकार ने शराब ठेकों को बंद करने का आदेश दिया तो फिर आबकारी विभाग ने उन शराब ठेकों को सीलबंद क्यों नहीं किया? बतादें कि कोरोना की पहली लहर में भी शराब ठेके बंद होने के बावजूद ठेके संचालकों ने अपनी शराब ऊंचे दामों पर बेची और सरकारी सिस्टम स्टॉक चैक करने के दौरान कोई कार्यवाही कर पाया हो ऐसा देखने को नहीं मिल पाया था? हैरानी वाली बात है कि राज्य की सीमायें सील हैं लेकिन यूपी की देशी व अंग्रेजी उसका क्वाटर डेढ सौ से दो सौ रूपये में शहर के अन्दर बिक रहा है इसी तरह से चण्डीगढ की ‘कैप्टन ब्लूÓ का क्वाटर भी तीन सौ रूपये में शराब तस्कर बेच रहे हैं। उत्तर प्रदेश से आ रही रॉयल चैलेंज का क्वाटर साढे तीन सौ रूपये में बिक रहा है। वहीं हरियाणा की ‘रॉयल ग्रीनÓ का क्वाटर भी साढे तीन सौ रूपये में शहर के अन्दर शराब तस्कर बेचने का खेल खेल रहे हैं। बताया जा रहा है कि पंजाब की शराब ‘जुगलीÓ भी राजधानी में प्रशासन की नाक के नीचे बेची जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाहरी राज्यों से आखिर शराब आ कैसे रही है?

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