टीकाकरण में भी सरकार फिस्ड्डी!

0
162

वैक्सीन में भी ‘लूट का खेल’
ऑक्सीजन, वैल्टीनेटर बैड दिलाने में नाकाम सरकार अब वैक्सीन में भी चारो खाने चित!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में कोरोना काल में जिस तरह से सरकार कोरोना के गंभीर मरीजों को राज्य के सरकारी व प्राईवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन व वैल्टीनेटर बैड दिलाने में जहां चारो खाने चित नजर आई वहीं अब राज्य के अन्दर कोरोना की रोकथाम के लिए लगाये जा रहे वैक्सीन के मिशन में भी सरकार फिस्ड्डी बनती हुई दिखाई दे रही है? 18 से 45 वर्ष की उम्र के युवाओं को वैक्सीन लगाने के लिए सरकार ने पहल शुरू की थी लेकिन चंद दिन में ही वैक्सीन का ऑपरेशन टॉय-टॉय फिस्स होकर रह गया। दूसरी डोज लगाने के लिए सरकारी पोर्टल को जब खंगाला जा रहा है तो उसमें रजिस्ट्रेशन ही नहीं हो रहा और उसके चलते युवा पीढी में प्रचंड बहुमत की सरकार के खिलाफ बडी नाराजगी देखने को मिल रही है। गजब बात तो यह है कि सरकार के सरकारी अस्पतालों में भले ही यह वैक्सीन मौजूद न हो लेकिन राजधानी के एक दो अस्पतालों को कैसे और किसके इशारे पर वैक्सीन मिल रहे हैं यह हैरान करने वाली बात है? सरकार किस तरह से घृतराष्ट्र बनी हुई है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो वैक्सीन पहले प्राइवेट अस्पताल में ढाई सौ रूपये की लगाई जा रही थी वह अब ग्यारह सौ रूपये में लगाई जा रही है और इस टीकाकरण में चल रहे लूट के खेल का शोर सोशल मीडिया पर सुनाई दे रहा है और इससे सरकार के खिलाफ आवाम में बडी नाराजगी देखने को मिल रही है इसका खामियाजा कहीं भाजपा को 2022 में न भुगतना पडे इसको लेकर अभी से ही आशंकाओं का दौर शुरू हो गया है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में बडे पैमाने पर फैले कोरोना ने जिस तरह से राज्यवासियों को एक बडे सकट में डाला और हजारों कोरोना मरीजों को जब अस्पतालों में आईसीयू व वैल्टीनेटर बैड नहीं मिले तो उन्हें आकाल मौत में समाना पडा और उसी से उनके परिवारों में सरकार को लेकर बडी नाराजगी है और उनका मानना है कि जब सरकार अपने राज्यवासियों को स्वास्थ्य सुविधा देने मंे भी फिस्ड्डी साबित हुई है तो फिर ऐसी सरकार से क्या उम्मीद कर सकता है? सरकार कोरोना काल में राज्य के अन्दर जिस तरह से फेल हुई है और राज्यवासियों के मन में डबल इंजन की सरकार को लेकर गुस्से का उबाल है वह भाजपा के लिए आने वाले विधानसभा चुनाव में बडा संकट खडा कर उसे सत्ता से बाहर का रास्ता भी दिखा सकती है? कोरोना मरीजों को अस्पतालों में बैड उपलब्ध न कराने वाली सरकार से राज्यवासियों ने उम्मीद की थी हर इंसान को वैक्सीन लगाया जायेगी जिससे कि इस बीमारी को बडे पैमाने पर आगे बढने से रोका जा सके। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ऐलान किया था कि राज्यवासियों को वैक्सीन लगाई जायेगी और पहले चरण में 45 साल से ऊपर के लोगों को वैक्सीन लगाने का मिशन शुरू हुआ और यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में तो निशुल्क लगाई गई लेकिन प्राईवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाने के लिए ढाई सौ रूपये लिये गये। पहली डोज लगाने वाले व्यक्ति को बताया गया कि 28 दिन से 45 दिन के बीच दूसरी डोज लगेगी और हजारों लोगों का नम्बर जब दूसरी डोज लगाने के लिए आया तो उन्हें पता चला कि 84 दिन बाद दूसरी डोज लगेगी। कुछ समय पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐलान किया था कि 18 साल से 44 साल की उम्र के युवाओं को वैक्सीन लगाई जायेगी और यह वैक्सीन सरकारी अस्पतालों में लगानी शुरू हुई और प्राईवेट अस्पतालों में वैक्सीन लगाने की अनुमति नहीं दी गई। इसी बीच खबरें आई कि कुछ प्राइवेट अस्पताल वैक्सीन लगा रहे हैं और इस वैक्सीन की कीमत उन्हेंाने ग्यारह सौ रूपये रखी हुई है ढाई सौ रूपये में लगने वाली वैक्सीन किसके आदेश पर ग्यारह सौ रूपये की लगाई जा रही है यह किसी की समझ में नहीं आ रहा और इस पर सरकार के मुखिया भी चुप्पी साधे हुये हैं। गजब बात तो यह है कि मुख्यमंत्री खुद स्वास्थ्य मंत्री है उसके बावजूद भी वह अभी तक इस एक्शन में नहीं आये कि प्राईवेट अस्पताल में कहां से यह वैक्सीन आई है और किसके आदेश पर इस वैक्सीन की आपूर्ति अस्पतालों को की गई है। सरकार जिस तरह से वैक्सीन के ऊंचे दाम पर चुप्पी साधे हुये हैं उसका शोर अब सोशल मीडिया पर भी सुनाई देने लगा है और भाजपा के ही चंद राजनेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह टीकाकरण निशुल्क होना चाहिए क्योंकि जब इसे महामारी बताया जा रहा है तो फिर कैसे चंद प्राईवेट अस्पताल ग्यारह सौ रूपये लेकर वैक्सीन लगाने के नाम पर खुली लूट कर रहे हैं और उस पर नकेल लगाने वाला कोई नहीं दिख रहा?

LEAVE A REPLY