देहरादून(प्रमुख संवाददाता)। कोरोना के इस काल मे हर तरफ एक ही मंजर देखने को मिल रहा है। बेबस और लाचार लोग अपनो की जिंदगी बचाने में लगे हुए है। सरकार अफसर कहते है कि इंतजाम पूरे है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। राजधानी के आधा दर्जन प्राईवेट अस्पतालों में कोरोना मरीजों के परिजनों से लूट का धंधा चल रहा है और सरकारी सिस्टम सिर्फ छोटे-मोटे काला बाजारी करने वालों को ही पकडकर इतराने में लगी हुई है उसे ऐसे बेलगाम हो चुके अस्पताल क्यों नजर नहीं आ रहे यह हैरान करने वाली बात है। सरकार के मुखिया के लिए अपने आपको राज्यवासियों का भाग्यविधाता बनने का अच्छा मौका है और इस दौरान वह राज्य के सभी प्राईवेट अस्पतालों का अधिग्रहण कर वहां कोरोना मरीजों का इलाज शुरू करा दें तो राज्य में मौतों का आंकडा इतना शिकुड जायेगा जिसकी शायद किसी को उम्मीद भी न हो?
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भी अफसरों के भरोसे ही चल रहे है। केवल सरकारी हॉस्पिटल पर सभी लोग निर्भर हो गए है। निजी हॉस्पिटल मनमर्जी से लूट मचा रखी है। जब सरकार कह रही है कि हम निजी हॉस्पिटल को पबन उपकरण देने में मदद करेंगे, तो फिर हालात ऐसे क्यो है। बहुत से लोगो की शिकायत है कि निजी हॉस्पिटल लाखों रुपये भर्ती करने के नाम पर ले रहे है, जो सक्षम है, उनको हर सुविधा मिल जा रही है। लेकिन आम आदमी तो दर दर की ठोकर खा रहा है। वर्तमान हालात को देखते हुये मुख्यमंत्री को सीधे हस्तक्षेप करते हुये सख्त निर्णय लेने चाहिये। सभी निजी हॉस्पिटल का अधिग्रहण किया जाय। कोविड मरीजों के उपचार का पूरा खर्चा सरकार उठाये। सभी निजी हॉस्पिटल को कोविड काल मे सरकारी मानते हुए उसी प्रकार की सेवाएं ली जाय। आम जनता को राहत मिले, इसके लिए ठोस निर्णय लिए जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाय, जो रोज राज्य में कोविड के हालातों पर समीक्षा करे।