यमुना का सीना चीर रहे खनन माफिया

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कृष्णा गांव में कृषि भूमि पर मंडराया खतरा
ग्राम प्रधान ने एसडीएम से की जांच और रोक की मांग
बड़कोट/उत्तरकाशी। यमुना घाटी में खनन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। नौगांव विकासखंड की ग्राम पंचायत कृष्णा के बड़ क्यारका एवं राता माये तोक में कथित खनन गतिविधियों से कृषि भूमि को नुकसान की आशंका जताते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और खनन पर रोक लगाने की मांग की है। क्षेत्र पंचायत सदस्य कुलदीप राणा और ग्राम प्रधान कृष्णा ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी बड़कोट को शिकायत पत्र दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यमुना नदी क्षेत्र में भारी मशीनों से खनन किया जा रहा है। इससे नदी के बहाव क्षेत्र के साथ आसपास की कृषि भूमि पर कटाव का खतरा बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने खनन की अनुमति, निर्धारित पट्टा क्षेत्र और मौके पर हो रही गतिविधियों की जांच कराने की मांग की है। खनन अधिकारी उत्तरकाशी प्रदीप कुमार ने बताया कि यमुना घाटी में जिस स्थान को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है, वहां पहले से पट्टा स्वीकृत है। उन्होंने कहा कि सोमवार को जांच टीम मौके पर जाएगी। जांच के बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में स्वीकृत पट्टा है तो उसकी निर्धारित सीमा, खनन की गहराई, मशीनों के इस्तेमाल और नदी क्षेत्र में गतिविधियों की जांच मौके पर होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कई बार पट्टे की आड़ में स्वीकृत सीमा से बाहर भी खनन की शिकायतें सामने आती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि नदी क्षेत्र में भारी मशीनों के पहुंचने के लिए बनाए गए रास्ते या रैंप स्वीकृत हैं अथवा नहीं। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मामले में अब खनन विभाग की प्रस्तावित जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच टीम के मौके पर पहुंचने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत वाले क्षेत्र में खनन स्वीकृत पट्टा सीमा के भीतर हो रहा है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। ग्रामीणों की नजर अब सोमवार को होने वाली जांच और उसके बाद विभागीय कार्रवाई पर टिकी है।

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