एफआईआर को लेकर संसद में गरजे थे खरगे
अब शुद्धिकरण मामले का सच पता करेंगे एसपी क्राईम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून/हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की हल्द्वानी में हुई रैली के बाद वहां का शुद्धिकरण किये जाने को लेकर संसद में मामला गूंजा था और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस मामले पर अपनी बडी नाराजगी प्रकट करते हुए दोषियों के खिलाफ मुकदमा एससीएसटी के तहत करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। वहीं संसद में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष ने भी इस मामले में एफआईआर करने को लेकर प्रधानमंत्री के पाले में गेंद फेंकी थी और यह मामला नैनीताल उच्च न्यायालय में भी पहुंचा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास कूच करके सरकार को दहाड़ लगाई थी कि अगर शुद्धिकरण मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो वह खामोश नहीं बैठेंगी। देहरादून से लेकर दिल्ली तक जिस एफआईआर के लिए खूब हल्ला मचा आखिरकार आज उस मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। शुद्धिकरण मामले में पुलिस ने बहुत देर से मुकदमा दर्ज किया उसका खामियाजा उसे उठाना पड़ सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के हल्द्वानी दौरेे से कुछ घंटे पहले शुद्धिकरण मामले में एफआईआर दर्ज होने से अब एक नया तूफान मचने की संभावना प्रबल हो गई है।
रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद अब पुलिस जांच की चौखट तक पहुंच गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तराखंड दौरे से कुछ घंटे पहले हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने इस मामले में पहली एफआईआर दर्ज कर ली। अधिवक्ता अंजू की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि एफआईआर में फिलहाल किसी व्यक्ति को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक बयानबाजी तेज थी। आरोप लगाया गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद परिसर में कथित तौर पर शुद्धिकरण कार्यक्रम किया गया। इसको लेकर शिकायत पुलिस तक पहुंची, जिसके आधार पर हल्द्वानी कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। अब तक सामने आए घटनाक्रम में यह पहली एफआईआर है, जिसके बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच एसपी क्राइम डॉ. जगदीश चंद्र को सौंपी गई है। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल के साथ ही घटनास्थल से जुड़े वीडियो फुटेज, सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री और अन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जाएगा। पुलिस का प्रयास रहेगा कि कथित कार्यक्रम में शामिल लोगों की पहचान की जा सके और घटना का पूरा क्रम सामने लाया जा सके।
एफआईआर में फिलहाल किसी व्यक्ति का नाम आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी पहल किस स्तर पर हुई थी।
रामलीला मैदान की घटना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर पहले ही शुरू हो चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस जांच इस पूरे विवाद का अगला केंद्र बन गई है। जांच में वीडियो और अन्य साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो पुलिस उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है। वहीं जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम के पीछे कौन लोग शामिल थे।