उत्तराखण्ड में तेजी से चल रहा

0
4

एसआईआर का बडा ऑपरेशन
अब वोटर लिस्ट की हो रही आरपार की जांच
मतदाता सूची की चल रही सर्जिकल जांच
एसआईआर की जांच में नेता और अफसर भी शामिल
देहरादून (विशेष ब्यूरो)। उत्तराखण्ड में 2027 से पहले एसआईआर का बडा ऑरपेशन चल रहा है और वोटर लिस्ट की आरपार जांच के लिए चुनाव आयोग ने अपनी टीमों को मैदान में उतार रखा है। वोटर लिस्ट का सबसे बडा अभियान देखकर यह साफ झलक रहा है कि एसआईआर में एक-एक मतदाता के नाम की पड़ताल होगी। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की सर्जिकल जांच का बडा अभियान राज्यभर में चला दिया है और यही कारण है कि एसआईआर के इस ऑपरेशन की जद में कई राजनेता और वरिष्ठ अफसर भी आ रखे है जिससे राज्य के अन्दर एक नई हलचल भी मची हुई है। चुनाव से पहले एसआईआर का सियासी विस्फोट कई रसूकदारों की नींद उड़ाये हुये है और अब नामों को लेकर आपत्तियों पर जो संग्राम कांग्रेस ने शुरू किया है उससे उत्तराखण्ड के अन्दर का राजनीतिक तापमान गर्मा गया है।
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब निर्णायक रफ्तार पकड़ ली है। चुनावी रणभेरी बजने से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान को पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ा दिया है। इसका मकसद स्पष्ट है। मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाना, ताकि लोकतंत्र के सबसे बड़े पर्व में केवल पात्र मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद प्रदेश के सभी जिलों में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। जिलाधिकारी, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचन अधिकारी (एईआरओ), बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और सेक्टर अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची का गहन सत्यापन कर रहे हैं। बूथ स्तर पर घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम, पते और अन्य विवरणों का मिलान किया जा रहा है। जहां कहीं भी मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित अथवा अन्य कारणों से अपात्र हो चुकी प्रविष्टियां मिल रही हैं, वहां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही ऐसे पात्र नागरिकों के नाम भी सूची में जोड़े जा रहे हैं जो किसी कारणवश अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह अभियान केवल औपचारिक पुनरीक्षण नहीं है, बल्कि मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाने की व्यापक कवायद है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक दावा और आपत्ति का समयबद्ध परीक्षण किया जाए तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि को अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले दूर किया जाए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। प्रदेशभर में चल रहे इस अभियान पर राजनीतिक दलों की भी पैनी नजर है। विधानसभा चुनाव से पहले तैयार होने वाली अंतिम मतदाता सूची ही चुनाव का आधार बनेगी। ऐसे में सभी दल अपने-अपने बूथ स्तर के प्रतिनिधियों के माध्यम से मतदाता सूची का परीक्षण कर रहे हैं और जहां आवश्यकता महसूस हो रही है, वहां नियमानुसार दावे एवं आपत्तियां भी दर्ज करा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी रणनीतियों का भी महत्वपूर्ण आधार बनेगी।
चुनाव आयोग लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी अपात्र प्रविष्टि अंतिम सूची का हिस्सा न बने। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपने नाम, पते तथा अन्य विवरणों का मिलान अवश्य कर लें। यदि किसी प्रकार की त्रुटि हो या किसी पात्र व्यक्ति का नाम सूची में दर्ज न हो, तो निर्धारित समय के भीतर आवेदन कर उसे ठीक कराया जा सकता है। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चल रहा यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद चुनाव की मजबूत नींव तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सत्यापन अभियान और तेज होगा तथा अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक निर्वाचन विभाग की गतिविधियां पूरे प्रदेश में जारी रहेंगी। यही सूची वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आधारशिला बनेगी और इसी पर पूरे चुनावी समीकरण टिके होंगे।

LEAVE A REPLY