सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी क्यों रोकी जा रही खरीद-फरोख्त?
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
विकासनगर (मनोज सैनी)। जन संघर्ष मोर्चा ने सवाल दागा है कि सीलिंग भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना से आमजन की नींद हराम हो गई है। मोर्चा अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि अक्टूबर 1975 से पूर्व सभी भूमि सीलिंग से मुक्त हैं लेकिन उसके बावजूद भी तहसील प्रशासन द्वारा उक्त भूमि की खरीद-फरोख्त पर भी रोक लगा दी गई है जिससे सरकार को भारी राजस्व की हानि हो रही है लेकिन मोर्चा अब पीडितों की लडाई लडेगा तथा जल्द जिला प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखकर आम जनमानस को राहत दिलाने की पहल करेगा। एक बार फिर सीलिंग भूमि विवाद ने तूल पकड लिया है और नया विवाद चाय बगान सीलिंग भूमि पर है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी सीलिंग भूमि के रोक के चलते जन संघर्ष मोर्चा ने प्रशासन को ललकारा है।
देहरादून जनपद में चाय बागान सीलिंग भूमि को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। जन संघर्ष मोर्चा ने आरोप लगाया है कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद तहसील स्तर पर ऐसी भूमि की खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज पर भी रोक लगा दी गई है, जो कानूनन सीलिंग अधिनियम के दायरे में नहीं आती। मोर्चा का कहना है कि इससे हजारों भू-स्वामी, भवन स्वामी और काश्तकार अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं, जबकि सरकार को भी पंजीकरण न होने से राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रविवार को पत्रकार वार्ता में जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन, बदामावाला, अंबाड़ी, रायपुर, जीवनगढ़, कंडोली, कांवली, हरबंसवाला, मोहकमपुर खुर्द, बंजारावाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूकावाला, मिट्ठी बेहड़ी, लाडपुर और नत्थनपुर सहित कई क्षेत्रों में चाय बागान सीलिंग भूमि के नाम पर वर्षों से लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 2697ध्1984 में 24 अक्टूबर 1996 को दिए गए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि उत्तर प्रदेश सीलिंग अधिनियम की धारा 6(3) के तहत सीलिंग कानून से मुक्त रहेगी। इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2023 में जारी आदेशों के आधार पर तहसील स्तर पर कई स्थानों पर ऐसे मामलों में भी रोक लगा दी गई, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के दायरे से बाहर हैं।
नेगी ने कहा कि प्रशासन ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण सीलिंग आरोपण अधिनियम की धारा 6(1)(घ) और 6(2) के तहत 12 जुलाई 2023 और 16 मई 2023 को जारी निर्देशों के अनुपालन में संबंधित भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने के निर्देश दिए। लेकिन इन आदेशों के क्रियान्वयन के दौरान यह नहीं देखा गया कि संबंधित भूमि कब खरीदी गई, उसका वास्तविक स्वामित्व क्या है और वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत सीलिंग से मुक्त है या नहीं। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की भी रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज रुक गई, जिनका सीलिंग कानून से कोई लेना-देना नहीं है। मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि कई मामलों में मूल भू-स्वामी ने 10 अक्टूबर 1975 से पहले ही अपनी भूमि बेच दी थी। बाद के वर्षों में वही भूमि वैधानिक रूप से कई अन्य लोगों के नाम भी हस्तांतरित हुई, लेकिन बिना मूल बैनामों और रजिस्ट्रियों की जांच किए पूरी श्रृंखला को ही सीलिंग विवाद से जोड़ दिया गया। उनका कहना था कि यह प्रक्रिया न केवल कानूनी रूप से गलत है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तथ्यात्मक जांच के लगाए गए प्रतिबंधों के कारण आम नागरिक वर्षों से अपनी ही जमीन का क्रय-विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। बैंक ऋण, मकान निर्माण, पारिवारिक बंटवारा और अन्य वैधानिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। अधिवक्ताओं को भी अनावश्यक कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि रजिस्ट्रियों पर रोक के कारण सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि यदि कोई भूमि वास्तव में सीलिंग कानून की जद में आती है तो जिला प्रशासन को उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन बिना जांच-पड़ताल सभी मामलों पर एक समान रोक लगाना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को प्रत्येक प्रकरण में भूमि का रिकॉर्ड, खरीद का वर्ष, स्वामित्व और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का परीक्षण कर अलग-अलग निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि जन संघर्ष मोर्चा शीघ्र ही पूरे मामले को दस्तावेजों और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के साथ जिला प्रशासन के समक्ष रखेगा। यदि इसके बाद भी प्रभावित लोगों को राहत नहीं मिली तो मोर्चा व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा। पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार एवं प्रवीण शर्मा श्पिन्नीश् भी उपस्थित रहे।