सत्ता नहीं, विश्वास की राजनीति

0
5

जनता के मित्र बनकर उभरे धामी
उत्तराखण्ड की राजनीति में भरोसे का दूसरा नाम पुष्कर
जनता से सीधा संवादः मित्र और मार्गदर्शक बनकर उभरे सीएम
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की सियासत में युवा मुख्यमंत्री ने आवाम का दिल जीतने के लिए जो लम्बी लकीर खींची है उस लकीर को जीवन में कोई पार कर पायेगा ऐसा सम्भव ही नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री ने जनता का मित्र और मार्गदर्शक बनकर आवाम का दिल जीतने का जो जज्बा दिखाया है उससे वह उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि देशभर में दिल अजीज मुख्यमंत्री का खिताब अपने सर पर सजा चुके हैं। जनता के दिलों तक पहुंचे मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चलाकर सियासत में जो संदेश दिया है वह उन्हें आवाम की पाठशाला में टॉपर कर चुका है। मुख्यमंत्री ने एक ही पैमाना तय किया है कि सत्ता नहीं वह विश्वास की राजनीति में यकीन रखते हैं और सबका साथ, सबका विकास ही उनका मूलमंत्र है।
उत्तराखंड की राजनीति में सत्ता के कई चेहरे आए और चले गए, लेकिन कुछ नेता अपने पद से नहीं, बल्कि अपने व्यवहार से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम आज उन्हीं नेताओं में शुमार किया जा रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में यह संदेश देने का प्रयास किया कि मुख्यमंत्री का दायित्व केवल शासन चलाना नहीं, बल्कि हर संकट, हर पीड़ा और हर उम्मीद के साथ खड़ा होना भी है। आज प्रदेश के अनेक लोग उन्हें केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि श्जनता का मित्र और मार्गदर्शकश् कहकर संबोधित करते हैं। इसकी वजह केवल राजनीतिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि वह कार्यशैली है जिसमें आम नागरिक की आवाज सीधे सत्ता के शीर्ष तक पहुंचती दिखाई देती है। उत्तराखंड भाजपा के इतिहास में लगातार पाँच वर्ष तक मुख्यमंत्री रहने वाले पहले नेता बनकर धामी ने राजनीतिक स्थिरता का नया अध्याय लिखा। जिस राज्य में कभी नेतृत्व परिवर्तन आम बात माना जाता था, वहीं धामी ने निरंतरता, निर्णायक नेतृत्व और संगठन के विश्वास के साथ यह साबित किया कि जनविश्वास सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत होता है।
आपदा के कठिन क्षण हों, किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा हो, या विकास कार्यों की जमीनी समीक्षाकृधामी कई अवसरों पर स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने यह संदेश दिया कि नेतृत्व का अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि हालात को अपनी आंखों से देखना और पीड़ित के कंधे पर हाथ रखकर उसका हौसला बढ़ाना भी है। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि सत्ता का अहंकार कभी उनके व्यक्तित्व पर हावी होता दिखाई नहीं दिया। जनता दरबार हो, गांव की चौपाल हो या किसी आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षणकृउन्होंने संवाद को शासन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाने का प्रयास किया। यही कारण है कि समर्थक उन्हें संवेदनशील, सहज और जनसरोकारों से जुड़ा मुख्यमंत्री मानते हैं।
राजनीति में उपलब्धियों का अंतिम फैसला जनता करती है, लेकिन इतना तय है कि पुष्कर सिंह धामी ने अपने नेतृत्व की शैली से यह साबित करने का प्रयास किया कि सरकार का असली चेहरा वही होता है, जो जनता के सुख-दुख में सबसे पहले दिखाई दे। यही शैली उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाती है और उन्हें केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का प्रतीक बनाने की दिशा में खड़ा करती है।

LEAVE A REPLY