पांच मिशन पर आगे बढ़ता राजभवन

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विकास की नई इबारत लिख रहे राज्यपाल
एआई से आत्मनिर्भर गांव तक राज्यपाल के पांच मिशन की बडी तस्वीर
महिला सशक्तिकरण और पलायन पर कर रखा फोकस
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के भविष्य का रोड-मेप बनाने के लिए राज्यपाल ने पांच मिशन पर अपना फोकस करने का जो संकल्प लिया है उस संकल्प को वह धरातल पर विजन में बदलने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। रिवर्स पलायन से एआई तक, उत्तराखण्ड के लिए नई दिशा तय कर रहा राजभवन। महिला शक्तिकरण और पलायन पर राज्यपाल का फोकस है और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड पर उनका जोेर है। उत्तराखण्ड के धार्मिक स्थलों और पर्यटक स्थलों को हमेशा गुलजार रखने का जो विजन दिखाई दे रहा है उसके चलते उत्तराखण्ड एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। नशामुक्त उत्तराखण्ड अभियान को जन आंदोलन बनाने का लक्ष्य है तो पैतीस लाख विद्यार्थियों को नशामुक्ती की शपथ दिलाने की भी पहल उनके विजन में है। वहीं राज्य के अस्सी से अधिक केन्द्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ नियमित बैठक कर रहे हैं।
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने 15 सितंबर 2021 को पदभार संभालने के बाद राजभवन की भूमिका को केवल औपचारिक दायित्वों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने राज्य के दीर्घकालिक विकास को केंद्र में रखते हुए पांच प्रमुख मिशन तय किए और बीते वर्षों में इन्हीं विषयों पर लगातार काम किया। इनमें रिवर्स पलायन, महिला सशक्तीकरण एवं बालिका शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं तकनीक, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि तथा शहद उत्पादन, अरोमा और होमस्टे जैसे गेमचेंजर क्षेत्रों को बढ़ावा देना प्रमुख रहे। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहलें सामने आईं। श्वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्चश् अभियान के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों को उत्तराखंड के विकास से जुड़े विषयों पर शोध कार्यों से जोड़ा गया। वहीं उत्तराखंड कॉलेज एफिलिएशन पोर्टल लागू होने से महाविद्यालयों की संबद्धता प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हुई। यूनिवर्सिटी कनेक्ट उत्तराखंड और यूनिसंगम मोबाइल ऐप के माध्यम से विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय और संवाद को भी नई गति मिली। राजभवन ने तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को प्रशासन से जोड़ने की दिशा में भी कई प्रयोग किए। लोक भवन में एआई आधारित स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम, ई-ऑफिस, ई-पास, डिजिटल डैशबोर्ड और लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए गए। देहरादून और नैनीताल स्थित राजभवन का वर्चुअल टूर शुरू कर आमजन के लिए डिजिटल माध्यम से भ्रमण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। दोनों राजभवन परिसरों में बारकोड आधारित इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया गया।
राजभवन की डिजिटल पहल यहीं तक सीमित नहीं रही। मैत्री चौटबॉट के जरिए राज्यपाल की गतिविधियों और कार्यक्रमों की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। श्गार्गी नारी शक्तिश् चौटबॉट महिलाओं को कानूनी, स्वास्थ्य, करियर और वित्तीय परामर्श से जुड़ी जानकारी प्रदान कर रहा है, जबकि इटरनल गुरु एआई चौटबॉट के माध्यम से गुरबाणी का डिजिटल प्रसार किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर राज्यपाल ने प्रदेश के 80 से अधिक केंद्रीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ नियमित संवाद की परंपरा विकसित की। उन्होंने उत्तराखंड के सभी जिलों का दौरा किया और 51 में से 30 वाइब्रेंट विलेज का भ्रमण कर स्थानीय स्तर पर योजनाओं की समीक्षा की। कई जिलों में रात्रि विश्राम कर अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा और जनसमस्याओं के समाधान पर भी विशेष जोर दिया। राज्यपाल ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की बढ़ती आय और उनके आर्थिक सशक्तीकरण को अपने कार्यकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में शामिल किया है। इसके अलावा राजभवन की पहल पर 108 प्रकाशनों का संपादन और प्रकाशन कराया गया, जिससे विभिन्न विषयों पर किए गए कार्यों का दस्तावेजीकरण सुनिश्चित हो सका।
आगे की प्राथमिकताओं में राज्यपाल ने उत्तराखंड में एआई संस्कृति विकसित करने, तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देने और नशा मुक्त उत्तराखंड अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने का लक्ष्य तय किया है। इसी क्रम में प्रदेश के करीब 35 लाख विद्यार्थियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाने की पहल भी प्रस्तावित है। राज्यपाल का मानना है कि तकनीक, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को साथ लेकर ही उत्तराखंड को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

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