सुशासन की नई मिसाल बन सकता है ‘मुख्यमंत्री उड़न दस्ता’

0
7

भ्रष्टाचारियों और खनन माफियाओं पर होगी सीधी चोट
उड़न दस्ते से पारदर्शी शासन और अवैध खनन पर लगाम का दिखेगा मजबूत मॉडल
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अब आवाम की चाहत है कि राज्य में भ्रष्टाचार और अवैध खनन पर शिकंजा कसने के लिए मुख्यमंत्री उड़न दस्ता बनना चाहिए जिससे कि भ्रष्टाचारियों और खनन माफियाओं पर सीधी चोट की जा सके। मुख्यमंत्री ने अगर इस दस्ते को बनाने के लिए मास्टर स्ट्रोक चला तो यह तय है कि समूचा प्रशासन जवाबदेह होगा और राज्य के अन्दर पारदर्शी शासन और अवैध खनन पर लगाम लगाने का मजबूत मॉडल दिखाई देगा। उत्तराखण्ड में आज भी भ्रष्टाचार और अवैध खनन का तांडव रूकने का नाम नहीं ले रहा है। सवाल खडे हो रहे हैं कि जब खनन माफिया सरकार का सफेद सोना चोरी कर रहे हैं तो उनके खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज क्यों नहीं होता क्योंकि सरकार का सफेद सोना चोरी करना उसी तरह से अपराध है जैसे कोई व्यक्ति छोटी से लेकर बडी चोरी को अंजाम देकर चोरी का मुकदमा झेलता है। उत्तराखण्ड के अन्दर अवैध खनन और भ्रष्टाचार से आरपार की जंग लडने के लिए मुख्यमंत्री अपना उडन दस्ता बनाने के लिए आगे आये तो उससे राज्य के अन्दर बडा संदेश जायेगा कि मुख्यमंत्री अवैध खनन और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली जंग लडने के लिए आगे आ गये हैं।
उत्तराखंड ने पिछले कुछ वर्षों में सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के कई उदाहरण देखे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार ने प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने, भ्रष्टाचार के प्रति ष्जीरो टॉलरेंसष् की नीति अपनाने और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर लगातार जोर दिया है। लेकिन बदलते समय के साथ सुशासन की कसौटी भी बदल रही है। अब केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है कि उनका पालन हर स्तर पर पूरी ईमानदारी से हो। ऐसे समय में उत्तराखंड में श्मुख्यमंत्री उड़न दस्ता जैसी एक विशेष एन्फोर्समेंट एवं सतर्कता इकाई का गठन राज्य के प्रशासनिक ढांचे को नई मजबूती दे सकता है। हरियाणा में यह व्यवस्था औचक निरीक्षण, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और विभिन्न विभागों की जवाबदेही तय करने में प्रभावी मानी जाती है। उत्तराखंड जैसे संवेदनशील और विकासशील राज्य में भी ऐसा तंत्र प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत कर सकता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के सीधे पर्यवेक्षण में कार्य करने वाला यह विशेष दस्ता बिना पूर्व सूचना के तहसीलों, परिवहन कार्यालयों, खनन क्षेत्रों, राजस्व विभाग, नगर निकायों, सरकारी अस्पतालों, विद्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों का निरीक्षण कर सकता है। इसका सबसे बड़ा संदेश यही होगा कि व्यवस्था पर हर समय निगरानी है और कानून से ऊपर कोई नहीं। अवैध खनन के खिलाफ यह व्यवस्था सबसे प्रभावी साबित हो सकती है। उत्तराखंड की नदियां, पर्वतीय क्षेत्र और प्राकृतिक संसाधन राज्य की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना भी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि उड़न दस्ता अचानक खनन स्थलों, स्टोन क्रशरों, भंडारण स्थलों, परिवहन मार्गों और चेक पोस्टों का निरीक्षण करे, तो नियमों के उल्लंघन, ओवरलोडिंग, बिना अनुमति खनन और अवैध परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। इससे सरकारी राजस्व की सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। इतना ही नहीं, यह दस्ता सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों की गुणवत्ता, सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता और जनशिकायतों के निस्तारण की भी वास्तविक स्थिति का आकलन कर सकता है। कई बार फाइलों में सब कुछ ठीक दिखाई देता है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग होती है। औचक निरीक्षणों की व्यवस्था इस अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उत्तराखंड तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निवेश, पर्यटन, आधारभूत संरचना और औद्योगिक विकास के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता को भी समान गति से आगे बढ़ाना होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यदि राज्य में श्मुख्यमंत्री उड़न दस्ताश् जैसी व्यवस्था लागू करने की दिशा में पहल करते हैं, तो यह केवल एक नई टीम का गठन नहीं होगा, बल्कि सुशासन को संस्थागत रूप से और मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार साबित हो सकता है। आज आवश्यकता केवल कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था की है जो हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करे। यदि ईमानदार व्यवस्था को और सशक्त बनाना है, भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार करना है और अवैध खनन जैसे मामलों पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करना है, तो मुख्यमंत्री उड़न दस्ता उत्तराखंड के लिए एक प्रभावी और दूरदर्शी कदम साबित हो सकता है।

LEAVE A REPLY