देवभूमि में छल-प्रलोभन पर धामी का वार

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धर्मांतरण कानून को मिली नई धार
आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले शैतानों पर एक्शन की बरसात
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर दो टूक संदेश दे रखा है कि आस्था का सम्मान होगा लेकिन बल, प्रलोभन, दबाव और धोखाधडी के जरिए धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए उत्तराखण्ड में अब कोई जगह नहीं है। धर्मांतरण पर मुख्यमंत्री का सबसे बडा दाव देखकर धर्मांतरण कराने वाले शैतानों में खलबली मच चुकी है और उन्हें यह साफ नजर आ चुका है कि राज्य में अगर उन्होंने छल और प्रलोभन से किसी का भी धर्मांतरण कराने के लिए अपने कदम आगे बढाये तो उन पर सरकार का सख्त एक्शन होना तय है। मुख्यमंत्री ने धर्मांतरण कानून को सख्त बनाकर उसे जो नई धार दी है उससे आस्था के साथ खिलवाड करने वाले शैतानों पर अब मुख्यमंत्री के एक्शन की जो बरसात होनी शुरू हुई है उससे वह उत्तराखण्ड से पलायन करने के लिए मजबूर हो चुुके हैं।
उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में अपनी स्पष्ट कार्यशैली के लिए पहचान बना चुके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अवैध धर्मांतरण के मुद्दे पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए यह संदेश दिया है कि यदि कोई व्यक्ति बल, प्रलोभन, छल, धोखाधड़ी, दबाव या किसी अन्य अवैध माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कानून पूरी कठोरता के साथ लागू होगा। धामी सरकार का कहना है कि संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा से धर्म मानने और उसका पालन करने का अधिकार देता है। लेकिन किसी की आर्थिक मजबूरी, सामाजिक परिस्थितियों, भय, लालच या झूठे वादों का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन कराना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार यह कहते रहे हैं कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। चारधाम, सिद्धपीठों और प्राचीन धार्मिक परंपराओं से जुड़ी इस भूमि की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना सरकार का दायित्व है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून को और मजबूत करने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। सरकार का मानना है कि सख्त कानून का उद्देश्य किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उन संगठित प्रयासों पर रोक लगाना है जो छल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि कानून में कठोर प्रावधानों के साथ जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को लेकर व्यापक चर्चा है। समर्थकों का कहना है कि इससे अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी। वहीं सरकार का स्पष्ट मत है कि उसकी प्राथमिकता कानून का निष्पक्ष पालन, सामाजिक सद्भाव और प्रत्येक नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून और दंगारोधी जैसे कदमों के बाद धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्त बनाने की पहल को भी धामी सरकार अपने सुशासन और कानून के राज की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। सरकार का संदेश साफ है। देवभूमि में आस्था का सम्मान होगा, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं होगा।

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