डोबाल ने फर्जी आईपीएस का उतारा ‘भूत’
आईपीएस, रॉ, सेना का अफसर बना महाठग
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के रिटायर्ड आईएएस के पुत्र को इस बात का भ्रम था कि वह चाहे फर्जी आईपीएस बनकर सड़कों पर किसी को ठगता रहे या रॉ और सेना का अफसर बनकर वह आम जनमानस को ठगने का खेल खेलेगा तो पुलिस उस पर हाथ नहीं डाल पायेगी। रिटायर्ड आईएएस अफसर के नटवरलाल पुत्र ने राजधानी के अन्दर महाठगी का खेल खेलना शुरू किया तो इसकी भनक जनपद के पुलिस कप्तान को लगी तो उन्होंने इस महाठग फर्जी आईपीएस का भूत उतारने के लिए खुद कमान अपने हाथों में ली और उसके बाद उन्होंने इस महाठग को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए सारे सबूत एकत्र करने शुरू कराये और आखिरकार पुलिस कप्तान ने राजपुर थाना प्रभारी को जनपद के अन्दर महाठगी करने वाले रिटायर्ड आईएएस के पुत्र को सलाखों के पीछे पहुंचाने का टास्क दिया तो राजपुर थाना प्रभारी ने इस महाठग को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। महाठग के कब्जे से पुलिस ने फर्जी आई कार्ड, पुलिस और आर्मी की वर्दी और एक वायरलेस सेट भी बरामद किया है जिसके दम पर यह महाठग डोबाल के शहर में महाठगी करने का तांडव कर रहा था। यह महाठग काफी पहले उस समय सुर्खियों में आया था जब उसने एक पूर्व विधायक के पुत्र पर फर्जी मामला दर्ज कराकर उन्हें राज्य में विलेन बनाने का खेल खेला था।
खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी रॉ एजेंट, कभी सीआरपीएफ का वरिष्ठ अधिकारी तो कभी सेना का अफसर बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लेने वाला शातिर ठग आखिरकार दून पुलिस के शिकंजे में आ गया। पुलिस कप्तान प्रमेन्द्र सिंह डोबाल की सटीक रणनीति और राजपुर थाना प्रभारी पीडी भट्ट की तेज कार्रवाई ने उस फर्जी अफसर का नकाब उतार दिया, जो वर्दी, फर्जी आईडी और विजिटिंग कार्ड के दम पर लोगों के सपनों का सौदा कर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। राजपुर थाना क्षेत्र में दर्ज दो अलग-अलग मुकदमों की जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी आर. यशोवर्धन ने एक व्यक्ति से दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराने का झांसा देकर पन्द्रह लाख रुपये ठग लिए। इसके बाद उसने एक महिला डॉक्टर को रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसलटेंट की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 4.60 लाख रुपये हड़प लिए। दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने तत्काल गिरफ्तारी का आदेश दिया था।
राजपुर थाना प्रभारी ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी को मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसके पिता सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं और बचपन से उसका सपना आईपीएस अधिकारी बनने का था। कई वर्षों तक यूपीएससी की तैयारी करने के बावजूद सफलता नहीं मिली तो उसने फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया। वह अपने पहनावे, बातचीत और फर्जी पहचान पत्रों के दम पर लोगों को विश्वास में लेता और नौकरी, टेंडर तथा सरकारी काम कराने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लेता था। तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से पांच फर्जी आईडी कार्ड, आठ फर्जी विजिटिंग कार्ड, पच्चीस पुलिस और आर्मी के लोगो, तीन जोड़ी पुलिस आर्मी की वर्दी, तीन फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया। बरामद सामग्री से साफ है कि आरोपी लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था।
दून पुलिस अब आरोपी के पूरे नेटवर्क, बैंक खातों और उन सभी मामलों की पड़ताल कर रही है, जिनमें उसने फर्जी अधिकारी बनकर लोगों से ठगी की। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने आमजन से अपील की है कि नौकरी, टेंडर या सरकारी कार्य कराने के नाम पर किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं और संदेह होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।