सत्ता से सेवा का सफर

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विकास की नई इबारत लिखने जनता के बीच उतरी धामी टीम
सुशासन का नया अध्याय की उड़ान भरते धुरंधर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। पांच साल से धुरंधर बनकर सरकार चला रहे युवा मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में एक के बाद एक धाकड़ फैसले लेकर जिस तरह से राज्य की जनता के दिलों में राज करना शुरू कर रखा है उसने यह दिखा दिया है कि अगर मुख्यमंत्री में विकास करने को लेकर एक बडा विजन हो तो राज्य को गुलजार करने में कभी कोई दिक्कत नहीं आ सकती। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने पर मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार और टीम को जनता की चौखट पर खडा कर रखा है। धामी जनजन के विश्वास को जीतने की दिशा में जिस तरह से आगे बढ़ रहे हैं उससे राज्य की जनता के मन में एक नई उमंग देखने को मिल रही है। धामी का बडा संकल्प है कि जनता के सुझाव से उत्तराखण्ड को और मजबूत करने की दिशा में वह काम करेंगे क्योंकि जनभागीदारी से सरकार को एक ताकत मिलती है और विकास के हर फैसले लेने में उसे कोई दिक्कत नहीं आती। सुशासन का नया अध्याय, जनता के भरोसे विकास की नई उडान पर जिस तेजी के साथ मुख्यमंत्री उड़ रहे हैं उससे मुख्यमंत्री को आशा है कि एक बार फिर 2027 के विधानसभा चुनाव में हर तरफ कमल खिलेगा।
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन की कार्यशैली को केवल सचिवालय और सरकारी दफ्तरों तक सीमित रखने के बजाय उसे आमजन के बीच ले जाने की रणनीति अपनाई है। सरकार का दावा है कि विकास की योजनाओं का वास्तविक मूल्य तभी है, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और जनता स्वयं महसूस करे कि शासन उसके साथ खड़ा है। इसी सोच के साथ प्रदेशभर में ष्जन-जन की सरकारष् की अवधारणा को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रह सकती। शासन का हर अधिकारी, हर विभाग और हर जनप्रतिनिधि जनता के बीच पहुंचे, योजनाओं की जानकारी दे, समस्याओं को सुने और समाधान की प्रक्रिया को तेज करे। सरकार चाहती है कि जनता और प्रशासन के बीच संवाद का ऐसा सेतु बने, जहां शिकायतें भी सीधे सुनी जाएं और विकास की नई संभावनाओं पर भी खुलकर चर्चा हो।
धामी मानते हैं कि किसी भी राज्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता होती है। इसलिए सरकार विकास की दिशा तय करने में आम लोगों की भागीदारी को महत्वपूर्ण मान रही है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से मिलने वाले सुझावों, स्थानीय जरूरतों और जनभावनाओं को भविष्य की योजनाओं में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि विकास तभी स्थायी होगा, जब उसकी नींव जनता की अपेक्षाओं और जरूरतों पर रखी जाए। राज्य सरकार की कोशिश केवल नई परियोजनाओं की शुरुआत तक सीमित नहीं है, बल्कि पहले से संचालित योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे, इसकी भी लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कागजी प्रगति के बजाय धरातल पर परिणाम सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री का मानना है कि शासन की विश्वसनीयता आंकड़ों से नहीं, बल्कि जनता के विश्वास से तय होती है।
प्रदेश में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन, रोजगार और आधारभूत ढांचे से जुड़े कार्यों को गति देने के साथ-साथ सरकार अब जनसंवाद को भी अपनी कार्यशैली का प्रमुख आधार बना रही है। यही कारण है कि विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जनता तक पहुंचने और उनकी राय लेने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री का संदेश साफ है कि सरकार जनता से दूरी बनाकर नहीं, बल्कि जनता के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहती है। आने वाले समय में विकास की नई दिशा भी जनता के सुझावों से तय होगी और सरकार उसी आधार पर ऐसे फैसले लेने का प्रयास करेगी, जो उत्तराखंड की जरूरतों और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हों। सरकार का मानना है कि जब जनता स्वयं विकास यात्रा की भागीदार बनेगी, तभी उत्तराखंड विकास के नए मानक स्थापित कर सकेगा।

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