मंत्रिमंडल पर भरोसा, अधिकारियों से जवाबदेही और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का फार्मूला
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने पांच साल से राज्य के अन्दर विकास, सुशासन और विश्वास की राजनीति करके आवाम के दिलों में जो राज कर रखा है उसी का परिणाम है कि आज मुख्यमंत्री के दमदार फैसलों को जमीन पर उतरते देख राज्य की जनता उनकी मुरीद हो रखी है। मुख्यमंत्री ने अपने आपको हमेशा जनसेवक मानकर ही सरकार चलाने में विश्वास दिखाया है और यही कारण है कि आम जनमानस भी यह मान रही है कि धामी का नेतृत्व एक सरकार नहीं बल्कि एक नई कार्यशैली की वो पहचान बन गई है जिसको देखते हुए भाजपा की बडी लीडरशिप भी मुख्यमंत्री की स्वच्छ राजनीति को खूब सराह रही हैं। मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में अपने मंत्रिमण्डल पर जहां अभेद भरोसा कर रखा है वहीं उन्होंने अधिकारियों को भी जवाबदेही बना रखा है कि वह राज्य की जनता की पीडा सुनने के लिए किस कार्यशैली से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जो नीति अपनाई है उसी के चलते उत्तराखण्ड की शासन व्यवस्था को वह एक नई दिशा देने का प्रयास हमेशा करते आ रहे हैं जिससे राज्य की जनता के सामने डबल इंजन सरकार का इकबाल बुलंद रहे।
उत्तराखंड की राजनीति में नेतृत्व की पहचान केवल भाषणों से नहीं होती, बल्कि फैसलों और उनकी क्रियान्विति से होती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यही रहा कि उन्होंने सरकार को केवल सत्ता संचालन का माध्यम नहीं बनने दिया, बल्कि उसे परिणाम देने वाली व्यवस्था बनाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों पर विश्वास जताया और विभागों को उनके अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी सौंपीं। यही वजह रही कि सरकार का हर विभाग अपने स्तर पर काम करता दिखाई दिया और मुख्यमंत्री स्वयं नियमित समीक्षा के माध्यम से पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए रहे। धामी ने यह समझा कि किसी भी सरकार की सफलता केवल मुख्यमंत्री की सक्रियता से नहीं आती। उसके लिए मंत्रिमंडल का सामूहिक दायित्व और प्रशासन की जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। यही कारण रहा कि उन्होंने कैबिनेट को निर्णय लेने का मंच बनाया और अधिकारियों को उन निर्णयों को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी सौंपी। सचिवालय की समीक्षा बैठकों से लेकर जिलों तक विकास कार्यों की निगरानी इसी सोच का हिस्सा रही।
प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर उनका संदेश हमेशा स्पष्ट रहा कि योजनाओं की सफलता का पैमाना सरकारी फाइलें नहीं, बल्कि जनता तक पहुंचने वाला परिणाम होगा। जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा, समयसीमा तय करना और काम की प्रगति पर सीधी नजर रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बना। अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को खुलकर सराहा गया और जहां ढिलाई दिखाई दी, वहां जवाबदेही भी तय की गई। धामी सरकार ने विकास को किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रखा। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, निवेश, कृषि, उद्योग, पेयजल और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में विभागीय समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया गया। सरकार की सोच रही कि विकास तभी सार्थक होगा जब योजनाएं कागजों से निकलकर गांव और शहर तक दिखाई दें।
राजनीति में अक्सर यह कहा जाता है कि मजबूत नेतृत्व वही होता है, जो अपनी टीम पर भरोसा करता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली में यह भरोसा साफ दिखाई देता है। उन्होंने मंत्रियों को जिम्मेदारी दी, अधिकारियों से जवाबदेही मांगी और खुद समन्वय की भूमिका निभाई। शायद यही कारण है कि सरकार के भीतर निर्णय लेने और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज दिखाई दी। किसी भी सरकार का अंतिम मूल्यांकन जनता करती है। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि उत्तराखंड में शासन की जिस कार्यसंस्कृति को स्थापित करने का प्रयास हुआ, उसमें सामूहिक नेतृत्व, जवाबदेह प्रशासन और विकास को केंद्र में रखने की सोच स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।