कप्तान मैदान में तो दिख रहा कानून का राज

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डोबाल की दिलेरी के कायल हैं दूनवासी
सीओ थे तो एक जान बचाई अब कप्तान बने तो समूचे दूनवासियों की कर रहे रक्षा
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। राजधानी के अन्दर नये पुलिस कप्तान को लेकर आवाम के मन में एक उम्मीद जगी हुई है कि जो डोबाल सीओे रहते हुए अपनी जान को जोखिम में डालकर एक व्यक्ति के प्राणों की रक्षा करते हुए खुद जिंदगी और मौत से जंग लडने से नहीं डरे थे वह डोबाल अब जनपद के पुलिस कप्तान बनकर राजधानीवासियों की रक्षा करने के लिए खुद मैदान में उतर रखे हैं तो उससे जनपद के अन्दर कानून का राज तो कायम होना ही था इसमें कोई अतिशोक्ति नहीं है। पुलिस कप्तान ने मुख्यमंत्री के अपराध और नशामुक्त विजन को धरातल पर उतारने के लिए जिस दिलेरी के साथ इनके खिलाफ एक नई जंग का ऐलान कर रखा है उससे अपराध व नशा माफियाओं में पुलिस कप्तान को लेकर एक बडा डर देखने को मिल रहा है। पुलिस कप्तान ने जनपद के अन्दर सक्रिय पुलिसिंग, जवाबदेही और जन विश्वास को मजबूत करने की दिशा में जो खाका तैयार किया है उससे आज जनपद की आवाम को उनसे बडी उम्मीद है कि वह उनके रक्षक बनकर हमेशा अपराधियों का सर्वनाश करेंगे।
जब कप्तान मैदान में हो, तो कानून का इकबाल भी दिखाई देता है देहरादून में सक्रिय पुलिसिंग, जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूत करने की दिशा में पुलिस कप्तान प्रमेंद्र सिंह डोबाल का नेतृत्व चर्चा में। पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं होती, बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और जनता के विश्वास का भी प्रतीक होती है। किसी जिले की कानून व्यवस्था काफी हद तक उस नेतृत्व पर निर्भर करती है जो पूरी पुलिस व्यवस्था को दिशा देता है। देहरादून में पुलिस कप्तान प्रमेंद्र सिंह डोबाल के कार्यकाल के दौरान पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई की चर्चा लगातार देखने को मिली है। अपराधियों के खिलाफ अभियान हों, नशा तस्करों पर कार्रवाई, सड़क पर हुड़दंग करने वालों पर शिकंजा, सोशल मीडिया पर वायरल घटनाओं का तत्काल संज्ञान, या संवेदनशील मामलों में तेजी से खुलासे देहरादून पुलिस ने कई मौकों पर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि कानून केवल किताबों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
एक अच्छा पुलिस कप्तान वही माना जाता है जो अपने जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हो। पुलिसकर्मी दिन-रात, धूप-बारिश, त्योहार और छुट्टियों की परवाह किए बिना जनता की सुरक्षा में लगे रहते हैं। ऐसे में उनका मनोबल बनाए रखना, बेहतर कार्यसंस्कृति विकसित करना और उन्हें स्पष्ट दिशा देना भी नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी होती है। यही किसी मजबूत पुलिस नेतृत्व की असली पहचान है। देहरादून जैसे तेजी से विस्तार करते जिले में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। चारधाम यात्रा, पर्यटन, वीआईपी मूवमेंट, बढ़ता शहरी दबाव और अपराध की बदलती प्रवृत्तियां पुलिस के सामने हर दिन नई परीक्षा खड़ी करती हैं। ऐसे माहौल में कानून व्यवस्था को संतुलित रखना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व क्षमता की भी कसौटी है। यह भी सच है कि किसी एक अधिकारी के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब पूरी पुलिस टीम उसी प्रतिबद्धता के साथ काम करे। थाने से लेकर चौकी तक हर पुलिसकर्मी जनता के लिए पुलिस का चेहरा होता है। इसलिए संवेदनशील व्यवहार, निष्पक्ष कार्रवाई और समयबद्ध सुनवाई ही पुलिस की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
देहरादून की जनता की अपेक्षा केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल, त्वरित पुलिस सहायता और भरोसेमंद कानून व्यवस्था है। यदि पुलिस इसी सक्रियता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ती रही तो जनता का विश्वास और मजबूत होगा। अंततः किसी भी पुलिस कप्तान की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल अपराध के आंकड़े नहीं होते, बल्कि यह होता है कि आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करता है और पुलिस के दरवाजे तक कितने विश्वास के साथ पहुंचता है। यही विश्वास किसी भी पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी पूंजी है।यह संस्करण संपादकीय शैली का है, प्रशंसात्मक है, लेकिन इसमें ऐसे दावे नहीं किए गए हैं जिन्हें तथ्य के रूप में सिद्ध करना आवश्यक हो।

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