सादगी से हर दिल जीत रहे धामी

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बच्चों की मुस्कान से लेकर बुजुर्गों के सम्मान तक, हर दिल में धामी
आवाम के बीच रहकर विश्वास की नई मिसाल गढ़ रहे पुष्कर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने सरकार चलाने के लिए जो अंदाज आवाम के सामने रखा उस अंदाज ने तो बडे से लेकर बूढे तक को कायल करके रखा हुआ है। मुख्यमंत्री ने अपने आपको हमेशा जनसेवक मानकर ही सरकार चलाई है और वह चार साल से बेदाग होकर सरकार चलाने में ही विश्वास दिखा रहे हैं। आज राज्य के अन्दर मासूम बच्चे भी मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर खासे उत्साहित होते हैं और उनमें मुख्यमंत्री के साथ सैल्फी लेने का जो शौक उमड़ रहा है उस शौक को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री हमेशा आगे खडे रहते हैं और यही कारण है कि आज मुख्यमंत्री हर दिल अजीज बन चुके हैं।
उत्तराखण्ड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। पिछले चार वर्षों में उन्होंने जिस तरह आमजन के बीच रहकर सरकार चलाने का प्रयास किया है, उसने उन्हें प्रदेश के विभिन्न वर्गों के बीच अलग पहचान दिलाई है। सरकारी कार्यक्रम हो, विकास योजनाओं का निरीक्षण हो, आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा हो या फिर किसी सामाजिक आयोजन में सहभागिताकृमुख्यमंत्री की प्राथमिकता लोगों के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित करने की रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सार्वजनिक जीवन में कई बार यह संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान की दिशा में कार्य करना है। यही कारण है कि उनका अधिकांश समय प्रदेश के अलग-अलग जनपदों के दौरे, विकास कार्यों की समीक्षा और आम नागरिकों से सीधे संवाद में बीतता है। कई अवसरों पर उन्होंने बिना पूर्व सूचना के अस्पतालों, विद्यालयों, कार्यालयों और निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया है।
मुख्यमंत्री की सबसे अलग पहचान उनका सहज और सरल व्यवहार माना जाता है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में जब छोटे-छोटे बच्चे उनके पास पहुंचकर सेल्फी लेने या तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताते हैं, तो मुख्यमंत्री बिना किसी औपचारिकता के उनके बीच पहुंच जाते हैं। बच्चों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार और मुस्कुराते हुए संवाद कई बार लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। यही अपनापन बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी देखने को मिलता है। प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय गांवों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक मुख्यमंत्री लगातार लोगों के बीच पहुंच रहे हैं। जनसभाओं के अलावा वे लाभार्थियों से सीधे संवाद कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास करते हैं। कई अवसरों पर शिकायत मिलने पर अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश देते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे शासन और प्रशासन की जवाबदेही को मजबूत करने का प्रयास दिखाई देता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि की लोकप्रियता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जनता के बीच उसकी सक्रिय मौजूदगी और व्यवहार से तय होती है। मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली में यही पहलू प्रमुख रूप से दिखाई देता है। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे उत्साह के साथ शामिल होते हैं, जबकि कई स्थानों पर लोग उनसे मुलाकात और सेल्फी को यादगार पल के रूप में संजोते नजर आते हैं। चार वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री ने विकास, कानून-व्यवस्था, निवेश, रोजगार, पर्यटन, धार्मिक यात्रा, आधारभूत संरचना और जनकल्याण से जुड़े अनेक विषयों पर सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही आम नागरिकों से निरंतर संवाद बनाए रखने की उनकी शैली भी उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। यही कारण है कि प्रदेश के अनेक हिस्सों में उन्हें एक सहज, सुलभ और जनता के बीच रहने वाले मुख्यमंत्री के रूप में देखा जाता है।

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