भ्रष्टाचार के रावणों का अंत करते धामी

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अब विजिलेंस डीआईजी ने तेज किया ऑपरेशन भ्रष्टाचारी
हर भ्रष्टाचारी और रिश्वतखोर पर विजिलेंस की नजर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री ने चार साल से भ्रष्टाचार के रावणों का अंत करने के लिए जो संकल्प लिया था उस संकल्प को वह धरातल पर उतारते आ रहे हैं और यही कारण है कि आज राज्य की जनता मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड का रक्षक मानने लगी है। वहीं देहरादून में विजिलेंस के डीआईजी ने ऑपरेशन भ्रष्टाचारी पर अपना सख्त एक्शन शुरू कर दिया है और यही कारण है कि हर भ्रष्टाचारी और रिश्वतखोर पर उनकी नजर लग गई है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने हरिद्वार नगर निगम में जमीन घोटाले के सभी गुनाहगारों पर जो सख्त एक्शन दिखाया है उससे राज्य के अन्दर हर छोटा-बडा भ्रष्टाचारी अब डर के साये मंे जी रहा है।
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने सख्त रुख अपनाया हुआ है। सरकार लगातार यह संदेश दे रही है कि प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे धरातल पर उतारने के लिए कठोर कदम भी उठाए जाएंगे। यही वजह है कि पिछले कुछ समय से विजिलेंस विभाग लगातार सक्रिय है और रिश्वत लेने के आरोपों में सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का सिलसिला जारी है। सरकारी कार्यालयों में वर्षों से चली आ रही रिश्वतखोरी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता से अवैध धन वसूलने वालों के लिए अब किसी प्रकार की राहत नहीं होगी। शिकायत मिलते ही विजिलेंस की टीमें सक्रिय होकर कार्रवाई कर रही हैं। इससे उन अधिकारियों और कर्मचारियों में भी सतर्कता बढ़ी है जो अब तक सरकारी पद का दुरुपयोग कर आम नागरिकों को परेशान करने के आरोपों में घिरे रहते थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि भ्रष्टाचार विकास की सबसे बड़ी बाधा है। उनका मानना है कि जब तक सरकारी व्यवस्था पारदर्शी नहीं होगी, तब तक योजनाओं का पूरा लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकता। इसी सोच के साथ सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही है। शासन स्तर पर शिकायतों की निगरानी, त्वरित जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर लगातार जोर दिया जा रहा है। विजिलेंस विभाग की सक्रियता का असर अब विभिन्न सरकारी महकमों में भी दिखाई देने लगा है। अधिकारी और कर्मचारी नियमों के पालन को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क नजर आ रहे हैं। जिन विभागों में पहले रिश्वतखोरी की शिकायतें आम थीं, वहां भी अब कार्रवाई का डर साफ दिखाई देता है। सरकार का कहना है कि यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है।
राज्य सरकार का दावा है कि ईमानदार अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरा सम्मान और संरक्षण दिया जाएगा, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार करने और जवाबदेही तय करने पर भी लगातार काम किया जा रहा है, ताकि आम जनता को बिना किसी अवैध लेन-देन के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके। प्रदेश में चल रही इस मुहिम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज है। कई लोग इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं। हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हर कार्रवाई निष्पक्ष, साक्ष्य आधारित और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हो, ताकि जनता का भरोसा और मजबूत हो सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा। संदेश साफ हैकृजनता के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों, सरकारी पद का दुरुपयोग करने वालों और रिश्वतखोरी के जरिए व्यवस्था को बदनाम करने वालों के लिए उत्तराखण्ड में अब कानून का शिकंजा लगातार कसता रहेगा।

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