लिफ्ट दो, आगे बढ़ो… और फिर जेब ‘ढीली’, राजधानी की सड़कों पर उजाले में खुलेआम लुट रहे बाइक चालक
क्राइम स्टोरी पड़ताल
देहरादून।
गंदा है… पर धंधा है यह….! कुछ इसी तर्ज पर रात के अंधेरे में ही नहीं दिन के उजाले में भी श्हुस्नश् का कारोबार राजधानी दून की सड़कों पर चल रहा है। लिफ्ट मांगने के लिए चौराहों, गलियों में महिलाएं और युवतियां दिख जाएंगी। कुछ छोटे बच्चों को साथ लेकर मिलेंगी तो कुछ तन्हा। इनका काम सिर्फ टार्गेट छांटकर उनके साथ सवारी करते धंधे की बात करना ही है। इशारे से शुरुआत में सौदा पटा तो जेब ढीली होना तय।
…यह उत्तराखंड की राजधानी देहरादून है साहब, यहां पर सब काम इतने सलीके से होते हैं कि लोगों को पता ही नहीं चलता कि राजधानी में विचरण कर रहे हैं या जंगलों की सैर करते हुए अपनी जेब लुटवा रहे हैं। आजकल क्या, यह काफी दिनों या महीनों से यहां पर एक धंधा सड़कों पर बड़ी ही खामोशी से चल रहा है, जिसमें एक खूबसूरत महिला छोटी बच्ची संग या युवती, अगर आप बाइक से जा रहे हैं तो हाथ देगी, आगे तक चलने के लिए लिफ्ट मांगेगी और… फिर आगे जाकर बाइक से उतरकर सीधे-सीधे आपकी जेब पर डाका डालेगी, मसलन उतरने के बाद आपको चाय का ऑफर देगी। अगर आपने चाय पीने से इनकार किया और जल्दी जाना है, कहेंगे तो फौरन गोद में मौजूद बच्ची या बच्चे के दूध पीने के लिए और घर की सब्जी आदि के लिए पांच सौ रुपये की डिमांड करती है। आप छोटी बच्ची के लिए अपने बटुवे से पांच सौ का नोट निकाल कर दे देते हैं। आपके आगे बढ़ने के बाद यही लिफ्ट-लिफ्ट का खेल फिर दूसरे बाइक या कार सवार संग दिख जाएगा।
यह किसी एक महिला या युवती द्वारा नहीं किया जा रहा, बल्कि श्दिन के उजालेश् में ऐसी कई महिलाएं और युवतियां हैं, जो रोजाना ही राजधानी की व्यस्त सड़कों पर सलीके से कपड़े पहन शिकार पर निकलती हैं। इन सबसे अनजान लोग आते जाते रहते हैं, लेकिन कुछ एक तो इनके श्चंगुलश् और झांसे में फंस ही जाते हैं। फिर खेल शुरू होता है माल समेटने का। कहने को तो हर तरफ पुलिस की चौकस निगाहें हैं पर यह मामला उनकी पकड़ से बाहर ही दिखाई देता है। शहर की बात की जाए तो तंग गलियों से निकलकर चौक चौराहों और मेन रोड पर ये श्हुस्नवालीश् खड़ी मिलेगी और लिफ्ट के लिए हाथ दे देगी।
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यहां पर ऐसे नजारे दिखते हैं रोजाना
घंटाघर से थोड़ा आगे, राजपुर रोड, सहस्रधारा रोड, रेलवे स्टेशन वाली रोड, सहारनपुर चौक के नजदीक, बल्लूवाला चौक के आसपास, आईएसबीटी के आसपास, रायपुर रोड, मालसी डियर पार्क के पास, जाखन के आसपास, हरिद्वार रोड आदि।
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केस-वन
कुछ दिन पूर्व रेलवे रोड पर एक मुंह में मास्क लगाए नन्ही बच्ची संग महिला एक बाइक चालक को हाथ देकर घंटाघर के पास छोड़ने को कहती है। बाइक चालक ने उसको लिफ्ट दी और थोड़ी ही दूर जैसे ही आगे बढ़ा, तो महिला ने पूछा… आप क्या करते हैं, कहां रहते हैं। बातों का सिलसिला जैसे ही आगे बढ़ता है तो महिला अपनी लाचारगी को बयां करते हुए कहती है… मेरा पति से तलाक हो गया है, ये देखो मेरी छोटी बच्ची है, इसको तक छोड़ कर चला गया है। फिर आगे उसका सवाल, आइये आगे चाय-कॉफी पीते हैं और एक नामी रेस्टोरेंट के पास बाइक रोकने का इशारा करती है। जब बाइक सवार ने महिला के ऑफर को यह कहकर ठुकरा दिया कि उसे काम है, चाय नहीं पी सकता तो बाइक का हैंडल पकड़कर बच्ची और घर की सब्जी आदि के लिए पैसे देने को कहती है। चूंकि, व्यस्त सड़क है और लोगों की आवाजाही बनी हुई तो बाइक चालक उसको पांच सौ का नोट पकड़ाकर आगे बढ़ जाता है। रास्ते में कुछ काम की वजह से रुकने के दौरान वही महिला फिर एक अन्य बाइक चालक के साथ राजपुर रोड पर ही जाती नजर आती है। अब आप समझ गए होंगे कि उसके साथ भी वही किया होगा, जो पहले वाले के साथ किया।
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केस-दो
एक अन्य दिन, एक बाइक चालक राजपुर रोड से घंटाघर की तरफ आ रहा था। इस दौरान एक खूबसूरत युवती ने हाथ देकर लिफ्ट मांगी। बाइक चालक ने युवती को लिफ्ट दी और पूछा कहां छोड़ना है। उसने कहा, घंटाघर…। युवक उसको लेकर आगे बढ़ा ही था युवती ने उससे चाय-कॉफी पीने का ऑफर किया। युवक ने उसके ऑफर को स्वीकार करते हुए एक चाय की दुकान पर बाइक रोकी और चाय पीने अंदर चला गया। इस बीच युवती ने भी केस वन वाली महिला की तरह अपनी लाचारगी बयां की और पैसों के जरिए मदद की बात कही। युवक ने उसकी ज्यादा डिमांड पर जब इनकार किया तो उसने कुछ ही रुपये देने को कहा। मरता क्या न करता, युवक ने कुछ रुपये देकर अपना पिंड छुड़ाया।
ये दो केस तो उदाहरण हैं, ऐसे काम दिन के उजाले में खुलेआम हो रहे और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं है। हां! पुलिस यह कहकर अपना दामन छुड़ा सकती है कि किसी ने ऐसी शिकायत नहीं की, अगर शिकायत आएगी तो जांच पड़ताल की जाएगी। मान लो कि पुलिस तक मामला लेकर चला जाए तो फंसना भी तय ही मानिए। वजह उनकी सूरत और पहनावा देखकर कोई भी आपकी सुनने वाला नहीं, पिटने के चांस तो पक्के समझो।
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सलवार सूट, जींस में रहती हैं युवतियां
लोगों को दिन के उजाले में शिकार बनाने वाली महिलाएं या युवतियां हमेशा सलवार सूट और जींस में ही रहती हैं। कहीं-कहीं पर कॉलेज गोईंग अंदाज में संवर कर सड़क पर दिख जाएंगी। पहनावे से यह भीड़ में आसानी से मिक्स हो जाती हैं। आपकी एक गलती आपके बटुवे को खाली करने के लिए काफी है।
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स्मार्ट पुलिस को भनक पर अनजान
रोजाना दिन के उजाले में चल रहे कारोबार की खबर पुलिस को भी होगी, लेकिन वह खुद को अनजान ही दिखाती है। खेल खुलेआम होता दिखाई देता है, पर पीड़ित खुलकर कुछ बोल नहीं पाता। कुछ तो अदा पर रीझ कर फंस जाते हैं तो कुछ से बेबसी के नाम पर वसूली हो जाती है। इस काम में किसी बड़े गिरोह के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
