सीएम ने चार साल में दिखा दिया अहंकार से नहीं चलती सरकार

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मानवता के सफर पर आगे बढ़ रहे धामी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में चार साल से सरकार चला रहे युवा मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक यह संदेश तो दे ही रखा है कि सरकार कभी भी अहंकार पालकर नहीं चलाई जा सकती। मानवता के सफर पर आगे बढ़ रहे सीएम को आवाम का जिस तरह से साथ मिल रहा है उससे राज्यवासियों को यह इल्म है कि उन्हें अपना एक ऐसा शासक मिल चुका है जो उनके राज्य को गुलजार करने के लिए आवाम के साथ खडा हुआ है। फलावर और फायर रूप में सरकार चला रहे सीएम आज उत्तराखण्ड के अन्दर राजनीति में इतनी लम्बी लकीर खींच चुके हैं जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी और इसी के चलते वह हर दिल अजीज बनकर अपने नाम का डंका देशभर में बजाते हुए नजर आ रहे हैं।
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो वर्षों से सत्ता को बहुत नजदीक से देखते आये हैं उन्हें इस बात का इल्म है कि सत्ता चलाने के लिए अहंकार का त्याग करना सबसे बडी जीत है इसलिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चंद मुख्यमंत्रियों की तर्ज पर सत्ता को अहंकार से न चलाकर मानवता से चलाते हुए नजर आ रहे हैं और उनके अन्दर इंसानियत जिस तरह से कूटकूट कर भरी हुई है उससे राज्य की जनता उनकी कायल हो चुकी है और उत्तराखण्ड की जनता ने अब पुष्कर सिंह धामी को गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मनोहर पार्रिकर के रूप मंे देखने लगी है क्योंकि वो भी समूचे गोवा में एक आम इंसान की तरह आवाम से सडकों पर मिलते थे और सडकों पर ही चौपाल लगाकर वह उनसे बातचीत किया करते थे। उसी तर्ज पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मानवता को मन में धारण कर सत्ता चला रहे हैं और उनके भीतर मुख्यमंत्री होने का तिनकाभर भी अहंकार दस माह में तो नजर नहीं आया। हां नजर आया तो यह आया कि वह कभी किसी ठेली वाले के पास अपनी गाडी रूकवाकर वहां गोल गप्पे खाते हुए दिखाई दिये तो कभी उन्होंने सडक के किनारे ठेली पर भून रहे भूट्टा खाने के लिए वहां अपने कदम आगे बढा दिये। उत्तराखण्ड की जनता को अब यह यकीन हो चला है कि आवाम को अपने वश में करने के लिए किस तरह से पुष्कर सिंह धामी उनके साथ एक आम इंसान की तरह कहीं भी खुले रूप से मिलते हैं और उनका यह जादू आवाम के सिर पर जिस तरह से चढकर बोल रहा है उससे उत्तराखण्ड में लम्बे अर्से तक पुष्कर युग को कोई हिला पाने का साहस नहीं दिखा पायेगा।
उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि राज्य मंे अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री सत्ता पर आसीन होते ही अहंकार में इस कदर मदमस्त हुये कि उन्हें इस बात का इल्म ही नहीं रहा कि सत्ता सदा किसी की नहीं रहती और यही कारण है कि राज्य के कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों की कुर्सी उनके अहंकार के चलते चली गई और चाहकर भी कुछ पूर्व मुख्यमंत्री दुबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने में सफल नहीं हो पाये चाहे उन्होंने अपने लिए उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक कितनी दौड क्यों न लगाई हो? उत्तराखण्ड की जनता के दिलों में अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री जगह नहीं बना पाये और यही कारण है कि आवाम के मन में इस बात का बडा क्रोध रहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होकर कुछ पूर्व मुख्यमंत्री क्यों अहंकार का रावण अपने मन के अन्दर समा बैठे थे जिसके चलते वह अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को एक तानाशाही राजा की तरह कुचलने के लिए आगे आये थे? चार साल से युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस स्वच्छता के साथ सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे बढाये उससे उत्तराखण्ड की जनता में पुष्कर सिंह धामी का जादू देखते ही बनता है और इस जादू की सबसे बडी वजह उनकी मानवता ही मानी जा रही है क्योंकि पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल मंे एक बार भी अहंकार से सत्ता चलाने के लिए अपने कदम आगे नहीं बढाये और मानवता से वह जिस तरह सत्ता चला रहे हैं उससे उन्हें उत्तराखण्ड में एक युग पुरूष की उपाधि का तोहफा मिल रहा है और यह तोहफा भाजपा के ही कुछ नेताओं को रास नहीं आ रहा है और उन्हें भविष्य की अपनी राजनीति पर बडा ग्रहण लगता हुआ दिखाई दे रहा है यही कारण है कि उनमें हलचल मची हुई है?

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