लोकायुक्त को जिंदा करो सरकार!

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उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारमुक्त तो लोकायुक्त क्यों नहीं?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को एक बडे विजन के साथ भ्रष्टाचारमुक्त करने के लिए आगे आ रखे हैं और उन्होंने संकल्प लिया हुआ है कि 2025 तक राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त कर दिया जायेगा। आवाम चाहता है कि उनका उत्तराखण्ड भ्रष्टाचारमुक्त राज्य में जल्द से जल्द शामिल हो इसलिए वह यह भी सरकार से आशा करता है कि वह खण्डूरी के लोकायुक्त को एक बार फिर जिंदा कर राज्य में सरकार की आंखों में धूल झोंककर भ्रष्टाचार करने वाले राजनेताओं और अफसरों को आवाम के सामने बेनकाब कर दिया जाये? उत्तराखण्ड के अन्दर आज भी कुछ भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों को आवाम अपनी रडार पर ले रहा है और उसका साफ मानना है कि अगर उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करना है तो फिर लोकायुक्त से आखिर क्यों परहेज किया जा रहा है? लोकायुक्त ऐसा हथियार है जिससे कोई भी भ्रष्टाचारी या घोटालेबाज नहीं बच सकता और जिन्होंने भ्रष्टाचार और घोटाले करके अकूत दौलत कमाने का वर्षों से खेल, खेल रखा है वह सब राज्य की जनता के सामने बेनकाब हो जायेगा?
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ अपना रूख साफ करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून बनाने से लेकर सामान नागरिक सहिता कानून को राज्य में लागू करने के लिए अपने कदम आगे बढाये हैं लेकिन राज्य में फैले भ्रष्टाचारियों और बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा करने वाले भ्रष्ट राजनेताओं व अफसरों पर नकेल लगाने के लिए सरकार के पास अभी तक ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिसके सहारे वह ऐसे भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब कर सके? उत्तराखण्ड में एक बार फिर आवाज उठने लगी है कि आखिर लोकायुक्त के नाम से सरकारों को क्यों करंट लगता है जिसके चलते वह राज्य में बने लोकायुक्त को धरातल पर लाने की दिशा में कोई कदम ही नहीं उठाना चाहती? बहस चल रही है कि पुष्कर सरकार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को जिंदा कर उसे मजबूती के साथ खडा करे जिससे राज्य को पच्चीस सालों से लूटते आ रहे सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों और उनके द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गई सम्पत्तियांे का काला राज उत्तराखण्ड की जनता के सामने आ सके? हैरानी वाली बात है कि खण्डूरी भाजपा के ही पूर्व मुख्यमंत्री हैं और राज्य में एक बार फिर भाजपा की सरकार है तो फिर भुवन चंद खण्डूरी के बनाये गये सशक्त लोकायुक्त को लागू करने की दिशा मंे सरकार के मुखिया कब आगे आयेंगे इस पर राज्यवासियांे की नजरें लग गई हैं?
उत्तराखण्ड के अन्दर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के मन में राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त करने का एक बडा साहस देखने को मिलता था और उनके मन में हमेशा एक पीडा रहती थी कि जिस राज्य को आंदोलन करके हासिल किया गया वहां भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत होना ही चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने राज्य के अन्दर जब एक सशक्त लोकायुक्त का गठन किया तो उस लोकायुक्त की धूम समूचे देश के अन्दर देखने को मिली थी और लोकायुक्त के पक्षधर अन्ना हजारे ने भी भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को एक मजबूत लोकायुक्त बताकर उनकी पीठ थपथपाई थी। भुवन चंद खण्डूरी के द्वारा बनाया गया लोकायुक्त पास होने के बावजूद उनके बाद आई कांग्र्रेस व भाजपा की सरकारों को आखिरकार भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को देखकर क्यों करंट लगता रहा है जिसके चलते वह इस लोकायुक्त को राज्य में हरी झण्डी देने को कभी तैयार ही नहीं दिखी? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालेमुक्त बनाने का संकल्प लिया हुआ है और उन्हांेने राज्य में भ्रष्टाचार से हुई भर्तियांे को लेकर नकल विरोधी कानून बनाया तो वहीं उन्होंने राज्य मंे सामान नागरिक सहिता कानून बनाकर देशभर में संदेश दिया था कि उत्तराखण्ड अब एक नई दिशा में आगे बढ रहा है। हालांकि राज्य की जनता के मन मंे आज भी एक पीडा है कि आखिरकार उनका अपना उत्तराखण्ड कब भ्रष्टाचारियों के चंगुल से आजाद हो पायेगा? उत्तराखण्ड में आज भी काफी राजनेता और अफसर ऐसे हैं जिन्हांेने भ्रष्टाचार से बेनामी और अकूत सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा कर रखा है? सरकार के पास ऐसा कोई मजबूत तंत्र अभी तक मौजूद नहीं है जिससे वह भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की काली कमाई का सारा राज बेनकाब करने के लिए एक बडे मिशन के साथ कोई ऑपरेशन चलाकर उन्हें बेनकाब कर सकें? उत्तराखण्ड के अन्दर यह सवाल भी खडे हो रहे हैं कि जब राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिया गया है तो फिर खण्डूरी के लोकायुक्त को जिंदा कर सरकार के मुखिया भ्रष्टाचारियांे और घोटालेबाजों को कडा संदेश देने के लिए जल्द राज्य में लोकायुक्त का गठन कर भ्रष्टाचारियों की रीढ़ पर बडा प्रहार करें।

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